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बिलासपुर की छह ग्राम पंचायतों ने इस्पात पावर के खिलाफ खोला मोर्चा

बिलासपुर। औद्योगिक क्षेत्र सिलपहरी समेत छह ग्राम पंचायतों के सरपचों ने ग्रामीणों के साथ एरन इस्पात पावर जनसुनवाई का विरोध किया है। सरपंच और ग्रामीणों ने बताया कि पर्यावरण विभाग बिना आम सहमति के जनसुनवाई का एलान कर देता है। इस बारे में किसी को कुछ पता ही नहीं चलता है। दो दिन पहले जानकारी मिली है कि सिलपहरी में एरन पावर प्लान्ट का विस्तार किया जाएगा। मामले में जनसुनवाई होगी। सरपंचों ने कहा कि पर्यावरण विभाग सारे नियम निर्देशों को दरकिनार कर उद्योगपतियों के एजेंट की तरह काम करता है। प्रभावितों को गोल मोल जवाब देकर रफादफा कर देता है।

ग्राम पंचायत सिलपहरी समेत आसपास के गांव के ग्रामीण और सरपंचों ने जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर अपनी बाद रखी। शिकायत में सिलपहरी जनप्रतिनिधि ने एरन इस्पात संयत्र विस्तार की 18 अगस्त को होने वाली जनसुनवाई को निरस्त किए जाने की मांग की है। सिलपहरी सरपंच पति भागीरथी पटेल ने बताया कि पर्यावरण विभाग और एरन इस्पात संयत्र ने मिलकर बंद कमरे में ईआइए रिपोर्ट तैयार की है। रिपोर्ट में सारी जानकारी गलत है। दो दिन पहले ईआइए रिपोर्ट के बारे में हमे जानकारी मिली है। अभी तक हमें यह भी नहीं पता था कि कोई जनसुनवाई भी होने वाली है। रिपोर्ट में बताया गया है कि सबसे नजदीक स्टेशन 12 किलोमीटर दूर दाधापारा है। जबकि नजदीक स्टेशन महज पांच किलोमीटर की दूरी पर बिलासपुर है। इसी तरह रिपोर्ट में आवागमन की गलत जानकारी दी गई है।

रिपोर्ट के अनुसार धूमा बायपास की दूरी मात्र दो किलोमीटर है। जबकि तथाकथित एरन इस्पात संयत्र से बायपास की दूरी करीब चार किलोमीटर से अधिक है। जिस सड़क से परिवहन की बात की जा रही है दरअसल वह ग्रामीण पहुंच मार्ग है। यहां से भारी वाहनों का परिवहन संभव नहीं है। रिपोर्ट में जानबूझकर 11 किलोमीटर दूर चकरभाठा एअरपोर्ट का जिक्र नहीं किया गया है। पास में ही फदहाखार का जंगल भी है। बावजूद इसके जंगल की जानकारी को रिपोर्ट से गायब किया गया है। फदहाखार जंगल फारेस्ट का ग्रीन जोन है। मामले की जानकारी सामने लाए जाने के बाद भी पर्यावरण विभाग चुप है। बावजूद विभाग के अधिकारियों ने किसी प्रकार की कार्रवाई करना उचित नहीं समझा।

सड़क निर्माण तक नहीं किया

एरन इस्पात संयत्र के लिए पूर्व में कोरमी और बसिया से सड़क प्रस्तावित किया गया है। बावजूद इसके सड़क का निर्माण नहीं कराया गया। कुछ जनप्रतिनिधियों से मिलीभगत कर धूमा और सिलपहरी से कोयला का परिवहन शुरू किया गया। आज सड़क की हालत बद से बदतर है। यदि इस्पात संयत्र का परिवहन बंद कर सड़क मरम्मत नहीं की गई तो उग्र आंदोलन होगा।

सरपंचों को जानकारी ही नहीं

प्रदर्शनकारियों ने बताया कि 18 अगस्त को जनसुनवाई होगी। इसकी जानकारी प्रभावित गांव के सरपंचों को भी नहीं है। नियमानुसार समय रहते धूमा, कोरमी, हरदी, बसिया, सिलपहरी, पोड़ी, बचरा, करार, सेवार, महमंद, लालखदान, देवरीखुर्द को जानकारी होनी चाहिए। लेकिन पर्यावरण विभाग ने जानकारी देना उचित नहीं समझा।

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