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Sunday, February 8, 2026
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मौनी अमावस्या, मौन व्रत से क्या मिलती है सिद्धि

हर साल, माघ महीने की अमावस्या को मौनी अमावस्या के रूप में मनाया जाता है। 2026 में, यह 18 जनवरी को पड़ेगी। मौनी अमावस्या 18 जनवरी को सुबह 12:03 बजे शुरू होगी और 19 जनवरी को सुबह 1:21 बजे तक चलेगी। यह दिन सिर्फ अमावस्या तक ही सीमित नहीं है; इसे आत्म-शुद्धि, आत्म-नियंत्रण और आध्यात्मिक साधना का समय माना जाता है। ज्योतिष और पुराणों के अनुसार, मौनी अमावस्या पर मौन व्रत रखने से व्यक्ति के जीवन में मानसिक और आध्यात्मिक प्रगति होती है।

इस दिन का महत्व इतना अधिक है कि इसे मनाने से धन, स्वास्थ्य, ज्ञान और मानसिक शांति प्राप्त करने के विशेष अवसर मिलते हैं। मौनी अमावस्या पर मौन व्रत रखना बहुत शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन मौन रहने, ध्यान करने और बिना किसी अनावश्यक बातचीत के आध्यात्मिक साधना करने से आत्मा शुद्ध होती है। मौन व्रत व्यक्ति के अंदर ऊर्जा और धैर्य को मजबूत करता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जो व्यक्ति दान, सेवा और प्रार्थना के साथ मौन व्रत रखता है, उसे अपने जीवन में अधिक खुशी, शांति और मानसिक संतुलन का अनुभव होता है। यह दिन अपने अंदर एक नई चेतना और आध्यात्मिक जागृति का अवसर प्रदान करता है।

मौनी अमावस्या का ज्योतिषीय महत्व:
ज्योतिषीय दृष्टिकोण से, मौनी अमावस्या माघ महीने की अमावस्या को पड़ती है, जब चंद्रमा अंधेरे में होता है। इस समय, सूर्य और चंद्रमा की स्थिति नई शुरुआत और मानसिक प्रगति के लिए अनुकूल होती है। इस दिन मौन रहकर आध्यात्मिक साधना करने से व्यक्ति के मन और चेतना पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसे न केवल मानसिक शांति का स्रोत माना जाता है, बल्कि मन को व्यवस्थित करने और जीवन में स्थिरता और निर्णय लेने की क्षमता बढ़ाने का एक साधन भी माना जाता है।

मौन व्रत के लाभ और प्राप्तियाँ:

मौन व्रत रखने के कई फायदे हैं। ऐसा माना जाता है कि यह व्रत इच्छाशक्ति बढ़ाता है, एकाग्रता और निर्णय लेने की शक्ति को मजबूत करता है। इसके अलावा, यह जीवन में तनाव और असंतुलन को कम करता है। जो व्यक्ति इस दिन दान और आध्यात्मिक साधना के साथ मौन व्रत रखता है, उसके सभी कार्य आसानी से पूरे हो जाते हैं, और उसे आध्यात्मिक संतुष्टि मिलती है। यह व्रत इंसान को अपने कामों और विचारों के प्रति जागरूक बनाता है, जिससे जीवन में स्थायी सफलता और खुशी मिलती है।

मौनी अमावस्या का व्रत कैसे रखें
मौनी अमावस्या का व्रत रखने वाले लोग सूर्योदय से सूर्यास्त तक मौन रहते हैं। इस दौरान वे ध्यान, प्रार्थना और धार्मिक ग्रंथ पढ़ते हैं। इस दिन दान करना और सेवा के काम करना भी बहुत शुभ माना जाता है। व्रत रखने से शरीर और मन दोनों शुद्ध होते हैं। यह व्रत न केवल आत्म-नियंत्रण और तपस्या का प्रतीक है, बल्कि यह भी माना जाता है कि यह व्यक्ति के अंदर मानसिक शक्ति, धैर्य और आध्यात्मिक ऊर्जा जगाता है।

जीवन पर मौनी अमावस्या का प्रभाव और संदेश
मौनी अमावस्या का व्रत जीवन में स्थिरता, सकारात्मक सोच और आध्यात्मिक विकास का रास्ता दिखाता है। इसे रखने से मानसिक शांति और संतुलन मिलता है। ज्योतिष और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन लिए गए संकल्प और आध्यात्मिक अभ्यास व्यक्ति के जीवन को लंबे समय तक सही दिशा देते हैं। संक्षेप में, मौनी अमावस्या 2026 आत्म-नियंत्रण, आध्यात्मिक अभ्यास और आध्यात्मिक उपलब्धि का एक अवसर है, जो जीवन को शांति, स्थिरता और सफलता की ओर ले जाता है।

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