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Wednesday, March 25, 2026
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खाद्य विभाग दुर्ग द्वारा अनुपालनीय निर्णयों का बंटाधार करने वाले आरोपी कैसे पकड़ायेंगे ?

पूरब टाइम्स, रायपुर, छत्तीसगढ़ शासन खाद्य विभाग के प्राधिकारियों की पदेन जिम्मेदारी के प्रति जवाबदेही तय करवाने के लिए आवश्यक सभी प्रावधान किए गए है , जिसको जन सामान्य को समझ लेना आवश्यक है क्योंकि छत्तीसगढ़ सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पारदर्शिता और जवाबदेही) नियम, 2017 जिला स्तर पर विभागीय कार्यवाहियों को पकडऩे में सक्षम है. गौर तलब रहे कि, यह नियम तकनीकी निगरानी, सामाजिक अंकेक्षण और कानूनी जवाबदेही को एक साथ जोड़ता है. इससे राशन वितरण में पारदर्शिता बढ़ती है और अधिकारी-कर्मचारी की जिम्मेदारी तय होती है. इसलिए इस लेख के माध्यम से जानकारी को स्पष्ट किया जा रहा है. जिससे पाठक इस नियम से परिचित हो सकें. उल्लेखनीय है कि शासन ने तय की कार्यवाही प्रक्रिया को चार व्यवस्थाओं में बाटकर समझने से शिकायतकर्ता को कार्यवाही करवाना आसान हो जाता है और इसी कानूनी आधार का इस्तेमाल कर जिला दुर्ग और अन्य जिलों के खाद्य विभाग की भूमिका की समीक्षा जनता घर बैठे कर सकती है ! पढि़ए चार व्यवस्थाओं को जो कि पूरब टाइम्स के इस लेख में स्पष्ट किए गए हैं .

चौथी व्यवस्था है जवाबदेही तय करना :

जिसके तहत नियमों में स्पष्ट है कि यदि किसी अधिकारी / कर्मचारी की लापरवाही या भ्रष्टाचार पाया जाता है तो विभागीय कार्यवाही की जाएगी. जिसके तहत जिला स्तर पर खाद्य अधिकारी और कलेक्टर को सीधे जिम्मेदार ठहराया गया है. इसलिए जवाबदेही सुनिश्चित करवाने के मामले में जिले के शीर्ष अधिकारी शिकायत पर विधि सम्मत कार्यवाही करने को बाध्य हो जाते हैं क्योंकि शिकायत विषय पर लापरवाही करने वाले अधिकारी लेट-लतीफी करता है तो स्वयं को कटघरे में ले जाता है

व्यवहारिक एवं संभावित चुनौतियाँ जो इस व्यवस्था पर विपरीत प्रभाव डालकर बाधित कर सकती है .

पहली है तकनीकी निर्भरता: यह पूरी व्यवस्था इंटरनेट आधारित है इसलिए इंटरनेट या सर्वर की समस्या से निगरानी प्रभावित हो सकती है. मशीन के कारण होने वाली अपूर्ण और अधूरी एंट्री ग्राहकों और दुकानदारों की परेशान कर रहीं है . देखने में आया है कि बार मशीन, सर्वर और इंटरनेट का तालमेल विफल होने से वास्तविक डेटा एंट्री नहीं हो पा रहीं है और विवाद की स्थिति निर्मित होती है.

दूसरा व्यवधान है स्थानीय दबाव: विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में जानकारी के आभाव में सामाजिक अंकेक्षण को दबाने की कोशिश हो सकती है.

तीसरा मुद्दा है कार्यवाही में देरी: ऑनलाइन उपलब्ध जानकारी को अभिप्राप्त करने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण दस्तावेजिक प्रमाण के आभाव में शिकायत दर्ज होने के बाद भी विभागीय कार्यवाही समय पर न हो तो जवाबदेही कमजोर पड़ती है.

छत्तीसगढ़ सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पारदर्शिता और जवाबदेही) नियम, 2017 जिला स्तर पर विभागीय कार्यवाहियों को पकडऩे में सक्षम है क्योंकि इसमें ऑनलाइन निगरानी, शिकायत निवारण, सामाजिक अंकेक्षण और जवाबदेही तंत्र को समावेशीत कर अनिवार्य किया गया है. जिससे राशन वितरण, स्टॉक प्रबंधन और अधिकारियों की जिम्मेदारी त्वरित पारदर्शी रूप से दर्ज होती है. इसलिए इस नियम के विधिक पहलुओं का आधार लेकर हमारे अनुश्रवण लेख तैयार किया जा रहा है .
अमोल मालुसरे सामाजिक कार्यकर्ता

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