गड़बडिय़ों के विरोध में… जनता दे रहीं है धरना !
महिला पार्षद की… सक्रियता से बना मामला!
भूमि घोटाला के विरुद्ध… लोगों का संघर्ष जारी है!
पूरब टाइम्स , भिलाई . छत्तीसगढ़ में अनेक जगहों पर ज़मीन संबंधित मामले , अनेक जगह सही रिकॉर्ड दुरुस्ती के ना होनेतो अनेक जगह राजस्व विभाग के पटवारी, आर.आई. व तहसीलदार की गलत कार्यशैली के कारण पेचीदा होने लगे हैं. राजस्व विभाग के द्वारा किये जाने वाले, नामांतरण, सीमांकन, बटांकन या नक्शे में खसरा काटने के कार्य में अनेक बार विभागीय कोताही तो अनेक बार घूसखोरी के कारण गड़बडिय़ों की शिकायतें होना आम हो गया है. ऐसे ही एक मामले को लेकर भिलाई नगर निगम की पार्षद व एमआईसी सदस्य नेहा साहू ने विरोध व प्रदर्शन शुरू कर दिया है. सूत्रों के अनुसार भिलाई के कोहका कुरुद क्षेत्र में भूमि रिकॉर्ड व सीमांकन में विसंगति से अनेक लोग प्रभावित हुए हैं . उन्होंने मांग की है कि पूर्ववर्ती भूमि के दस्तावेज अभिलेख साक्ष्य स्वरूप सार्वजनिक किये जाने चाहिये लेकिन राजस्व विभाग समुचित सहयोग नहीं कर रहा है. बताया जा रहा है कि पूर्व तथा वर्तमान में अनेक राजस्व कर्मचारियों के फंसने की आशंका को देखते हुए राजस्व विभाग ने असहयोग का रवैया अपनाया हुआ है . आशा करते हैं कि जन आंदोलन व उच्चाधिकारियों के दखल से यह मामला सुलझ जायेगा परंतु अनेक अन्य व्यक्तिगत पीडि़तों के लिये भी राजस्व विभाग जांच पहल करे , शिकायतों का निराकरण करे , इसी आशय से पूरब टाइम्स की यह खबर ….
पार्षद नेहा साहू की अगुवाई में जनता विरोध प्रदर्शन कर रही है !
पार्षद , वार्ड का निर्वाचित जनप्रतनिधि होता है, जिसकी पदेन जिम्मेदारी है कि वह वार्ड की अचल संपत्ति ब्यौरा सार्वजनिक करने की पहल करे और यदि कोई वार्ड की अचल संपत्ति को क्षति पहुंचाए तो उसका विरोध करे . वर्तमान में पार्षद नेहा साहू इसी जिम्मेदारी को पूरा करती नजर आ रहीं है लेकिन पटवारी और तहसीलदार की भूमिका, इस मामले में गड़बड़ी वाला लगती है . पार्षद का विरोध जनता के साथ सड़क की लड़ाई का स्वरूप ले चुका है बावजूद इसके तहसीलदार और पटवारी ने विवादित भूमि के दस्तावेज अभिलेख साक्ष्य स्वरूप सार्वजनिक नहीं किए हैं जो कि बेहद शंकास्पद प्रशासकीय कार्य व्यवहार है।
जिला प्रशासन तहसीलदार और पटवारी की जवाबदेही सुनिश्चित करवाने की पहल कब करेगा ?
दुनिया में जमीन ही एक ऐसी चीज है जो घटती बढ़ती नहीं है लेकिन तहसीलदार और पटवारी गड़बडिय़ां करके जमीन विवाद उत्पन्न करते है इसलिए मौके पर जमीन का कम ज्यादा होने का विवादास्पद मामला उत्पन्न होता है . पार्षद नेहा साहू और उसके साथी जिस जमीन के लिए संघर्ष कर रहें है, यह मामला भी जमीन का कम ज्यादा होने का मामला है . गौरतलब रहे कि इस बिना सिर पैर के विवाद में शासकीय भूखंड होने का भी कथन किया जा रहा है जो कि सीधे तौर पर तहसीलदार और पटवारी की कर्तव्य निष्ठा पर लगाया गया प्रश्न चिन्ह है जिसका संज्ञान जिला प्रशासन को लेना चाहिए ।
कहां है शासकीय जमीनों का विवरण तहसीलदार से जनता पूछ रही है ?
पार्षद नेहा साहू के साथ लोग सड़क पर उतरकर जमीन विवाद में धरना प्रदर्शन कर रहे हैं इसका मतलब है कि तहसीलदार और पटवारी अपना पदेन कर्तव्य पूरा करने में नाकाम है. परिणाम स्वरूप ऐसे विवाद सड़क की लड़ाई का स्वरूप ले रहे हैं . उल्लेखनीय है कि अगर वाकई तहसीलदार और पटवारी गड़बडिय़ां नहीं कर रहे हैं तो विवादित जमीन संबंधित दस्तावेज उन्हें सार्वजनिक कर भूमि विवाद उत्पन्न करने वाले दोषियों को चिन्हांकित कर प्रकरण दर्ज करवाना चाहिए लेकिन वर्षों से लंबित इस मामले में नौबत सड़क के लड़ाई की आ गई है, बावजूद इसके तहसीलदार और पटवारी समाधान नहीं दे पा रहें है ।
छत्तीसगढ़ भू – अभिलेख नियमावली (भाग – ढ्ढ) के अध्याय तीन भू – अभिलेख तैयार करने, उन्हें कायम रखने और उनके संशोधन को विनियमित करने संबंधी नियम का भाग एक क्षेत्र नक्शा नियम 4 के नियमानुसार, इस नियम के अंतर्गत प्रारूप (क) मे वर्ष 2010-11 से वर्ष 2024 – 25 तक भवन निर्माण के प्रयोजन के लिए उपलब्ध खुले स्थानों या भूमि – खंडों की पंजी पार्षद नेहा साहू के साथ आंदोलनरत लोगों की व्यथा का निराकरण कर सकती है तहसीलदार महोदय को इस प्रति उपलब्ध करवानी चाहिए।
सामाजिक कार्यकर्ता अमोल मालुसरे


