Episode – 29
मुझे लगा कि मेरी इस तरह से गुज़ारिश करने से तुम मन ही मन मुस्कुराने लगी हो . मैं
अब मिन्नत करते हुए बोला, नाराज़ हो गई ? तुमने भी तो आज सुबह नहीं आकर बदला ले
लिया . अब वही चिर – परिचित खिलखिलाहट सुनाई दी , तो मेरा बदला अपने आप ही हो
गया ? मैं तो कल रात परिवार के साथ बाहर थी . अभी कुछ देर पहले पहुंचे हैं . मैं थोड़ा
सा सावधान होते हुए बोला , तो क्या तुम्हारे आस-पास कोई है ? तुम बोली , नहीं है पर
बुलाती हूं . फिर एक सुरीला आलाप सुनाई दिया , भाभी…….. ओ भाभी . मैं घबरा कर
बोला , अभी मत बुलाओ . मैं फोन रखता हूं . उसी तत्परता से जवाब आया , क्यों डर रहे
हो ? घर पर कोई नहीं है . आज लाइन क्लियर है . अब मैं भी मस्ती में छेड़ते हुए बोला ,
तो क्या मैं तुम्हारे गाल के रसगुल्ले को खाने आ जाऊं ? तुरंत उतना ही बोल्ड जवाब मिला,
जल्दी आ जाओ . आप चाहो तो मैं रसगुल्ले के ऊपर चॉकलेट की लेयर चढ़ा कर रखती हूं .
अभी मैं चॉकलेट ही खा रही हूं . मैं बोला , सोच लो . फिर बाद में मत कहना कि मैंने
दूसरी बार सोचने का मौका नहीं दिया . तुम जान बूझकर इतराते हुए ज़िद के साथ बोली,
आइये ना , अब आ भी जाइये ना ! मेरी फट गई , इस तरह अकेले उसके घर जाना और
पकड़ा गये तो फिर उसका-मेरा क्या होगा? मैं घबराते हुए बोला , सचमुच , आना ज़रूरी है .
फिर कभी ? अब तुम पूरी तरह से खिलखिला कर हंस पड़ी . बोली, अरे बाबा, मैं तो यूंही
मज़े ले रही थी. आपको यदि अकेले में घर बुलाना है तो सबसे पहले आपको मेरे घर के
लोगों से इंट्रोड्यूस करना होगा . उसके पहले यह ठीक नहीं होगा . मेरी जान में जान आयी.
मैं अपनी सांसें संयत करते हुए बोला , देखो मलिका. ऐसा कब तक चलेगा ? तुम दूर के
ढोल ही बनकर मुझे ललचाती रहोगी और पास आने पर मेरी भावनाओं पर लगाम लगाती
रहोगी . अब तुम्हारे डायलॉग ने मुझे घायल कर दिया . तुम बोली , कौन कमबख्त तुम्हें
दिल में छुपा कर रखना चाहता है , मैं तो तुम्हें सीने से लगाना चाहती हूं . हम दोनों को
मालूम था कि हम ‘दूर से देखो छूना नहीं ‘ वाला खेल खेल रहे हैं . मैं गहरी सांस लेते हुए
एक गज़ल के लाइनें बोल उठा –
दिल गीत खुशी के गायेगा एक दिन ऐसा भी आयेगा
एक चांद हमारी बाहों में , एक चांद अन्धेरी रातों में
इक दूजे से शरमायेगा , एक दिन ऐसा भी आयेगा


