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Friday, March 13, 2026
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कोरबा: छत्तीसगढ़ में कबीर पंथ का केंद्र, कुदुरमाल धाम का ऐतिहासिक महत्व

कोरबा: छत्तीसगढ़ में कबीर पंथ का केंद्र, कुदुरमाल धाम का ऐतिहासिक महत्व

कोरबा। संत कबीर के दोहे और विचारों से पूरा देश परिचित है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले का गहरा नाता कबीर पंथ से जुड़ा हुआ है? दरअसल, कोरबा जिले के कुदुरमाल गांव को कबीर पंथ के उद्गम स्थलों में से एक माना जाता है।

कुदुरमाल धाम: कबीर पंथ का प्रमुख केंद्र
कुदुरमाल धाम के महंत मोती दास ने बताया कि भारत में कबीर पंथ की तीन प्रमुख शाखाएं हैं—कबीर चौरा शाखा, भगताही शाखा और छत्तीसगढ़ शाखा। छत्तीसगढ़ में कबीर पंथ की शुरुआत करने वाले पहले वंशगुरु मुक्तामणि साहब थे, जिन्होंने कुदुरमाल से इस पंथ के प्रचार-प्रसार की नींव रखी। यही कारण है कि छत्तीसगढ़, खासकर कोरबा जिला, कबीर पंथ के ऐतिहासिक महत्व का केंद्र बन गया।

कबीर के प्रमुख शिष्य धर्मदास की अहम भूमिका
संत कबीर के प्रमुख शिष्य संत धर्मदास का जन्म मध्य प्रदेश के उमरिया जिले के बांधवगढ़ क्षेत्र में हुआ था। उन्होंने संत कबीर से गुरु दीक्षा प्राप्त कर उनके विचारों को आगे बढ़ाया। संत कबीर ने धर्मदास को 42 वंशों का आशीर्वाद दिया और उन्हें अपने विचारों को फैलाने की जिम्मेदारी सौंपी। संत धर्मदास के वंश में ही आगे मुक्तामणि साहब का जन्म हुआ, जिन्होंने छत्तीसगढ़ में कबीर पंथ को मजबूत आधार प्रदान किया।

कुदुरमाल आज भी आस्था का केंद्र
आज भी कुदुरमाल धाम में श्रद्धालु बड़ी संख्या में आते हैं और कबीर पंथ की शिक्षाओं से जुड़ते हैं। यह स्थान सिर्फ एक धार्मिक केंद्र नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक भी है।

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