शिकायत का मुख्य उद्देश्य छ.ग.गृ.नि.मं. की प्रशासनिक दक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है
छ.ग.गृ.नि.मं. की विधिक बाध्यता सुनिश्चित करवाकर गैर-शासकीय आर्थिक गतिविधियों पर रोक लगाना है ।
प्रावधानानुसार छ.ग.गृ.नि.मं. कि विभागीय कार्यप्रणाली को सुचारू बनाकर और जवाबदेह बनाना।
पूरब टाइम्स, रायपुर . छ.ग. गृह निर्माण मंडल की स्थापना एक बेहतरीन अवधारणा के साथ की गई थी कि प्रदेश की जनता को पूर्णतः विकसित व सस्ता, सुंदर , टिकाऊ घर मिल सके परंतु चाहे क़्वालिटी में हो , टिकाऊपन में या सुंदरता में हो , गृह निर्माण मंडल पूरी तरह से फेल नज़र आता है . सरकारी ज़मीन पर जो प्रोजेक्ट धूमधाम से शुरू होते हैं , खरीददार मिलने तक उस प्रोजेक्ट को मरम्मत की आवश्यकता हो जाती है . पिछले सालों में अनेक भ्रष्टाचार के प्रकरण पकड़ाए और आए- गये हो गए . दोषियों को दंड मिलना तो दूर , उनमें से कई के प्रमोशन हो गये थे . केवल इतना ही नहीं , शासकीय कर्मचारियों के लिये शसन द्वारा बनाये कोड ऑफ कंडक्ट , सिविल सेवा आचरण अधिनियम का खुले आम उल्लंघन किया जा रहा है . ऐसा क्यों ना हो , उच्चाधिकारियों से शिकायत करने पर वे जांच कर दोषियों को दंडित करने की जगह , शिकायतों के ऊपर बैठ जाते हैं. ऐसा वे उन करमचारियों से पहचान, उनके रसूख , लेन-देन या किस अन्य कारण से करते हैं यह तो पता नहीं ? पर ऐसे ही एक प्रकरण पर पूरब टाइम्स की यह रिपोर्ट ..
क्या आयुक्त छ.ग.गृ.नि.मं. गैर शासकीय आर्थिक गतिविधियों में शामिल अधिकारियों को विशेष संरक्षण देने की मंशा रखते है ?
छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल के अधिकारियों द्वारा गैर-शासकीय आर्थिक गतिविधियों या अनियमित कार्य व्यवहार पर अंकुश लगाने के लिए प्रशासकीय कार्यवाही की प्रक्रिया सामान्यतः सतत् चलते रहना विधि अपेक्षित है लेकिन वर्तमान इस विधिक व्यवस्था को सुनिश्चित करवाने के मामले में शून्यता दिखाई दे रहीं है क्योंकि आयुक्त छ.ग.गृ.नि.मं. सतर्कता बरतने के पदेन कर्तव्य को पूरा करने के मामले में स्वयं प्रश्नांकित स्थिति में है क्योंकि आयुक्त द्वारा लोकहित शिकायतों पर संज्ञान लेकर शासनहित सुनिश्चित करवाने वाली कार्यवाहियों को पूरा नहीं किया जा रहा है ।
प्रशासकीय कार्यवाही की प्रक्रिया का पहला चरण है प्रारंभिक जाँच लेकिन छ.ग.गृ.नि.मं.प्र का प्रशासनिक अधिकारी यह नहीं करवा रहा है ऐसा क्यों ?
