मालेगांव बम धमाके के केस में 18 साल बाद फैसला आया है। स्पेशल एनआईए कोर्ट ने इस केस में साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर, कर्नल पुरोहित, रमेश उपाध्याय, समीर कुलकर्णी और सुधाकर द्विवेदी समेत सभी आरोपियों को बरी कर दिया है। इस मामले में फैसला सुनाते हुए जज एके लाहोटी ने कहा कि इस केस की जांच में पर्याप्त सबूत नहीं दिए गए।
ऐसे में इन सभी आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त सबूतों के अभाव में उन्हें बरी किया जाता है। जज लाहोटी ने फैसला सुनाते हुए कहा कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं हो सकता। दरअसल इस केस में अदालत ने साफ किया कि कौन से ऐसे सवाल हैं, जिनके जवाब नहीं मिले और आरोपियों को बरी किया जा रहा है।
पहला– इस ब्लास्ट की साजिशों के लिए मीटिंग हुई थी। इसके बारे में कोई सबूत नहीं मिले हैं।
दूसरा– स्पॉट पंचनामा ठीक से नहीं किया गया। ऐसे में बहुत से सबूत सिर्फ जुबानी हैं। वास्तव में पेश नहीं किए गए।
तीसरा– बाइक साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर की थी, यह साबित नहीं हो पाया।
चौथा– धमाके के लिए RDX कर्नल पुरोहित लाए थे और बम तैयार किया था। इसके सबूत नहीं मिले।
पांचवां– मालेगांव में मस्जिद के पास बम किसने प्लांट किया, सबूत नहीं।
छठा- यह भी साबित नहीं हुआ कि धमाका बाइक में ही हुआ था या नहीं।
सातवां– किसने बाइक लगाई, इसके प्रमाण नहीं मिले।


