यदि पैर में अचानक भारीपन, खिंचाव, और धीरे-धीरे सूजन बढ़ने लगे, तो इसे हल्के में न लें। खासकर, यदि सूजन किसी चोट या दुर्घटना के बाद हो, तो तुरंत इलाज करवाना जरूरी है, क्योंकि यह स्थिति गंभीर हो सकती है। यह समस्या रक्त के थक्कों (ब्लड क्लॉट्स) के कारण होती है, जो पैर की नसों में जमा हो जाते हैं और रक्त संचार को प्रभावित करते हैं, जिससे सूजन बढ़ने लगती है।
अगर ये रक्त के थक्के ऊपर चढ़ते हुए फेफड़ों तक पहुँचते हैं, तो सांस लेने में दिक्कत हो सकती है और स्थिति गंभीर हो सकती है। इसे डीप वेन थ्रोम्बोसिस (DVT) कहते हैं।
जिन्हें यह समस्या हो सकती है:
- वे लोग जो नियमित व्यायाम या टहलने नहीं करते।
- अधिक वजन वाले लोग या जो दिनभर बैठे रहते हैं (जैसे दुकानदार, कार्यालय कर्मचारी)।
- जो लंबे समय तक खड़े रहते हैं (जैसे ट्रैफिक पुलिसकर्मी)।
- जिन महिलाओं का वजन नियंत्रित नहीं होता या जो घंटों टीवी देखती हैं।
इलाज और राहत के उपाय:
- अगर खून के थक्के जमा हैं, तो चलने-फिरने से बचें और तुरंत आराम करें।
- पैर के नीचे तकिया लगाकर पैर को ऊंचा रखें और चिकित्सक से संपर्क करें।
- खून पतला करने की दवाइयां शुरू करें।
- पैर की नसों की जांच के लिए डॉपलर स्टडी करवाई जाती है, जिससे यह पता चलता है कि ब्लड क्लॉट्स कहां जमा हैं।
- गैर-सर्जिकल वेनस थ्रोम्बेक्टमी तकनीक से बिना सर्जरी के ब्लड क्लॉट्स को बाहर निकाला जा सकता है, जिससे मरीज की स्थिति में सुधार होता है।
बचाव के उपाय:
- रोजाना कम से कम पांच किलोमीटर चलें।
- वजन को नियंत्रित रखें।
- एक घंटे से ज्यादा लगातार न बैठें और हर घंटे में थोड़ी देर के लिए टहलें।
- खड़े रहने की स्थिति में भी एक घंटे से ज्यादा न खड़े रहें और थोड़ी देर बैठें।
इस बीमारी से बचाव और शीघ्र उपचार से स्थिति को नियंत्रित किया जा सकता है।


