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Sunday, February 8, 2026
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मुरुडशेंग (Indian Screw Tree): बच्चों के पेट दर्द और मधुमेह में चमत्कारी आयुर्वेदिक औषधि

मुरुडशेंग (वैज्ञानिक नाम: Helicteres isora) एक अत्यंत महत्वपूर्ण आयुर्वेदिक जड़ी बूटी है, जिसे इंडियन स्क्रू ट्री (Indian Screw Tree) भी कहा जाता है। यह एक झाड़ीनुमा छोटा वृक्ष होता है। विशेष रूप से इसकी मुड़ी हुई, सर्पिलाकार (screw-like) शेंग (फली) अपने औषधीय गुणों के लिए प्रसिद्ध है।

आयुर्वेद में, मुरुडशेंग को उसके शीतल (ठंडी तासीर) और त्रिदोष (वात, पित्त और कफ) को संतुलित करने वाले गुणों के कारण उपयोग किया जाता है। यह पारंपरिक रूप से बालगुटी (बच्चों को दी जाने वाली आयुर्वेदिक दवा) का एक अनिवार्य घटक है।

मुरुडशेंग के प्रमुख औषधीय लाभ

  1. पेट के विकार (Stomach Ailments):
    • मुरुडशेंग का सबसे प्रसिद्ध उपयोग बच्चों की पेट की समस्याओं में होता है। यह पेट की ऐंठन (मुरडा), पेट फूलना (गैस) और दस्त (Dysentery) में तुरंत राहत देती है। यह कृमिघ्न (पेट के कीड़े मारने वाला) भी होती है।
    • शेंग को पानी या दूध में उगालकर (घिसकर) बच्चों को दिया जाता है ताकि पेट की मांसपेशियों की ऐंठन कम हो सके।
  2. मधुमेह (Diabetes) में गुणकारी:
    • इसकी जड़ की छाल का काढ़ा मधुमेह के रोगियों के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है। इसमें प्रतिऑक्सिडीकारक (Antioxidant) और प्रतिकर्करोधी (Anti-cancer) गुण पाए जाते हैं।
  3. श्वसन और कफ में राहत:
    • मुरुडशेंग की जड़ और तना कफोत्सारक (Expectorant) होते हैं। यह फेफड़ों से कफ को बाहर निकालने में मदद करती है, जिससे खांसी और श्वसन संबंधी समस्याओं में आराम मिलता है।
  4. प्रसूति पश्चात कमजोरी:
    • भारत के कई हिस्सों में, प्रसूति के बाद माता को होने वाली कमजोरी और अशक्तता को दूर करने के लिए विशेष खुराक वाले पदार्थों में मुरुडशेंग का उपयोग किया जाता है। यह पौष्टिक होती है और कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, कैल्शियम, फॉस्फोरस और आयरन का अच्छा स्रोत है।
  5. सूजन-रोधी गुण:
    • यह शोथशामक (सूजन कम करने वाली) होती है। इसका उपयोग शरीर में होने वाली सूजन को नियंत्रित करने में किया जाता है।
  6. अन्य उपयोग:
    • मुँह में छाले (तोंड येणे) और लघवी की जलन (Urinary tract issues) जैसी समस्याओं में भी इसका उपयोग पारंपरिक रूप से किया जाता है।

उपयोग का तरीका:

  • सूखे फलों (शेंग) को घिसकर चाटण या काढ़ा बनाकर बच्चों को दिया जाता है।
  • इसकी जड़ की छाल का काढ़ा मधुमेह के इलाज में प्रयोग किया जाता है।
  • इसकी शेंगें पौष्टिक होने के कारण खुराक के रूप में भी खाई जाती हैं।

(नोट: मुरुडशेंग एक पारंपरिक औषधि है। इसका उपयोग करने से पहले आयुर्वेदिक चिकित्सक या विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित है।)

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