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Friday, March 20, 2026
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पाटन के किसानों हेतु सिंचाई व्यवस्था सुनिश्चित करवाने वाले जल संसाधन भगवान भरोसे क्यों है ?

पूरब टाइम्स, दुर्ग. छत्तीसगढ़ के  जल संसाधन विभाग में पिछली कांग्रेस सरकार के समय किये गये घपले व भ्रष्टाचार की परतें अब खुलने लगी हैं. भारत माला प्रोजेक्ट में किये गये ज़मीन व राजस्व रिकॉर्ड  के घपले में जल संसाधन के तत्कालीन कई कर्मचारी जेल में बंद हैं और कई जेल में जाने बाकी हैं . ऐसे ही एक अनियमितता की अरपा भैसाझार प्रोजेक्ट में धमक सुनाई देने लगी है . पिछले दिनों एक कार्यपालन यंत्री पर जशपुर में एफआईआर कराइ गई . अब समाजसेवियों व पूरब टाइम्स के द्वारा दबाव बनाने पर उस कार्यपालन यंत्री के साथ मिली भगत करने वाले ठेकेदारों पर भी कार्यवाही की अनुशंसा की गई है . पूरब टाइम्स ने जल संसाधन के दुर्ग वृत्त व दुर्ग संभाग की अनियमिततासों को भी विभाग के उच्चाधिकारियों को संज्ञान में लाया है . उन पर भी कार्यवाही अपेक्षित है . सूत्रो से यह पता चला है कि पिछली कांग्रेस की सरकार में इस विभाग द्वारा पाटन क्षेत्र में प्रशासकीय प्रतिवेदन तथा अनेक श्रम नियमों को ताक में रखकर , काम व खर्च कराये गये थे . शायद इसी कारण से वर्तमान विधायक भूपेश बघेल , उन अधिकारियों को संरक्षण देते हैं . जिससे उन अधिकारियों पर अभी तक जांच व कार्यवाही नहीं हुई है . अब नई सरकार के संज्ञान में लाये जाने पर संभावना यह बन रही है कि उन अधिकारियों पर अपराधिक प्रकरण दर्ज होकर, जांच व कठोर कार्यवाही हो . वर्तमान में अन्य विभागों व मामलों पर आक्रामकता दिखाते हुए भूपेश बघेल के जल संसाधन विभाग पर नरम रवैये के ऊपर एक रिपोर्ट ..

छत्तीसगढ़ का पाटन विधानसभा क्षेत्र उन्नत कृषि क्षेत्र में से एक है जहां का अधिकांश कृषि क्षेत्र उपजाऊ कृषि भूमि है । बड़े बोले भूपेश बघेल राजनीतिक मंच से अक्सर स्वयं को किसान बताकर अपने किसान होने का दावा भी करते है लेकिन क्या पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के कार्यकाल में पाटन के किसानों को सिंचाई लाभ वाकई मिला था क्या और कृषि की जान अर्थात सिंचाई जल की आवश्यकता अनुसार पाटन विधानसभा क्षेत्र को जल संसाधन राशि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सरकार ने आबंटित किया था क्या ? इस प्रश्न का उत्तर देना भूपेश बघेल के लिए चुनौती है इसलिए पाटन क्षेत्र के जल संसाधन परियोजनों पर भूपेश बघेल चुप्पी साधे रखने में ही समझदारी मानते हैं लेकिन अब यह मामला सामाजिक कार्यकर्ता अमोल मालुसरे की पहल पर जल संसाधन की फाइलों से बाहर निकल कर सुर्खियों में जगह बनायेगा और भूपेश बघेल की राजनैतिक जवाबदेही को भी स्पष्टीकरण के तौर पर जन सामान्य के सामने रखने की मांग करेगा ।

श्रमिकों के प्रति पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का रवैया कैसा है सभी जानते है इस कड़ी में जल संसाधन विभाग छत्तीसगढ़ के निर्माण कार्यों में नियोजित श्रमिकों के अधिकारों पर सुनियोजित तरीके से अतिक्रमण करने का अवसर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सरकार द्वारा खुल्लम खुल्ला दिया जाना तब स्पष्ट एवं प्रमाणित हो जायेगा जब ठेकदारों द्वारा नियोजित श्रमिकों की जानकारी कार्यपालन अभियंता जल संसाधन विभाग छत्तीसगढ़ द्वारा सार्वजनिक की जायेगी परन्तु उल्लेखनीय विडंबना यह है कि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कार्यपालन अभियंता की अनियमितताओं पर चुप्पी साध कर मौन स्वीकृति प्रदान करने वाले कार्य व्यवहार करने के लिए जाने जाते रहें है लेकिन अब सत्ता गंवाने के बाद विधायक पाटन का रवैया क्या रहेगा यह तो आने वाला समय बतायेगा।

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के कार्यकाल में जल संसाधन विभाग छत्तीसगढ़ ने पाटन विधानसभा क्षेत्र में निर्मित कि गई सिंचाई परियोजनाओ को शासन स्तर से 100 करोड़ रुपए से अधिक राशि की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान करने की जानकारी जल संसाधन विभाग छत्तीसगढ़ के दस्तावेज एवं फाइलें बता रहीं है लेकिन पाटन कृषि क्षेत्र के धरातल पर प्रशासकीय स्वीकृति अनुसार जल संसाधन निर्मित किए गए हैं क्या इस प्रश्नांकित विषय पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल कभी कोई वक्तव्य या बयान देते अब तक दिखे नहीं है उल्लेखनीय है कि, पाटन विधानसभा क्षेत्र के स्थानीय कृषक भूपेश बघेल की इस मामले की चुप्पी साधने का असल  कारण जानते है और पाटन विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेसी नेताओं को भी पता है कि जल संसाधन विषय पर चर्चा करना स्थानीय राजनीति को कौन सा मोड देगी परिणाम स्वरूप अधीक्षण अभियंता पर भूपेश बघेल की विशेष कृपा बने रहना स्वाभाविक है।

जल संसाधन विभाग दुर्ग कार्यालय के तहत कार्यान्वित योजनाओं का सामाजिक अंकेक्षण कर शासन हित रक्षण किए जाने की नितांत आवश्यकता है जिसके लिए सिंचित क्षेत्र की तुलना में कृषि उपजा आंकड़ों की समक्ष किए जाने के प्रावधान है लेकिन अधीक्षण अभियंता एवं कार्यपालन अभियंता से स्थानीय विधायक जानकारी लेकर जवाबदेही तय नहीं करते हैं इसलिए स्वाभाविक है कि अनियमितता फलेंगीं और फूलेगी जिसे रोकने का प्रयास किया जाना अपेक्षित है।

अमोल मालुसरे,सामाजिक कार्यकर्ता

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