Total Users- 1,163,788

spot_img

Total Users- 1,163,788

Saturday, February 28, 2026
spot_img

स्वास्थ्य और आयुर्वेद: चमत्कारी ‘नीलगिरी तेल’ के 7 अद्भुत फायदे

सड़कों के किनारे अक्सर दिखाई देने वाला यूकेलिप्टस का पेड़, जिसे आम भाषा में नीलगिरी कहते हैं, न केवल पर्यावरण को हरियाली देता है, बल्कि आयुर्वेद के अनुसार यह औषधीय गुणों का खजाना भी है। नीलगिरी की पत्तियों से निकाला गया तेल (Eucalyptus Oil) कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं में राहत दिलाने की क्षमता रखता है। आइए जानते हैं, नीलगिरी के तेल के 7 प्रमुख स्वास्थ्य लाभ:

1. श्वसन समस्याओं में अचूक लाभ (अस्थमा और साइनस):

नीलगिरी का तेल श्वसन प्रणाली के लिए एक वरदान है। यह अस्थमा और साइनसाइटिस के रोगियों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद है।

  • उपयोग: गर्म पानी में नीलगिरी का तेल मिलाकर भाप लेने से फेफड़ों, गले, नाक और श्वसनी नलियों में जमा कफ ढीला हो जाता है। इससे हवा का प्रवाह सुधरता है और सांस लेने में आसानी होती है, जिससे अस्थमा और साइनस से राहत मिलती है।
  • सर्दी-जुकाम: इस तेल को छाती और गले पर लगाकर मालिश करने या बार-बार सूंघने से खांसी और जुकाम में तुरंत राहत मिलती है।

2. जोड़ों और घुटनों के दर्द में राहत (गठिया):

जोड़ों और घुटनों के दर्द से पीड़ित लोगों के लिए नीलगिरी का तेल एक प्राकृतिक दर्द निवारक है।

  • उपयोग: इस तेल से मालिश करने पर दर्द कम होता है। इसमें मौजूद सूजन-रोधी (Anti-inflammatory) गुण दर्द और सूजन से राहत प्रदान करते हैं, खासकर गठिया (Arthritis) के रोगियों के लिए यह अत्यंत लाभकारी है।

3. मौखिक स्वास्थ्य में सुधार:

नीलगिरी के तेल का उपयोग टूथपेस्ट बनाने में भी किया जाता है, जो इसे मुंह की समस्याओं के लिए भी उपयोगी बनाता है।

  • उपयोग: पानी में नीलगिरी तेल की कुछ बूंदें मिलाकर गरारे करने से सांसों की दुर्गंध (Bad Breath) कम होती है। तेल के जीवाणुरोधी (Antibacterial) गुण मुंह के हानिकारक बैक्टीरिया को खत्म करते हैं, जिससे दांत और मसूड़े मजबूत और स्वस्थ बने रहते हैं।

4. प्राकृतिक मच्छर भगाने वाला (Mosquito Repellent):

नीलगिरी का तेल मच्छरों को दूर भगाने में भी प्रभावी है।

  • उपयोग: इस तेल को पानी में मिलाकर स्प्रे बोतल में भर लें और मच्छर वाली जगहों पर छिड़कें। यह एक प्राकृतिक विकर्षक (Repellent) के रूप में कार्य करता है।

5. घाव भरने में सहायक और संक्रमण से बचाव:

नीलगिरी की पत्तियां घावों के उपचार में भी उपयोगी हैं।

  • उपयोग: नीलगिरी के पत्तों का लेप बनाकर घाव पर लगाने से घाव जल्दी भरते हैं और संक्रमण (Infection) का खतरा कम होता है।

6. बुखार और थकान से राहत (नीलगिरी के पत्तों का पानी):

नीलगिरी के पत्तों को पानी में उबालकर उस पानी से स्नान करने से संक्रमण कम होता है और शरीर को जोड़ों के दर्द से भी राहत मिलती है। भाप लेने से खांसी और जुकाम में विशेष रूप से राहत मिलती है।

निष्कर्ष:

नीलगिरी का तेल एक बहुउपयोगी प्राकृतिक औषधि है जो श्वसन, दर्द, मौखिक स्वच्छता और संक्रमण से बचाव सहित कई स्वास्थ्य लाभ प्रदान करता है। हालाँकि, किसी भी गंभीर बीमारी के उपचार के लिए इसका उपयोग करने से पहले आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह लेना उचित है।

More Topics

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने SIR प्रक्रिया पर उठाए सवाल

ममता बनर्जी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण...

इसे भी पढ़े