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Saturday, February 28, 2026
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‘नीलबड़ी’ (ब्लैक हनी श्रब): आयुर्वेद का यह अनमोल खजाना है मधुमेह, लीवर और छालों का प्राकृतिक इलाज

प्रकृति ने हमें कई ऐसी जड़ी-बूटियां दी हैं, जो हमारी सेहत के लिए किसी खजाने से कम नहीं हैं। ऐसी ही एक अनूठी जड़ी-बूटी है ‘नीलबड़ी’, जिसे आम बोलचाल की भाषा में ‘ब्लैक हनी श्रब’ (Black Honey Shrub) के नाम से जाना जाता है। इसका वानस्पतिक नाम ‘फिलैंथस रेटिकुलैटस’ (Phyllanthus reticulatus) है और यह उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में बहुतायत से पाई जाती है। आयुर्वेद में सदियों से इसका इस्तेमाल कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से राहत दिलाने के लिए किया जाता रहा है।

वैज्ञानिक पुष्टि के साथ बहुआयामी फायदे

वैज्ञानिक अध्ययनों ने भी इस जड़ी-बूटी के शानदार गुणों पर मुहर लगाई है। नीलबड़ी में शक्तिशाली एंटीवायरल, एंटीमाइक्रोबियल (जीवाणु-रोधी) और सूजन-रोधी (एंटी-इंफ्लेमेटरी) गुण पाए जाते हैं।

नीलबड़ी के मुख्य स्वास्थ्य लाभ:

  • पाचन और अल्सर: यह फंगल यीस्ट संक्रमण के साथ-साथ मुंह, गले और आंतों के छालों (अल्सर) के इलाज में बेहद कारगर है।
  • मधुमेह और लीवर स्वास्थ्य: नीलबड़ी मधुमेह (ब्लड शुगर नियंत्रण) और लीवर की बीमारियों, विशेषकर हेपेटाइटिस बी में, हेपेटोप्रोटेक्टिव गुणों के कारण खास महत्व रखती है। पत्तियों और डंडियों से बना काढ़ा लीवर की समस्याओं में फायदेमंद है।
  • दर्द और कैंसर में सहायक: इसकी पत्तियों, डंडियों और छाल में कैंसर-रोधी, दर्द निवारक (एनाल्जेसिक) और घाव भरने वाले गुण होते हैं, जो मुंह, गले और आंतों के कैंसर को रोकने में सहायक हैं।
  • वात और कफ दोष का शमन: आयुर्वेद के अनुसार, नीलबड़ी शरीर में वात और कफ दोष को शांत करती है, जिससे शरीर में संतुलन बना रहता है और यह विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में भी सहायक है।

बालों और त्वचा के लिए वरदान

यह जड़ी-बूटी सिर्फ आंतरिक स्वास्थ्य के लिए ही नहीं, बल्कि बाहरी सुंदरता के लिए भी उपयोगी है:

  • बालों की देखभाल: नीलबड़ी सफेद बालों को काला करने और बालों के झड़ने को रोकने में मदद करती है।
  • त्वचा रोग: यह दाद और त्वचा के दाग-धब्बों जैसे त्वचा रोगों में भी राहत पहुंचाती है।

नीलबड़ी को पहचानें

नीलबड़ी फिलैंथेसी परिवार से संबंधित एक चढ़ाई वाली झाड़ी है, जो भारत, अफ्रीका, चीन, और ऑस्ट्रेलिया सहित कई उष्णकटिबंधीय इलाकों में मिलती है। इसकी पत्तियां अंडाकार होती हैं, और फूलों के बाद छोटे-छोटे गोल फल लगते हैं, जो पकने पर नीले-काले हो जाते हैं। इन ताजे या सूखे भागों का अर्क बनाकर उपयोग किया जाता है।

विशेषज्ञों की सलाह:

हालांकि नीलबड़ी प्राकृतिक चिकित्सा का एक सुरक्षित विकल्प है, लेकिन आयुर्वेद विशेषज्ञ इसका इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेने की सिफारिश करते हैं, ताकि सही मात्रा और सही विधि का प्रयोग किया जा सके।

यह जड़ी-बूटी स्वास्थ्य को बढ़ावा देने वाली हमारी प्राचीन आयुर्वेदिक विरासत को आज भी जीवंत रखे हुए है।

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