सावन का महीना 11 जुलाई से शुरू हो गया है। लोगों के घरों से लेकर मंदिरों तक इस महीने का रंग चढ़ता हुआ नजर आ रहा है। वहीं सोशल मीडिया पर भी लोगों की भक्ति देखते ही बन रही है। इस बीच आपने कई बार ये सुना या पढ़ लिया होगा कि सावन का महीना भगवान शिव को बहुत प्रिय है। उन्हें इस महीने से खूब लगाव है। क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर इसके पीछे की वजह क्या है? चलिए जानते हैं कि हिंदू धर्म के महान ग्रंथों में से एक शिवमहापुराण में इसके बारे में क्या लिखा है? साथ ही दूसरी मान्यताओं के बारे में भी जानेंगे। नीचे जानें कि आखिर भगवान शिव और सावन का वो खास कनेक्शन क्या है?
मां पार्वती ने किया कठिन तप
बता दें कि सावन के महीने में मां पार्वती ने कठिन तपस्या की थी। ये तपस्या थी प्रेम को पाने की। ये तपस्या थी शिवजी को पति के रूप में पाने की। बता दें कि जब माता सती ने अपने प्राण त्यागे थे, तभी उन्होंने ये प्रण ले लिया था। कहा जाता है कि मां पार्वती के रूप में उन्होंने जन्म लिया। कठिन तपस्या करने के बाद ही भगवान शिव के साथ उनका विवाह हुआ। मां पार्वती ने 107 बार जन्म लिया था और 108वें जन्म कठिन तप के बाद उन्हें भगवान शिव मिले। कहा जाता है कि इसी वजह से उन्हें सावन का महीना सबसे ज्यादा पसंद है।
क्यों होता है रुद्राभिषेक?
इसे लेकर एक और मान्यता बहुत प्रचलित है कि देवशयनी एकादशी को भगवान विष्णु 4 महीने के लिए सो जाते हैं। चतुर्दशी को शिवजी भी सोते हैं। इस दिन वो अपने रुद्रावतार में होते हैं। कहते हैं कि जब वो इस अवतार में होते हैं तो जल्दी खुश हो जाते हैं। उन्हें गुस्सा भी जल्दी आता है। इसी वजह से सावन के महीने में उनका रुद्राभिषेक किया जाता है ताकि उन्हें प्रसन्न किया जा सके।
ससुराल क्यों गए थे शिवजी?
शास्त्रों के अनुसार सावन ही वो महीना था जब समुद्र मंथन से निकले हुए विष को शिवजी ने पी लिया था। वहीं एक किस्सा ये भी है कि भगवान शिव सावन के महीने में ही पृथ्वी लोक पर आए थे। राजा दक्ष की पत्नी के कहने पर वह पूरे सावन अपने ससुराल में ही रहे। यहां मान-सम्मान के साथ उनका स्वागत किया गया। कहा जाता है कि सावन के महीने में शिवजी पृथ्वी पर आकर लोगों पर अपनी कृपा बरसाते हैं।


