जम्मू-कश्मीर विधानसभा का शरदकालीन सत्र आज अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दिया गया, लेकिन सत्र के अंतिम दिन विपक्ष ने उमर अब्दुल्ला सरकार को जमकर घेरा। हम आपको बता दें कि नौ दिवसीय सत्र अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण रहा, परंतु अंतिम चरण में विपक्षी दलों ने सरकार पर जनहित से जुड़े मुद्दों को अनदेखा करने का आरोप लगाते हुए तीखी टिप्पणियाँ कीं। उधमपुर से भाजपा विधायक पवन गुप्ता द्वारा बाढ़ पीड़ितों की समस्याओं पर चर्चा के लिए लाए गए स्थगन प्रस्ताव को विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर ने अस्वीकार कर दिया, जिसके विरोध में भाजपा विधायकों ने सदन से वॉकआउट किया। विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार जन-समस्याओं को नज़रअंदाज़ कर “औपचारिक विधायी कार्यवाही” में उलझी रही।
हम आपको बता दें कि विधानसभा सत्र में पांच सरकारी विधेयक पारित हुए और दो गैर-सरकारी प्रस्तावों पर चर्चा हुई। हालांकि 41 गैर-सरकारी विधेयक सूचीबद्ध थे, पर उनमें से केवल आठ पर ही चर्चा हो सकी। विपक्ष का कहना है कि सरकार ने गैर-सरकारी प्रस्तावों को “औपचारिकता” में बदल दिया है और जनहित के विषयों से दूरी बना ली है। सत्र के दौरान एक अन्य विवाद ने भी माहौल को गर्मा दिया जब नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) विधायक जावेद मिर्चल का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें वह विधानसभा कार्यवाही के दौरान मोबाइल पर “रील देखते” नज़र आए। इस पर सदन में हंगामा मच गया। मिर्चल ने आरोप लगाया कि एक पत्रकार ने “अनुचित ढंग से” वीडियो बनाया और उनके चरित्र पर प्रश्न खड़े किए।


