हिंदू धर्म गणगौर का व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित किया गया है. गणगौर के व्रत में विधि-विधान से पूजन किया जाता है. इस व्रत का पारण भी अहम होता है. अगर व्रत का सही विधि और नियम से व्रत का पारण नहीं किया जाता है, तो व्रत का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता.
हिंदू धर्म में गणगौर का व्रत बहुत विशेष माना जाता है. गणगौर का व्रत भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती को समर्पित किया गया है. गणगौर में गण का अर्थ भगवान शिव से और गौर का माता पार्वती से है. गणगौर का व्रत तृतिया तीज के नाम से भी जाना जाता है. ये व्रत रखकर महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की प्रार्थना करती हैं.
हिंदू धर्म शास्त्रों में बताया गया है कि गणगौर का व्रत कुंवारी कन्याएं भी रख सकती हैं. मान्यता है कि अगर कुंवारी कन्याएं ये व्रत रखती हैं, तो उनको मनचाहा वर मिलता है. वहीं गणगौर के व्रत का विधि और नियम अनुसार, पारण करना भी महत्वपूर्ण है. ऐसे में आइए जानते हैं कि इस व्रत के पारण की सही विधि और नियम क्या है.
आज रखा जा रहा है व्रत
गणगौर का व्रत आज रखा जा रहा है. आज चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि सुबह 9 बजकर 11 मिनट शुरू हो चुकी है. वहीं इस तिथि का समापन कल 1 अप्रैल को सुबह 5 बजकर 42 मिनट पर हो जाएगा. ऐसे में उदयातिथि के अनुसार, गणगौर का व्रत आज है. गणगौर पूजा का मुहूर्त आज सुबह 9 बजकर 11 मिनट से शुरू हो चुका है. ये पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 8 बजे तक रहेगा.
कल किया जाएगा व्रत का पारण
हिंदू धर्म शास्त्रों में बताया गया है जिस दिन गणगौर का व्रत रखा जाता है, उसके अगले दिन उसका पारण सूर्यदोय के बाद किया जाता है. ऐसे में कल सूर्योदय के बाद गणगौर के व्रत का पारण किया जाएगा.
गौणगौर व्रत के पारण की विधि
गणगौर की पूजा के बाद गणगौर को नदी, तालाब या सरोवर पर ले जाकर पानी पिलाना चाहिए. पानी पिलाने के बाद गणगौर को जल में प्रवाहित कर देना चाहिए. इसके बाद प्रसाद वितरित करना चाहिए. स्वंय भी प्रसाद ग्रहण करना चाहिए. व्रत का पारण करने के लिए सात्विक भोजन करना चाहिए. व्रत के पारण के बाद संभव हो तो दान अवश्य करना चाहिए.
व्रत पारण के नियम
व्रत का पारण कभी भी तामसिक भोजन से नहीं करना चाहिए. व्रत का पारण से समय नशीली चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए. व्रत के पारण के समय प्याज और लहसुन का सेवन नहीं करना चाहिए. व्रत पारण के समय पूजा और भक्ति में पूरी तरह से अपने आपको समर्पित रखना चाहिए. व्रत पारण के समय किसी भी प्रकार के अपशब्द किसी को नहीं बोलने चाहिए. व्रत और इसके पारण के बाद मन और शरीर को शुद्ध रखने की कोशिश करनी चाहिए. मन में नकारात्मक विचार नहीं लाने चाहिए.