Total Users- 1,157,743

spot_img

Total Users- 1,157,743

Monday, February 9, 2026
spot_img

रील्स देखने से बच्चे हो रहे मायोपिया का शिकार जानें क्या है आंखों की ये बीमारी

मायोपिया आंखों की एक गंभीर बीमारी है. भारत में इसके मामले लगातार बढ़ रहे हैं. बच्चे इसका तेजी से शिकार हो रहे हैं. रील कल्चर की वजह से भी आंखों पर असर पड़ रहा है. स्क्रीन टाइम बढ़ने से भी बच्चे मायोपिया का शिकार हो रहे हैं.

यह सुनकर हैरानी होगी लेकिन आशंका जताई जा रही है कि आने वाले 10 वर्षों में देश में बच्चों की आधी आबादी मायोपिया बीमारी का शिकार हो सकती है. डॉ समीर सूद ने टीवी9 भारतवर्ष से खास बातचीत में बताया कि जिस लिहाज से बच्चों में रील कल्चर बढ़ रहा है उससे उनकी आंखों पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है. उन्होंने बताया कि इससे धीरे धीरे आंखों की रोशनी कम होती जा रही है. डॉ समीर सूद ने बताया कि देश के शहरी और ग्रामीण हर हिस्से में यह समस्या बढ़ रही है.

ग्रामीण क्षेत्र में भी बच्चों के बीच स्क्रीन टाइम काफी बढ़ गया है. इसकी वजह से उनके आंखों पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है. यही वजह है कि बच्चे मायोपिया के शिकार हो रहे हैं. उन्होंने कहा कि सबसे खतरनाक पहलू यह है कि जब तक पता चलता है तब तक आंखों की स्थिति काफी खराब हो चुकी होती है.

सोशल मीडिया बना रहा अंधा

डॉ समीर सूद ने कहा कि इसके पीछे सबसे बड़ी वजह सोशल मीडिया है. बच्चे घंटों रील्स देखते हैं. रील्स देखते समय बच्चों को यह पता ही नहीं चलता है कि वक्त कैसे निकलता जा रहा है. अधिक समय तक रील्स देखने से आंखों पर विपरीत असर पड़ता है. उन्होंने कहा कि यह स्थिती और भी अधिक नुकसानदेह तब हो जाती है जब लाइट ऑफ करके बच्चे रात को मोबाइल देखते हैं. इससे और बुरा प्रभाव पड़ता है.

ड्राई आई की बीमारी हो रही

डॉ समीर सूद ने कहा कि परेशानी की बड़ी वजह ड्राई आई है. सोशल मीडिया पर इंस्टाग्राम, टिकटॉक, फेसबुक और यूट्यूब जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर रील देखने से सभी आयु समूहों में, विशेष रूप से बच्चों और युवा वयस्कों में आंखों से जुड़ी बीमारियों की वृद्धि हो रही है. ड्राई आई की हालत यह है कि कई बच्चों में जिस मात्रा में आंसू निकलने चाहिए वह भी नहीं निकल पा रहा है. ड्राई आई सिंड्रोम, मायोपिया प्रोग्रेस, आई स्ट्रेन और यहां तक कि शुरुआती दौर में ही भेंगापन के मामले बच्चों में अधिक देखी जा रही है.

20-20 का फार्मूला कारगर

डॉ समीर सूद ने कहा कि सबसे बेहतर है कि आप बच्चों अथवा वयस्क में भी 20-20 का फार्मूला अपनाएं. इसके तहत यदि आप 20 मिनट तक मोबाइल, लैपटॉप या कम्यूटर पर काम करते हैं तो अगले 20 सेकेंड तक अपनी आंखों को आराम दें. इस वक्त अधिक से अधिक अपनी आंखे के पुतलियों को मूवमेंट करें. इस तरह के आपकी आंखों पर जो प्रभाव है उसके कम किया जा सकता है.

More Topics

एपस्टीन फाइल में दलाई लामा के नाम को उनके कार्यालय ने बताया निराधार

यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन से जुड़ी फाइलों में दलाई...

छत्तीसगढ़ में 5 मेडिकल हब

रायपुर। केंद्रीय आवास एवं शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल...

शासन के सहयोग से आत्मनिर्भरता की राह पर दिव्यांग राजेश कुमार पटेल

व्यावसायिक प्रशिक्षण बना आजीविका और आत्मसम्मान का आधार रायपुर। दृढ़...

खेल मड़ई बना स्वास्थ्य और सौहार्द का मंच – मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े

रायपुर। महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री...

इसे भी पढ़े