हिसाब किताब की जांच करने वाले खाद्य विभाग के तंत्र को पहचान लीजिए .
गड़बड़ी करने वाले खाद्य विभाग के अधिकारियों को अब स्पष्टीकरण देना पड़ेगा .
सामाजिक अंकेक्षण काने वाली कार्यवाही प्रक्रिया को आप भी समझ लीजिए .
पूरब टाइम्स, रायपुर, छत्तीसगढ़ शासन खाद्य विभाग के प्राधिकारियों की पदेन जिम्मेदारी के प्रति जवाबदेही तय करवाने के लिए आवश्यक सभी प्रावधान किए गए है , जिसको जन सामान्य को समझ लेना आवश्यक है क्योंकि छत्तीसगढ़ सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पारदर्शिता और जवाबदेही) नियम, 2017 जिला स्तर पर विभागीय कार्यवाहियों को पकडऩे में सक्षम है. गौर तलब रहे कि, यह नियम तकनीकी निगरानी, सामाजिक अंकेक्षण और कानूनी जवाबदेही को एक साथ जोड़ता है. इससे राशन वितरण में पारदर्शिता बढ़ती है और अधिकारी-कर्मचारी की जिम्मेदारी तय होती है. इसलिए इस लेख के माध्यम से जानकारी को स्पष्ट किया जा रहा है. जिससे पाठक इस नियम से परिचित हो सकें. उल्लेखनीय है कि शासन ने तय की कार्यवाही प्रक्रिया को चार व्यवस्थाओं में बाटकर समझने से शिकायतकर्ता को कार्यवाही करवाना आसान हो जाता है और इसी कानूनी आधार का इस्तेमाल कर जिला दुर्ग और अन्य जिलों के खाद्य विभाग की भूमिका की समीक्षा जनता घर बैठे कर सकती है ! पढि़ए चार व्यवस्थाओं को जो कि पूरब टाइम्स के इस लेख में स्पष्ट किए गए हैं .
पहली व्यवस्था है ऑनलाइन ट्रैकिंग सिस्टम :
इस व्यवस्था का इस्तेमाल कर सभी राशन दुकानों और गोदामों का स्टॉक व वितरण डेटा ऑनलाइन दर्ज किया जाता है. जिसके आधार पर जिला स्तर के अधिकारी किसी भी समय वितरण की स्थिति देख सकते हैं और गड़बड़ी पकड़ सकते हैं. इसलिए इस डेटा तक पहुंच स्थापित कर जनता द्वारा भी वस्तुस्थिति की जानकारी लेने हेतु दस्तावेजिक प्रमाण हासिल किए जा सकते हैं . जन सामान्य अपनी सक्रियता दिखाकर वास्तविक दस्तावेजिक प्रमाण इसी ऑनलाइन ट्रैकिंग सिस्टम व्यवस्था के तहत हासिल कर सकते हैं . जिसके आधार पर शिकायत विषयवस्तु पुख्ता और प्रमाणित होगी . परिणाम स्वरूप इस आधार पर को जाने वाली दंडात्मक कार्यवाही को किया जाना सामान्यत: विधि सम्मत माना जायेगा.
दूसरी व्यवस्था है शिकायत निवारण तंत्र :
विभागीय नियमों के तहत ऑनलाइन शिकायत पोर्टल और राज्य खाद्य आयोग जैसी व्यवस्था है. जिसके तहत जिला स्तर पर सुविधा स्थापित किए जाने के प्रावधान है और इन्हीं प्रावधानों के तहत जिला स्तर पर प्राप्त शिकायतों की नियमित जांच और कार्यवाही अनिवार्य है, जिससे विभागीय लापरवाही तुरंत उजागर होती है. इसलिए पहलीऑनलाइन ट्रैकिंग सिस्टम से दस्तावेजीक प्रमाण जब शिकायतकर्ता हासिल करता है और इन पुख्ता प्रमाणों के आधार पर शिकायत करेगा तो ऐसी शिकायत के आधार पर होने वाली जांच कार्यवाही से विधि सम्मत निर्णय लिया जाना संभव होगा और शिकायत कर्ता की शिकायत जनहित के प्रमाण लायेगी.
