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Monday, March 16, 2026
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पीर के श्राप से मुक्ति मिलने के बाद निर्माण हुआ इस माता के मंदिर का

करणी माता मंदिर की स्थापना अलवर के महाराजा बख्तावर सिंह ने करवाई थी। इतिहासकारों के अनुसार महाराजा बख्तावर सिंह ने शिकार करते समय मिले श्राप से मुक्ति मिलने के बाद इस मंदिर की स्थापना की थी। अरावली की घाटियों में स्थित इस मंदिर के आसपास सरिस्का के तीन बाघ भी विचरण करते हैं। करणी माता को चारण समुदाय की देवी के रूप में पूजा जाता है।

पीर ने दिया था श्राप: इतिहासकार हरिशंकर गोयल बताते हैं कि शहर से करीब 10 किलोमीटर दूर बाला किला में स्थित करणी माता मंदिर का निर्माण महाराजा बख्तावर सिंह ने करवाया था। इसके बाद इसे पूजा के लिए महंत को उपहार में दे दिया गया था। तब से इसी परिवार की पीढ़ियां मंदिर में पूजा करती आ रही हैं। उन्होंने बताया कि एक दिन महाराजा बख्तावर सिंह शिकार के लिए गए थे, इस दौरान उन्होंने एक जानवर का शिकार किया। महाराज द्वारा शिकार किया गया जानवर पीर के तकिए पर गिर गया। यह देखकर पीर क्रोधित हो गए और महाराजा बख्तावर सिंह से तकिया साफ करने को कहा, लेकिन महाराजा ने पीर की बात नहीं मानी और आगे बढ़ गए। अपनी बात को अनसुना होते देख पीर ने महाराजा बख्तावर सिंह को श्राप दे दिया।
बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचने लगे

महारानी की सलाह पर की माता की पूजा: इसके कारण महाराजा बख्तावर सिंह की तबीयत खराब होने लगी और कुछ समय बाद महाराजा को पेट में तेज दर्द होने लगा। तमाम उपचार करने के बाद भी जब महाराजा को पेट दर्द से राहत नहीं मिली तो महाराजा बख्तावर सिंह की संरक्षिका और महारानी रूप कंवर ने उन्हें करणी माता की पूजा करने को कहा। महारानी रूप कंवर भी बीकानेर के देशनोक में स्थित करणी माता की उपासक थीं। महाराजा बख्तावर सिंह ने संरक्षिका और महारानी रूप कंवर की बात मानकर करणी माता की पूजा शुरू कर दी महाराजा बख्तावर सिंह द्वारा करणी माता की पूजा करने के कुछ समय बाद महाराजा बख्तावर सिंह ने महल पर एक सफेद चील को देखा। इसके बाद राजा का स्वास्थ्य ठीक हो गया।
चारण समुदाय की देवी के रूप में पूजी जाती हैं करणी माता

इतिहासकार हरिशंकर गोयल ने बताया कि जब राजा का स्वास्थ्य पूरी तरह ठीक हो गया तो महाराज के दीवान उम्मेद सिंह ने बीकानेर के देशनोक में स्थित करणी माता मंदिर में चांदी के दरवाजे भेंट किए। महाराज बख्तावर सिंह ने अलवर में करणी माता मंदिर का निर्माण कराया। यह मंदिर वर्तमान में सरिस्का टाइगर रिजर्व की बफर रेंज में स्थित है। मंदिर के रास्ते में कई बार बाघ भी देखे गए हैं। अलवर में करणी माता मंदिर के महंत लोकेश ने बताया कि भक्तों को माता के दर्शन केवल चैत्र नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि में ही होते हैं। इस दौरान रोजाना हजारों की संख्या में भक्त मंदिर परिसर में पहुंचते हैं और करणी माता के दर्शन करते हैं। जिला प्रशासन ने भक्तों को सुबह 6 बजे से शाम 7 बजे तक मंदिर में दर्शन करने की अनुमति दी है। भक्त यहां आकर अपनी मन्नत का धागा बांधते हैं।

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