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Sunday, February 8, 2026
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मणिपुर में दो मैतेई युवाओं की रिहाई: कूकी कैदियों के बदले में सुरक्षित वापसी

मणिपुर में दो मैतेई युवाओं की सुरक्षित रिहाई और कूकी कैदियों के बदले में उनकी वापसी ने राज्य में शांति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है।

मणिपुर में बीते कुछ दिनों से हिंसक तनाव जारी है, और इसी बीच दो मैतेई युवाओं के अपहरण और फिर उनकी सुरक्षित रिहाई की घटना ने सभी का ध्यान खींचा है। कूकी उग्रवादियों द्वारा अपहृत किए गए दो मैतेई युवक, थोइथोबा और थॉइथोई, लगभग एक सप्ताह के बाद सुरक्षित घर लौट आए। यह मामला केवल अपहरण का नहीं था, बल्कि इसमें जेल में बंद 11 कूकी कैदियों की रिहाई भी एक महत्वपूर्ण पहलू रही। आइए, इस मामले के बारे में विस्तार से समझते हैं।

अपहरण और रिहाई की घटना

मणिपुर के कांगपोकपी जिले से 27 सितंबर को दो मैतेई युवाओं का अपहरण कर लिया गया था। थोइथोबा और थॉइथोई के अपहरण के बाद राज्य में तनाव और भी बढ़ गया था। इन दोनों युवाओं की रिहाई के लिए राज्य और केंद्र सरकार ने मिलकर प्रयास किए। अंततः 5 अक्टूबर की सुबह दोनों युवकों को कांगपोकपी के पुलिस अधीक्षक को सुरक्षित सौंप दिया गया।

पुलिस के अनुसार, युवाओं को सुबह लगभग 5 बजे पुलिस के सुपुर्द किया गया, और फिर राज्य पुलिस और असम राइफल्स द्वारा सुरक्षित रूप से इंफाल पहुंचाया गया। उनके परिवार वालों को भी इस पूरे घटनाक्रम की सूचना दी गई और उन्हें जल्द ही उनके परिवारों के साथ मिलाया गया। यह घटना राज्य में शांति और सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई।

कूकी कैदियों की रिहाई

इस पूरी घटना का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह था कि कूकी उग्रवादियों ने युवाओं की रिहाई के लिए शर्त रखी थी कि 11 कूकी कैदियों को जेल से रिहा किया जाए। इन 11 कैदियों को इंफाल के सजीवा जेल से रिहा किया गया। पुलिस के अनुसार, इन कैदियों को पहले ही जमानत मिल चुकी थी, लेकिन हिंसा के चलते उन्हें जेल में ही रखा गया था, क्योंकि पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध नहीं थी।

रात करीब 2 बजे, इन कैदियों को सपारमेना पुलिस स्टेशन को सौंपा गया, और कुछ घंटों बाद अपहृत युवकों की भी सुरक्षित वापसी सुनिश्चित हुई। यह रिहाई एक महत्वपूर्ण समझौते का हिस्सा थी, जिसमें राज्य और केंद्र सरकार के अधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह की प्रतिक्रिया

मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने इस घटना पर सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “कांगपोकपी से 27 सितंबर को अपहृत किए गए दोनों युवक सुरक्षित रिहा कर दिए गए हैं।” उन्होंने राज्य और केंद्र सरकार के अधिकारियों के प्रयासों की सराहना की और कहा कि उनकी कड़ी मेहनत से ही यह संभव हो पाया है कि दोनों युवक सुरक्षित घर लौट आए। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि इन प्रयासों का महत्व राज्य में शांति और सुरक्षा बहाल करने के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण है।

राज्य में बढ़ता तनाव

यह घटना मणिपुर में पहले से ही चल रहे जातीय संघर्ष के बीच सामने आई है। राज्य में मैतेई और कूकी समुदायों के बीच जारी संघर्ष ने हाल के महीनों में हिंसक रूप ले लिया है। यह संघर्ष दोनों समुदायों के बीच भूमि, पहचान और राजनीतिक अधिकारों को लेकर है। इस संघर्ष ने राज्य में स्थिति को और भी जटिल बना दिया है, जिसमें अपहरण, हिंसा और सामाजिक अशांति प्रमुख रूप से देखी जा रही है।

सरकार के प्रयास

राज्य और केंद्र सरकार लगातार मणिपुर में शांति बहाल करने की दिशा में प्रयासरत हैं। मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह और केंद्रीय अधिकारियों ने लगातार बैठकों के जरिए इस तनाव को कम करने की कोशिश की है। इस मामले में दोनों युवाओं की सुरक्षित वापसी और कूकी कैदियों की रिहाई को सरकार की एक बड़ी सफलता माना जा रहा है।

हालांकि, यह घटना मणिपुर में जारी तनाव और संघर्ष को समाप्त नहीं करती, लेकिन यह राज्य में शांति बहाल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। सरकार और सुरक्षा एजेंसियां इस संघर्ष को समाप्त करने और सभी समुदायों के बीच सामंजस्य स्थापित करने के लिए लगातार काम कर रही हैं।

भविष्य की दिशा

मणिपुर में जातीय संघर्ष और हिंसा के बावजूद, राज्य सरकार का यह प्रयास है कि वह सभी समुदायों के बीच शांति और समझौता कायम करे। युवाओं की सुरक्षित वापसी और कूकी कैदियों की रिहाई को इस दिशा में एक सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

यह घटना यह भी दिखाती है कि राज्य में शांति स्थापित करने के लिए सरकार को और भी अधिक गंभीर और व्यापक प्रयास करने होंगे। हालांकि, यह घटना एक शुरुआत है, लेकिन मणिपुर में शांति और स्थिरता लाने के लिए सभी पक्षों को एकजुट होकर काम करना होगा।

मणिपुर में दो मेइती युवाओं की सुरक्षित रिहाई और कूकी कैदियों की रिहाई ने राज्य में शांति स्थापित करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम उठाया है। हालांकि राज्य में अभी भी कई चुनौतियाँ बाकी हैं, लेकिन यह घटना यह दिखाती है कि सरकार और सुरक्षा एजेंसियों के प्रयासों से स्थिति को बेहतर बनाया जा सकता है। अब यह देखना होगा कि आगे राज्य में शांति और स्थिरता बहाल करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

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