कांग्रेस पार्टी बताएं कि शहर सरकार के निगम अपील समिति का अस्तित्व कहां है ?
मतदाता जानना चाहते हैं कि निगम अपील समिति नियमित सुनवाई क्यों नहीं करती है?
कांग्रेस की शहर सरकार ने शिकायत निवारण की त्वरित निर्णायक व्यवस्था क्यों नहीं की है ?
पूरब टाइम्स. भिलाई. नगर पलिका निगम के एक्ट के अनुसार निगम की अपील समिति का भी चुनाव पार्षदों के बीच से किया जाता है . इसमें महापौर पदेन अध्यक्ष होता है. इस अपील समिति को अपरम्पार अधिकार दिये गये हैं. यह अपील समिति उक्त नगर निगम के मामले में किसी पीडि़त की सुनवाई कर उसे न्याय दे सकता है. दूसरे शब्दों में कहें तो निगम के किसी अधिकारी या पदेन निर्वाचित प्रतिनिधि के निर्णय, कार्य या कार्यशैली के विरुद्ध महापौर अपील समिति में अपील कर सकता है. फिर अपील समिति, दोनो पक्षों के तथ्यों व साक्ष्यों के आधार पर निर्णय सुनाती है. यह निर्णय बहुमत के अधार पर होता है जिसमें महापौर के पास भी केवल एक वोट का अधिकार होता है. विभिन्न निगमों में अपील समिति के सदस्यों की संख्या, अलग अलग निर्धारित होती हैं, जिसमें विपक्ष के भी निर्धारित सदस्य होते हैं. परन्तु ऐसा लगता है कि नगर निगम भिलाई व नगर निगम रिसाली के महापौर पीडि़त नागरिकों को न्याय दिलाने का अवसर नहीं देना चाहते हैं. सूत्रों के अनुसार अनेक अपीलों की ना ही सुनवाई हुई है और ना ही निर्णय दिये गये हैं. अब देखने वाली बात यह होगी कि वर्ष 2026 के अंत में होने वाले नगर निगम चुनाव में. दोनों महापौर क्या जवाब देंगे ? पूरब टाइम्स की एक रिपोर्ट ..
कांग्रेस पार्टी के जिला संगठन को बताना पड़ेगा कि महापौर का तानाशाही रवैया कब थमेगा ?
बेहद व्यथनीय है कि नगर पालिक निगम भिलाई और रिसाली ने महापौर अपील समिति का कार्यालय निगम परिसर में खोला ही नहीं गया है , जिसके कारण आम लोग निगम संबंधित अपनी समस्याओं और शिकायतों को दर्ज करवाने के मतदाता अधिकार से वंचित हो रहें है. उल्लेखनीय है कि इस समस्या का असल कारण रिसाली और भिलाई से कांग्रेस पार्टी की टिकट पर महापौर चुनाव लडऩे वाले महापौर प्रत्याशी हैं जिन्होंने अपनी चुनावी जीत के बाद मतदाताओं से धोखाधड़ी वाला कार्य व्यवहार करते हुए महापौर अपील समिति की व्यवस्थाओं को बाधित कर जन सामान्य को न्याय दिलवाने वाली पदेन कर्तव्य पूरा नहीं किया है और मतदाताओं के अधिकारों पर अतिक्रमण किया है .
महापौर अपील समिति की जिम्मेदारियाँ
इस समिति की पहली जिम्मेदारी है कि महापौर अपील समिति के समक्ष प्रस्तुत अपील की सुनवाई करना . जिसके तहत पहला काम है, नागरिकों या विभागों द्वारा निगम के निर्णयों के खिलाफ दायर अपीलों की सुनवाई करना होता है . जैसे कि निगम द्वारा कर निर्धारण, भवन अनुमति,जुर्माना या अन्य प्रशासनिक आदेशों पर आपत्ति. इस समिति का दूसरा कार्य निराकरण और निर्णय देना है जिसके तहत समिति अपीलों पर चर्चा कर अंतिम निर्णय देती है. इस व्यवस्था के तहत कई मामलों में महापौर स्वयं अध्यक्षता करते हैं और समिति के निर्णय को लागू करवाते हैं. अपील समिति का तीसरा काम है निगरानी और पारदर्शिता सुनिश्चित करना . यह समिति सुनिश्चित करती है कि निगम के निर्णय निष्पक्ष और पारदर्शी हों. नागरिकों को न्यायिक प्रक्रिया जैसा अवसर प्रदान करना होता है . इस समिति का चौथा महत्वपूर्ण कार्य अपील प्रकरणों का रिकॉर्ड रखना है जिसके तहत सुनवाई किए गए मामलों की मूल नस्ती और आदेश पत्रकों का रिकॉर्ड रखना और अपील निराकरण की स्थिति दर्ज करना होता है
महापौर बनाम अपील समिति की विधि निर्देशित भूमिका
किसी भी नगरीय निकायों के निगम पालिक निगम की अपील समिति महापौर की भूमिका को स्पष्ट करती है . नगर निगम महापौर निगम अपील समिति का अध्यक्ष होता है जिसकी अध्यक्षता में अपीलकर्ता के अपील की सुनवाई की जाती है . इस समिति का कार्य नीतियों का क्रियान्वयन करना, विभागों का संचालन करना, नागरिकों की अपीलों का निपटारा करना, प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर नजर रखना , निगरानी करना तथा निगम द्वारा लिए गए निर्णयों की निष्पक्षता पर नजर रखना होता है .
महापौर अपील समिति नागरिक के अधिकारों की रक्षा करती है. यह समिति नागरिकों को निगम के एकतरफा निर्णयों के खिलाफ आवाज उठाने का अवसर देती है. यह समिति महापौर और निगम प्रशासन को जवाबदेह बनाती है. निगम के निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करती है. महापौर अपील समिति नगर निगम के प्रशासनिक निर्णयों पर नागरिकों की अपील सुनकर उनका न्यायपूर्ण निराकरण करती है और निगम प्रशासन और नागरिकों के बीच संतुलन बनाने का महत्वपूर्ण माध्यम है लेकिन भिलाई और रिसाली के महापौर अपना निर्वाचित कर्तव्य पूरा कर निगम अपील समिति के न्यायिक व्यवस्था पर स्थापित नहीं कर भ्रष्टाचार पनपने का अवसर बना रहें हैं .
अमोल मालुसरे सामाजिक कार्यकर्ता


