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Monday, February 9, 2026
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भोरमदेव मंदिर के रहस्यमयी इतिहास और सांस्कृतिक धरोहर का महत्व

भोरमदेव मंदिर छत्तीसगढ़ राज्य के कवर्धा जिले में स्थित एक प्रमुख ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और इसे कावेरी नदी के किनारे पर स्थित माना जाता है। यहाँ पर स्थित स्थापत्य कला और शिल्पकला का अद्वितीय उदाहरण देखने को मिलता है।

भोरमदेव मंदिर की विशेषताएँ:

  1. निर्माण काल: यह मंदिर 11वीं सदी में क्षत्रिय शासकों द्वारा बनवाया गया था। माना जाता है कि इसका निर्माण कछवाहा राजवंश के द्वारा किया गया था।
  2. स्थापत्य शैली: भोरमदेव मंदिर हिंदू मंदिर वास्तुकला के अद्भुत उदाहरणों में से एक है। इस मंदिर में चंद्रकला और उन्नत शिखर के साथ-साथ सुंदर शिल्प का प्रदर्शन किया गया है।
  3. मुख्य देवता: मुख्य रूप से यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है, हालांकि यहाँ विभिन्न देवी-देवताओं की मूर्तियाँ भी स्थापित हैं।
  4. कलात्मक महत्व: मंदिर की दीवारों पर सुंदर शिल्पकला, मूर्तियाँ और भित्तिचित्र बनाए गए हैं, जो उस समय की कला और संस्कृति को दर्शाते हैं।
  5. आध्यात्मिक महत्व: यह मंदिर स्थानीय लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है और यहाँ हर वर्ष मेला आयोजित होता है, जहाँ श्रद्धालु भगवान शिव की पूजा करते हैं।

यात्रा और पहुँच:

भोरमदेव मंदिर छत्तीसगढ़ राज्य के कवर्धा जिले में स्थित है। यह रायपुर से लगभग 120 किलोमीटर दूर है और यहाँ पहुँचने के लिए सड़क मार्ग का उपयोग किया जा सकता है।

भोरमदेव मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भारतीय स्थापत्य कला और संस्कृति का एक महत्वपूर्ण धरोहर स्थल भी है।

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