अफगानिस्तान में मंगलवार को एक बार फिर भूकंप के झटके महसूस किए गए। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के अनुसार, ताज़ा भूकंप की तीव्रता 3.8 मापी गई, जिसका केंद्र ज़मीन से करीब 70 किलोमीटर की गहराई में था। इससे पहले दिन में 10 किलोमीटर की उथली गहराई पर 4.5 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसके बाद क्षेत्र आफ्टरशॉक्स के लिए संवेदनशील बना हुआ है।
विशेषज्ञों के मुताबिक उथली गहराई पर आने वाले भूकंप अधिक खतरनाक माने जाते हैं, क्योंकि इनसे उत्पन्न भूकंपीय तरंगें कम दूरी तय कर सतह तक पहुँचती हैं। इससे ज़मीन अधिक हिलती है और इमारतों को नुकसान तथा जान-माल की क्षति की आशंका बढ़ जाती है।
रेड क्रॉस ने बताया कि अफगानिस्तान में शक्तिशाली भूकंपों का लंबा इतिहास रहा है। हिंदूकुश पर्वत श्रृंखला भूगर्भीय रूप से अत्यंत सक्रिय क्षेत्र है, जहाँ हर साल भूकंपीय गतिविधियाँ दर्ज की जाती हैं। देश भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों के टकराव क्षेत्र में स्थित है और कई सक्रिय भ्रंश रेखाएँ यहाँ से होकर गुजरती हैं, जिससे यह इलाका भूकंप के लिहाज़ से संवेदनशील बना रहता है।
हाल के महीनों में आए भूकंपों ने भारी तबाही भी मचाई है। 4 नवंबर को उत्तरी अफगानिस्तान में आए एक शक्तिशाली भूकंप में कम से कम 27 लोगों की मौत और सैकड़ों के घायल होने की पुष्टि हुई थी। उस झटके में ऐतिहासिक मस्जिदों सहित कई इमारतों को नुकसान पहुँचा था।
फिलहाल ताज़ा झटकों से किसी बड़े नुकसान या हताहत की तत्काल सूचना नहीं है, लेकिन प्रशासन और राहत एजेंसियाँ स्थिति पर नज़र बनाए हुए हैं।