विभागीय अधिकारियों का गैर शासकीय आर्थिक गतिविधियों में संलिप्त होने की शिकायत या संदेहास्पद गतिविधि की सूचना मिलने पर विभागीय स्तर से प्राथमिक जाँच की जाती है।
विधि अपेक्षित है कि ऐसी स्थिति में संबंधित अधिकारी के कार्य व्यवहार, वित्तीय लेन-देन और निर्णयों की नियमानुसार समीक्षा की जाती है। दोषी अधिकारी से स्पष्टीकरण मांगा जाता है लेकिन छ.ग.गृ.नि.मं. के प्रशासनिक अधिकारी को दी गई लिखित शिकायत की जांच नहीं करवाई जा रहीं है । जो को मामले को दबाए जाने का प्रयास प्रतीत होता हैं जिसका कारण क्या है यह जानने की उत्सुकता सभी की है ।
कारण बताओ नोटिस जारी नहीं करने वाले प्रशासनिक अधिकारी का अप्रत्यक्ष संरक्षण स्पष्ट नजर आ रहा है ।
छ.ग.गृ.नि.मं. के लोकसेवक द्वारा गैर शासकीय सोसायटी का पंजीयन करवाये जाने का आरोप पंजीकृत सोसायटी नियमावली की प्रमाणित प्रति के साथ प्रस्तुत कर, इस विधि मान्य प्रमाण के आधार पर लिखित शिकायत की गई है । जो कि प्रथम दृष्टांत तर्क संगत शिकायत आधार है तत् संबंध में प्रावधानित है कि, यदि प्रारंभिक जाँच में अनियमितता पाई जाती है, तो दोषी / आरोपी अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया जाता है तथा आरोपी अधिकारी को अपने पक्ष में लिखित स्पष्टीकरण देने का अवसर दिया जाता है। उल्लेखनीय है कि ऐसी विधि अपेक्षित कार्यवाही छ.ग.गृ.नि.मं. का प्रशासनिक अधिकारी नहीं कर रहा है और स्वयं उच्चस्तरीय प्रशासकीय अपराध कर रहा है ।
छ.ग.गृ.नि.मं. का प्रशासनिक अधिकारी विभागीय जाँच समिति का गठन कर नियमानुसार जांच क्यों नहीं करवा रहा है ?
नियमित पद पर पदस्थ अधिकारी द्वारा विभागीय अनुमति प्राप्त किये बिना गैर शासकीय सोसायटी का पंजीयन करवाकर आर्थिक गतिविधियों में संलिप्तता के गंभीर मामलों में निष्पक्ष और विद्यमान्य जांच के लिये विभागीय जाँच समिति गठित की जाती है। यह समिति गवाहों, दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड की जाँच करती है। समिति की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्यवाही तय होती है और विभाग स्तरीय निर्णय लिया जाता है परंतु यह कार्यवाही करने के लिये जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी प्रक्रिया विहीन रहकर स्वयं प्रश्नांकित स्थिति में है ऐसा क्यों है यह प्रश्न अनुत्तरित स्थिति में है और शोध का विषय है ।
अनुशासनात्मक कार्यवाही से आरोपी को बचाने के लिये प्रशासनिक अधिकारी की विशेष मेहरबानी वाला कार्य व्यवहार कब रुकेगा ?
विभागीय पद पर सेवारत लोकसेवक द्वारा गैर शासकीय सोसायटी का पंजीयन करवाकर आर्थिक गतिविधियों को अंजाम देने के लिये दोषसिद्ध किये जाने पर तथा दोषी पाए जाने पर दंडात्मक कार्यवाही की जा सकती है । जिसमें वेतन रोकना (जैसा कि हाल ही में कुछ अधिकारियों का एक माह का वेतन रोका गया था) स्थानांतरण (तबादला), पदावनति या निलंबन, गंभीर मामलों में सेवा से बर्खास्तगी जैसी प्रशासकीय कार्यवाही की जाती है परंतु प्रशासनिक अधिकारी की विशेष मेहरबानी रहने की स्थिति स्थिति में ऐसी कार्यवाही कैसे हो पाएगी यह यक्ष विधिक प्रश्न है ? जिसका उत्तर प्रशासनिक अधिकारी को देना पड़ेगा ।
आरोपित लोकसेवक अपनी प्रतिक्रिया, अपील और पुनरीक्षण करवाने वाली कार्यवाहियों से प्रशासनिक अधिकारी की विशेष मेहरबानी के कारण बच रहा है। उल्लेखनीय है कि, जन सामान्य को आर्थिक नुकसान पहुंचने के लिये सुनियाजीत आर्थिक गतिविधियों में संलिप्तता विषयक आरोपों की नोटिस सूचना की प्रति प्राप्त करने वाले छ.ग.गृ.नि.मं. के आरोपी लोकसेवक का प्रतिक्रिया विहीन रहना । यह स्पष्ट करता है कि, शिकायत का विधि सम्मत आधार है और आरोपित लोकसेवक की प्रतिक्रिया विहीन स्थिति आरोपों को विषयवस्तु की सत्यता को मौन सहमति दे रहीं है । शिकायत पर आयुक्त छ.ग.गृ.नि.मं. ने संज्ञान लेने का पदेन कर्तव्य पूरा नहीं किया है । जिसका कारण क्या है यह शिकायत पर छ.ग.गृ.नि.मं. प्रबंधन एवं प्रशासन द्वारा की जाने वाली कार्यवाही की नोटशीट का अवलोकन कर पर स्पष्ट होगा
अमोल मालूसरे सामाजिक कार्यकर्ता


