शास्त्रों के अनुसार, अष्टमी तिथि पर महागौरी की पूजा करने से जीवन की सभी बाधाएँ दूर होती हैं और भक्तों को सुख, शांति और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। देवी महागौरी को शांति और सौम्यता का प्रतीक माना जाता है। इनका रंग अत्यंत गौर वर्ण का है, जो शंख, चंद्रमा और कमल के समान है। वे श्वेत वस्त्र और आभूषण धारण करती हैं। उनकी चार भुजाएँ हैं – उनके ऊपरी दाहिने हाथ में अभय मुद्रा, निचले दाहिने हाथ में त्रिशूल, ऊपरी बाएँ हाथ में डमरू और निचले बाएँ हाथ में वर मुद्रा। इनका वाहन वृषभ है, इसलिए इन्हें वृषारूढ़ा भी कहा जाता है।
अष्टमी तिथि कब है?
इस वर्ष अष्टमी तिथि 29 सितंबर को शाम 4:30 बजे शुरू होगी और 30 सितंबर को शाम 6:00 बजे तक रहेगी। इसलिए 30 सितंबर को कन्या पूजन और अष्टमी व्रत के लिए सबसे शुभ समय माना जाता है। इस दिन पूजा करने से पूर्ण फल की प्राप्ति होती है।
दुर्गा अष्टमी का महत्व:
अष्टमी के दिन देवी महागौरी की विशेष पूजा की जाती है। इन्हें करुणा, आशीर्वाद और आध्यात्मिक शक्ति की देवी माना जाता है। इनकी पूजा करने से भय और कष्ट दूर होते हैं। देवी को अन्नपूर्णा का स्वरूप भी कहा जाता है, इसलिए इस अवसर पर कन्याओं को भोजन कराकर उनका सम्मान किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि ऐसा करने से परिवार में कभी भी अन्न और समृद्धि की कमी नहीं होती।
दुर्गा अष्टमी पर पूजा कैसे करें:
अष्टमी के दिन सुबह स्नान करके पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें। फिर दीपक जलाकर देवी दुर्गा का गंगाजल से अभिषेक करें। देवी को चावल, सिंदूर और लाल फूल चढ़ाएँ, और प्रसाद के रूप में फल और मिठाई चढ़ाएँ और भक्ति भाव से पूजा करें।
कन्या पूजन का महत्व:
नवरात्रि के दौरान कन्या पूजन का विशेष महत्व है। हालाँकि भक्त सभी दिन कन्या पूजन कर सकते हैं, लेकिन अधिकांश लोग यह अनुष्ठान अष्टमी और नवमी को करते हैं। इस बार शारदीय नवरात्रि में कन्या पूजन 30 सितंबर को अष्टमी और 1 अक्टूबर को महानवमी पर किया जाएगा।


