अगर आपको बागवानी का शौक है और आप बाजार की महंगी स्ट्रॉबेरी को घर के ताजे स्वाद से बदलना चाहते हैं, तो यह खबर आपके लिए है। लाल रंगत और लाजवाब स्वाद वाला यह फल न केवल खाने में स्वादिष्ट होता है, बल्कि इसे घर पर उगाना भी बेहद आसान है। अपनी बालकनी, छत या छोटे गार्डन में स्ट्रॉबेरी के पौधे लगाकर आप पूरे सीजन केमिकल-फ्री और ताजे फल का लुत्फ उठा सकते हैं।
सही समय है अभी!
स्ट्रॉबेरी ठंडे मौसम में सबसे अच्छी बढ़ती है। इसलिए अक्टूबर से दिसंबर का समय इसके पौधारोपण के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। आइए जानते हैं इसे उगाने का सरल तरीका:
1. मिट्टी और गमले का चुनाव: स्ट्रॉबेरी के लिए हल्की और पानी निकालने योग्य (ड्रेनेज वाली) मिट्टी चाहिए।
- मिट्टी का मिश्रण: 50% गार्डन सॉयल, 30% गोबर की खाद (या कम्पोस्ट) और 20% रेत या कोकोपीट का मिश्रण तैयार करें।
- गमला: 8 से 10 इंच गहरे गमले या ग्रो बैग सबसे अच्छे होते हैं। ड्रेनेज होल (पानी निकलने का छेद) होना अनिवार्य है।
2. पौधारोपण का तरीका: आप नर्सरी से छोटे पौधे खरीदकर शुरुआत कर सकते हैं, जो ज्यादा आसान है।
- पौधों को गमले की मिट्टी में 8 से 10 सेंटीमीटर की दूरी पर लगाएं।
- ध्यान रखें कि जड़ों को पूरी तरह मिट्टी में दबा दिया जाए, लेकिन पौधे का ऊपरी तना और पत्ते बाहर रहें।
3. पानी और धूप का ध्यान:
- सिंचाई: स्ट्रॉबेरी को नमी बहुत पसंद है। हर दूसरे दिन हल्का पानी दें। ध्यान रखें कि मिट्टी नम रहे, लेकिन उसमें पानी जमा न हो (ओवरवाटरिंग से बचें)।
- धूप: पौधों को रोजाना कम से कम 4 से 5 घंटे की सीधी धूप मिलनी जरूरी है। अगर आप गर्म जगह पर रहते हैं, तो दोपहर की तेज धूप से पौधों को बचाएं।
4. पोषण और देखभाल:
- खाद: हर 15 दिन में एक बार जैविक खाद, जैसे वर्मी-कम्पोस्ट या गोबर की खाद डालें।
- देखभाल: जैसे ही पौधे पर फूल और छोटे फल आने लगें, तो नीचे के सूखे या पीले पत्तों को हटा दें। इससे फलों को तेजी से बढ़ने में मदद मिलती है।
कब तोडें अपनी स्ट्रॉबेरी?
पौधा लगाने के लगभग 60 से 70 दिन बाद फल आने शुरू हो जाते हैं। जब फल का रंग गहरा लाल हो जाए और वह पूरी तरह पक जाए, तो समझिए वह तोड़ने के लिए तैयार है। सुबह के समय तोड़ी गई स्ट्रॉबेरी सबसे ताजी और मीठी मानी जाती है।
घर पर स्ट्रॉबेरी उगाना एक मजेदार शौक है जो न केवल आपको ताजे फल देगा, बल्कि आपके घर को भी एक प्राकृतिक सुंदरता प्रदान करेगा। तो, इस सीजन में आप भी शुरुआत कीजिए अपने ‘होम फार्मिंग’ की!


