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Tuesday, March 24, 2026
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पीएम मोदी ने 35,440 करोड़ की दो नई कृषि योजनाओं का किया शुभारंभ, किसानों से सीधा संवाद

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को नई दिल्ली स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में देश भर के किसानों के साथ सीधा संवाद किया और कृषि कल्याण तथा आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से दो महत्वाकांक्षी योजनाओं का शुभारंभ किया। इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने कुल 35,440 करोड़ रुपए की योजनाओं की घोषणा की।

दो प्रमुख योजनाओं की घोषणा

प्रधानमंत्री ने कृषि क्षेत्र को मजबूती देने के लिए ‘प्रधानमंत्री धन धान्य कृषि योजना’ और ‘दलहन में आत्मनिर्भर मिशन’ की शुरुआत की।

  1. प्रधानमंत्री धन धान्य कृषि योजना: इस योजना के लिए 24,000 करोड़ रुपए का परिव्यय रखा गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना और कृषि पद्धतियों में सुधार करना है।
  2. दलहन में आत्मनिर्भर मिशन: इस मिशन में 11,440 करोड़ रुपए का बजट है, जो देश को दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने पर केंद्रित है।

इन दो प्रमुख योजनाओं के अतिरिक्त, प्रधानमंत्री ने कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन और खाद्य प्रसंस्करण से जुड़ी 5,450 करोड़ रुपए से अधिक की परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी किया।

किसानों की सफलता की कहानियाँ

कार्यक्रम में देश के विभिन्न हिस्सों से आए किसानों, पशुपालकों और मत्स्य पालकों ने अपनी सफलता की कहानियाँ साझा कीं, जो अन्य किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनीं:

  • मूल्य संवर्धन का मॉडल: हरियाणा के हिसार के एक चार्टर्ड अकाउंटेंट किसान ने ‘दुगारी वाले’ ब्रांड के नाम से काबुली चना, लहसुन और पापड़ बनाने के लिए 20 महिला स्वयं सहायता समूहों का गठन किया है। उनके उत्पाद सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) पोर्टल के माध्यम से सेना को भी बेचे जा रहे हैं।
  • सामूहिक खेती और ऋण: लगभग 1200 एकड़ भूमि पर अवशेष-मुक्त काबुली चने की खेती सामूहिक रूप से करने का सफल मॉडल साझा किया गया। वहीं, गुजरात के अमरेली जिले के एक एफपीओ ने बताया कि कैसे 2 करोड़ रुपए के जमानत-मुक्त सरकारी ऋण ने उनके 1,700 किसानों के संगठन को सशक्त बनाया।
  • पशुपालन से समृद्धि: एक किसान ने होटल रूम बॉय से 250 से अधिक गिर गायों की गौशाला के मालिक बनने तक की अपनी यात्रा साझा की, जिसमें पशुपालन मंत्रालय की 50% सब्सिडी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • मत्स्य संपदा योजना का लाभ: ‘प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना’ (PMMSY) के एक लाभार्थी ने बताया कि वह कैसे नौकरी खोजने वाले से नौकरी देने वाला बन गया, जिसने मात्र दो वर्षों में 15 लाख रुपए का वार्षिक मुनाफा कमाया और 14 लोगों को रोजगार दिया।
  • तकनीक और रेल कनेक्टिविटी: जबलपुर के एक युवा उद्यमी ने बिना मिट्टी के आलू के बीज उगाने की एरोपोनिक तकनीक का प्रदर्शन किया, जबकि कश्मीरी सेब उत्पादकों ने बताया कि रेल कनेक्टिविटी से उनके उत्पाद दिल्ली तक सस्ते और आसान तरीके से पहुंच रहे हैं।

‘श्री अन्न’ और प्राकृतिक खेती पर जोर

बातचीत के दौरान, प्रधानमंत्री मोदी ने छोटे किसानों को समूह बनाकर खेती करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने बाजरा जैसे मोटे अनाजों (जिन्हें वह ‘श्री अन्न’ कहते हैं) को पानी की कमी वाले क्षेत्रों के लिए जीवन रेखा बताया और किसानों को धीरे-धीरे प्राकृतिक खेती को अपनाने का सुझाव दिया।

किसानों ने ‘प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना’ के तहत मिलने वाली 6,000 रुपए की वार्षिक सहायता को समय पर बीज खरीदने और बुवाई करने में मददगार बताया। प्रधानमंत्री ने किसानों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि उनकी सफलता की कहानियाँ देश के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।

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