तीसरी व्यवस्था है सामाजिक अंकेक्षण (Social Audit) :
जिसके तहत ग्राम सभा और जनभागीदारी के माध्यम से खाद्यान्न वितरण की समीक्षा होती है. इस समीक्षा के आधार पर जिला प्रशासन को इन अंकेक्षणों की रिपोर्ट संकलित कर कार्यवाही करनी होती है. उल्लेखनीय है कि इस व्यवस्था के तहत जन सामान्य अपने निर्वाचित जनप्रतनिधि के माध्यम से शिकायत विषयवस्तु की जानकारी देकर प्राधिकृत जांच अधिकारी के सामने शिकायत मुद्दा उठा सकते है इसलिए यह व्यवस्था अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के मुद्दों पर व्यवहारिक प्रशासकीय नियंत्रण स्थापित करने वाली व्यवस्था है .

चौथी व्यवस्था है जवाबदेही तय करना :
जिसके तहत नियमों में स्पष्ट है कि यदि किसी अधिकारी / कर्मचारी की लापरवाही या भ्रष्टाचार पाया जाता है तो विभागीय कार्यवाही की जाएगी. जिसके तहत जिला स्तर पर खाद्य अधिकारी और कलेक्टर को सीधे जिम्मेदार ठहराया गया है. इसलिए जवाबदेही सुनिश्चित करवाने के मामले में जिले के शीर्ष अधिकारी शिकायत पर विधि सम्मत कार्यवाही करने को बाध्य हो जाते हैं क्योंकि शिकायत विषय पर लापरवाही करने वाले अधिकारी लेट-लतीफी करता है तो स्वयं को कटघरे में ले जाता है
व्यवहारिक एवं संभावित चुनौतियाँ जो इस व्यवस्था पर विपरीत प्रभाव डालकर बाधित कर सकती है .
पहली है तकनीकी निर्भरता: यह पूरी व्यवस्था इंटरनेट आधारित है इसलिए इंटरनेट या सर्वर की समस्या से निगरानी प्रभावित हो सकती है. मशीन के कारण होने वाली अपूर्ण और अधूरी एंट्री ग्राहकों और दुकानदारों की परेशान कर रहीं है . देखने में आया है कि बार मशीन, सर्वर और इंटरनेट का तालमेल विफल होने से वास्तविक डेटा एंट्री नहीं हो पा रहीं है और विवाद की स्थिति निर्मित होती है.
दूसरा व्यवधान है स्थानीय दबाव: विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में जानकारी के आभाव में सामाजिक अंकेक्षण को दबाने की कोशिश हो सकती है.
तीसरा मुद्दा है कार्यवाही में देरी: ऑनलाइन उपलब्ध जानकारी को अभिप्राप्त करने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण दस्तावेजिक प्रमाण के आभाव में शिकायत दर्ज होने के बाद भी विभागीय कार्यवाही समय पर न हो तो जवाबदेही कमजोर पड़ती है.
छत्तीसगढ़ सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पारदर्शिता और जवाबदेही) नियम, 2017 जिला स्तर पर विभागीय कार्यवाहियों को पकडऩे में सक्षम है क्योंकि इसमें ऑनलाइन निगरानी, शिकायत निवारण, सामाजिक अंकेक्षण और जवाबदेही तंत्र को समावेशीत कर अनिवार्य किया गया है. जिससे राशन वितरण, स्टॉक प्रबंधन और अधिकारियों की जिम्मेदारी त्वरित पारदर्शी रूप से दर्ज होती है. इसलिए इस नियम के विधिक पहलुओं का आधार लेकर हमारे अनुश्रवण लेख तैयार किया जा रहा है .
अमोल मालुसरे सामाजिक कार्यकर्ता


