Total Users- 1,179,046

spot_img

Total Users- 1,179,046

Tuesday, March 24, 2026
spot_img

चिंता का विषय: भारत में बढ़ती डायबिटीज़ और इसे मैनेज करने के तरीके

डायबिटीज़ मेलिटस, जिसे आम भाषा में डायबिटीज़ कहा जाता है, आज भारत में एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बन गया है। कई अध्ययनों से पता चला है कि भारत में डायबिटीज़ से पीड़ित लोगों की संख्या सबसे अधिक है, और यह हर उम्र के लोगों के लिए चिंता का विषय है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इसका मुख्य कारण बदलती जीवनशैली, खान-पान की गलत आदतें और शारीरिक गतिविधि की कमी है।

डायबिटीज़ एक पुरानी (क्रोनिक) बीमारी है, जिसमें रक्त शर्करा (ब्लड ग्लूकोज़) का स्तर सामान्य से अधिक हो जाता है। यह तब होता है जब शरीर या तो पर्याप्त इंसुलिन नहीं बनाता है, या बने हुए इंसुलिन का ठीक से उपयोग नहीं कर पाता है।

वारंगल शहर के जनरल फिजिशियन और डायबेटोलॉजिस्ट डॉ. सलीम ने डायबिटीज़ के मुख्य दो प्रकारों और उनके बीच के अंतर को समझाया है:


डायबिटीज़ के प्रकार और उनका प्रबंधन

विशेषताटाइप 1 डायबिटीज़ (Type 1 Diabetes)टाइप 2 डायबिटीज़ (Type 2 Diabetes)
पहचान की उम्रआमतौर पर युवा लोगों में (जवान लोगों में)आमतौर पर 30 साल से अधिक उम्र के लोगों में
कारणपैंक्रियास की बीटा कोशिकाएं (Beta Cells) नष्ट हो जाती हैं, जिससे शरीर इंसुलिन बिल्कुल नहीं बनाता है। (जेनेटिक कारणों से होती है)।शरीर या तो पर्याप्त इंसुलिन नहीं बनाता है, या बनी हुई इंसुलिन का सही इस्तेमाल नहीं कर पाता है।
मुख्य कारणमुख्य रूप से जेनेटिक (आनुवंशिक) कारण।असंतुलित खान-पान (जंक फूड, मैदा उत्पाद, कोल्ड ड्रिंक्स, उच्च कार्बोहाइड्रेट वाले खाद्य पदार्थ) और जीवनशैली।
उपचारइंसुलिन इंजेक्शन की आवश्यकता होती है। टैबलेट से कोई मदद नहीं मिलती है।शुरुआत में टैबलेट (जो पैंक्रियास में इंसुलिन उत्पादन को बढ़ाते हैं) से नियंत्रित होती है। समय के साथ इंसुलिन की मात्रा कम होने पर इंजेक्शन की भी ज़रूरत पड़ सकती है।

रोकथाम और प्रबंधन के लिए ज़रूरी कदम

डॉक्टरों का मानना है कि जीवनशैली में कुछ सावधानियां बरतकर दोनों तरह की डायबिटीज़ को प्रभावी ढंग से मैनेज किया जा सकता है, और टाइप 2 डायबिटीज़ को तो काफी हद तक रोका भी जा सकता है।

जोखिम को कम करने और डायबिटीज़ को नियंत्रित करने के लिए निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए:

  1. पौष्टिक आहार (Nutritious Diet):
    • अपने भोजन में पोषक तत्वों से भरपूर चीजें शामिल करें।
    • जंक आइटम्स, मैदा से बने उत्पाद, कोल्ड ड्रिंक्स और अत्यधिक कार्बोहाइड्रेट वाली चीजों के सेवन से बचें।
  2. नियमित व्यायाम (Daily Exercise):
    • यह सुनिश्चित करें कि शरीर को रोज़ाना पर्याप्त शारीरिक गतिविधि मिले।
    • डॉक्टरों की सलाह के अनुसार हल्की-फुल्की एक्सरसाइज को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।
  3. वज़न नियंत्रण (Weight Management):
    • स्वस्थ वज़न बनाए रखना इंसुलिन संवेदनशीलता (Insulin Sensitivity) को बेहतर बनाने में मदद करता है।
  4. तनाव प्रबंधन (Stress Management):
    • तनाव हार्मोन्स के संतुलन को बिगाड़ता है, जिससे ब्लड शुगर लेवल प्रभावित हो सकता है। योग और ध्यान से तनाव को नियंत्रित करें।

विशेषज्ञों का संदेश स्पष्ट है: डायबिटीज़ एक प्रबंधनीय स्थिति है, और खासकर टाइप 2 डायबिटीज़ के मामलों में, आपकी जीवनशैली का चुनाव ही आपके स्वास्थ्य का भविष्य तय करता है। संतुलित जीवनशैली अपनाकर इस बढ़ती चिंता को नियंत्रित किया जा सकता है।

More Topics

नवरात्रि व्रत में भी खा सकते है समा चावल का हेल्दी और स्वादिष्ट उपमा

नवरात्रि व्रत में साबूदाना और कुट्टू से हटकर कुछ...

इसे भी पढ़े