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Monday, March 16, 2026
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धूम-धाम से किया जा रहा है बप्पा को विदा, देशभर में ‘अगले बरस तू जल्दी आ’ की गूंज… भक्तों की आस्था का उमड़ा सैलाब

अनंत चतुर्दशी का दिन गणपति भक्तों के लिए बेहद खास होता है. 10 दिनों तक घर-घर और पंडालों में विराजमान रहने के बाद आज यानी 6 सितंबर 2025 को बप्पा को विदाई दी जा रही है. मुंबई से लेकर गुजरात तक गणेश विसर्जन की धूम देखने को मिल रही है.

 आज देशभर में अनंत चतुर्दशी के पावन अवसर पर गणेशोत्सव का समापन होने जा रहा है. 10 दिनों तक चलने वाले इस महापर्व के बाद आज भगवान गणेश की मूर्तियों का विसर्जन की भारी है. दिल्ली से लेकर महाराष्ट्र और हैदराबाद तक, हर जगह भक्त अपने प्यारे बप्पा को विदाई देने के लिए उमड़ पड़े हैं. भक्तों ने बप्पा को विदाई देने के लिए बड़े उत्साह और धूमधाम से शोभा यात्राएं निकालीं जा रही हैं. ढोल-नगाड़ों की थाप और गुलाल के रंगों के बीच, ‘गणपति बप्पा मोरया’ और ‘अगले बरस तू जल्दी आ’ के जयघोष से पूरा वातावरण गूंज उठा है. सड़कों पर भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा, हर कोई बप्पा की एक झलक पाने और उन्हें विदा करने के लिए बेताब दिख रहा है.

महाराष्ट्र से लेकर दिल्ली और नागपुर तक उत्साह

महाराष्ट्र में गणेशोत्सव की भव्यता का अलग ही रंग देखने को मिलता है. मुंबई, पुणे और नागपुर जैसे शहरों में बप्पा की विदाई के लिए भक्त बड़ी संख्या में सड़कों पर उतर आए हैं. ढोल-ताशों की गूंज और ढोल नगाड़ों की थाप” गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ” के नारों से वातावरण भक्तिमय और उत्साहपूर्ण हो गया है. दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और हैदराबाद में भी बड़ी धूमधाम से गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन किया जा रहा है. जगह-जगह शोभायात्राएं निकाली जा रही है और भक्तों ने नाचते-गाते हुए बप्पा को विदाई दे रहे हैं.

लालबागचा राजा के दर्शन के लिए उमड़ा जनसैलाब

मुंबई का सबसे प्रसिद्ध गणपति पंडाल लालबागचा राजा हर साल की तरह इस बार भी आकर्षण का केंद्र रहा. अब प्रतिमा के दर्शन और विसर्जन यात्रा में शामिल होने के लिए लाखों की संख्या में श्रद्धालु उमड़ पड़े हैं. बप्पा के दर्शन करने के बाद भक्तों ने हाथ जोड़कर प्रार्थना कर रहे हैं कि अगले साल वे फिर जल्दी आकर सबका जीवन मंगलमय करें

10 दिनों तक गूंजा गणेशोत्सव

भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी से शुरू हुआ गणेशोत्सव 10 दिनों तक पूरे देश में धूमधाम से मनाया गया. इस दौरान भक्तों ने रोजाना बप्पा की पूजा-अर्चना की, भजन-कीर्तन किए और विभिन्न सामाजिक व सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए. बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी ने इस पर्व का आनंद लिया.

बप्पा को विदाई, भावनाओं से जुड़ा पल

विसर्जन का यह अवसर भक्तों के लिए भावुक करने वाला होता है. इस मौके पर, जहां एक ओर भक्तों के चेहरे पर बप्पा को विदा करने का दुख होता है तो, वहीं दूसरी ओर अगले साल उनके फिर से आने की खुशी भी साफ झलक रही होती है. ढोल-ताशों और आतिशबाज़ी के बीच जब प्रतिमा को नदी या समुद्र में विसर्जित किया जाता है, तो हर भक्त की जुबां पर यही गुहार रहती है . “गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ.

गणेश विसर्जन का धार्मिक महत्व

गणेशोत्सव की समाप्ति पर गणपति बप्पा की प्रतिमा को जल में विसर्जित करने की परंपरा है और इसका गहरा आध्यात्मिक अर्थ भी है .

माटी से माटी तक: गणेश प्रतिमा मिट्टी से बनाई जाती है और विसर्जन के समय पुनः उसी मिट्टी में मिल जाती है. यह हमें जीवन के सत्य की ओर इशारा करता है कि हर जीव इसी प्रकृति से उत्पन्न होता है और आखिर में उसी में विलीन हो जाता है.

नकारात्मकता का अंत: विसर्जन इस बात का प्रतीक है कि बप्पा हमारे जीवन से दुख, विघ्न और नकारात्मकता को अपने साथ ले जाते हैं और हमें नई ऊर्जा, शक्ति और सकारात्मकता प्रदान करते हैं.

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