देश के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बीआर गवई का कहना है कि ‘बेल नियम है और जेल अपवाद है’ यह एक वैधानिक सिद्धांत है। इसका पालन अदालतों में पिछले दिनों बंद हो गया था। चीफ जस्टिस ने केरल हाई कोर्ट में आयोजित जस्टिस वीआर कृष्ण अय्यर मेमोरियल लेक्चर में यह बात कही। उन्होंने कहा कि बेल नियम है और जेल अपवाद इस सिद्धांत को भुलाने की कोशिश हुई, लेकिन मैंने मनीष सिसोदिया, के. कविता और प्रबिर पुरकायस्थ मामले में इसे याद दिलाया। उन्होंने कहा, ‘जस्टिस कृष्ण अय्यर का पूरी मजबूती से यह मानना था कि अंडरट्रायल लोगों को जेल में नहीं रखना चाहिए। बिना ट्रायल के उन्हें लंबे समय तक जेल में रखना सही नहीं है।’
चीफ जस्टिस ने कहा कि भारतीय न्यायपालिका में जस्टिस कृष्ण अय्यर की पहचान लीक से हटकर काम करने की रही। उन्होंने ऐसी कई चीजों को लागू किया, जिन्हें टैबू माना जाता था। उनकी ओर से ही इस सिद्धांत पर जोर दिया गया कि बेल अधिकार है और जेल अपवाद है। पिछले कुछ समय में अदालतों ने इस सिद्धांत को भुलाने की कोशिश की। मुझे खुशी है कि बीते साल जब मुझे मौका मिला तो मैंने इस सिद्धांत को फिर से याद दिलाया। मैंने प्रबिर पुरकायस्थ, मनीष सिसोदिया और के. कविता के केस में इस सिद्धांत को याद दिलाया।


