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Sunday, February 8, 2026
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क्या होती है हेपेटाइटिस की बीमारी, ये लिवर के लिए कैसे है खतरनाक

हेपेटाइटिस एक ऐसी बीमारी है, जो समय रहते पहचान न होने पर गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती है. शुरुआती चरण में इसके लक्षण अक्सर हल्के रहते हैं, लेकिन इलाज में देरी होने पर यह शरीर को बड़ा नुकसान पहुंचा सकती है. ऐसे में समझना जरूरी है कि यह बीमारी किन कारणों से फैलती है, इसके लक्षण क्या होते हैं और यह लिवर को कैसे प्रभावित करती है. आइए जानते हैं.

हेपेटाइटिस लिवर में सूजन होने वाली बीमारी है. लिवर शरीर का बेहद जरूरी अंग है, जो पाचन, पोषक तत्वों का एब्जॉर्प्शन, और टॉक्सिन्स को बाहर निकालने में मदद करता है. जब लिवर में सूजन होती है, तो इसका कामकाज प्रभावित हो जाता है. हेपेटाइटिस के कई प्रकार होते हैं जैसे हेपेटाइटिस A, B, C, D और E. इनमें से A और E ज्यादातर संक्रमित पानी या भोजन से फैलते हैं, जबकि B, C और D संक्रमित खून, सुई या इंटरकोर्स से फैलते हैं. यह बीमारी कुछ मामलों में अपने आप ठीक हो सकती है, लेकिन कभी-कभी यह गंभीर और लंबे समय तक रहने वाली भी हो जाती है, जो लिवर को अधिक नुकसान पहुंचा सकती है.

हेपेटाइटिस के विशेष कारणों में वायरल संक्रमण सबसे आम है. इसके अलावा अत्यधिक शराब सेवन, कुछ दवाइयों का साइड इफेक्ट, ऑटोइम्यून बीमारियां और जहरीले केमिकल्स भी कारण हो सकते हैं. शुरुआती चरण में इसके लक्षण हल्के हो सकते हैं जैसे थकान, भूख कम लगना, मतली, हल्का बुखार और पेट में दर्द. बीमारी बढ़ने पर त्वचा और आंखों का पीला पड़ना, गहरे रंग का पेशाब और बार-बार उल्टियां होना देखने को मिलता है. लंबे समय तक हेपेटाइटिस रहने पर लिवर फाइब्रोसिस, सिरॉसिस या लिवर फेल्योर का खतरा बढ़ जाता है. यह शरीर की डिटॉक्स प्रक्रिया और एनर्जी बनाने की प्रोसेस को बाधित करता है, जिससे पूरे शरीर पर बुरा असर पड़ता है.

हेपेटाइटिस लिवर के लिए कैसे खतरनाक है?

लेडी हार्डिंग हॉस्पिटल में डॉ. एलएच घोटकर बताते हैं कि हेपेटाइटिस लिवर के सेल्स को नुकसान पहुंचाता है, जिससे उनमें सूजन और जलन होती है. लिवर की मुख्य भूमिका खून से हानिकारक तत्वों को फिल्टर करना, पित्त को बनाना और शरीर के मेटाबॉलिज्म को कंट्रोल करना है. जब हेपेटाइटिस बढ़ता है, तो ये सभी प्रक्रियाएं बाधित हो जाती हैं. लगातार सूजन से लिवर टिश्यू में दाग या स्कार टिश्यू बनने लगते हैं, जिसे फाइब्रोसिस कहते हैं. समय के साथ यह सिरॉसिस में बदल सकता है, जहां लिवर सिकुड़ जाता है और उसका काम करना लगभग बंद हो जाता है.

क्रॉनिक हेपेटाइटिस B और C में लिवर कैंसर का खतरा भी बढ़ जाता है. लिवर की खराबी का असर शरीर के बाकी अंगों पर भी पड़ता है, क्योंकि यह प्रोटीन सिंथेसिस, हॉर्मोन बैलेंस और एनर्जी बनाने में अहम भूमिका निभाता है. गंभीर मामलों में यह जानलेवा भी हो सकता है, खासकर अगर समय पर इलाज न मिले.

कैसे करें बचाव

साफ और उबला हुआ पानी पिएं.

संक्रमित सुई या ब्लेड का इस्तेमाल न करें.

हेपेटाइटिस B का टीकाकरण जरूर कराएं.

असुरक्षित इंटरकोर्स से बचें.

शराब और लिवर को नुकसान पहुंचाने वाली दवाओं से दूरी रखें.

हेल्दी डाइट और स्वच्छता पर ध्यान दें.

समय-समय पर स्वास्थ्य जांच करवाते रहें.

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