माता की पहचान सुनिश्चित किये बिना बच्चे का जन्म प्रमाण बनाने कैसे बनाया ?
जब जन्म देने वाली माता का नाम मरीज रिकॉर्ड में गलत है तो पिता की पहचान कैसे साबित होगी ?
अवैध वैवाहिक संबंध को लेकर उपजे विवाद में नर्सिंग होम की भूमिका संदेहास्पद क्यों है ?
पूरब टाइम्स, बिलासपुर. आजकल भारत के हर नागरिक के लिये आधार कार्ड आव्श्यक पहचान पत्र बन गया है परंतु यदि जन्म प्रमाण पत्र ही गलत हो तो बच्चे के विधिक मा. बाप के प्रमाण का क्या आधार होगा . जानकारी के अनुसार आजकल जन्म प्रमाणपत्र पर माता का नाम आवश्यक हो गया है . अवैध/ज़बरदस्ती संबंधों या अविधिक शादी ( दूसरी शादी इत्यादि ) के लिये तो माता का नाम और ज़्यादा आवश्यक हो गया है . परंतु ऐसे मामलों में कई अस्पताल पैसों के लेन-देन या अन्य कारणों से बच्चे के जन्म के सर्टिफिकेट से मां का नाम ही गायब कर देते हैं या गलत नाम लिख देते हैं जबकि मां का आधार कार्ड नंबर भी हॉस्पिटल को अपने रिकॉर्ड में रखना आवश्यक होता है . ऐसा ही एक मामला , बिलासपुर के जी.बी. अस्पताल का , प्रकाश में आया है . बताया जा रहा है कि इस की संपूर्ण जानकारी सीएमएचओ कार्यालय व नगर निगम बिलासपुर को देने के बाद भी वे तथाकथित हॉस्पिटल पर कार्यवाही करने से बच रहे हैं. क्या हॉस्पिटल द्वारा यह सुनियोजित अपराध निरंतर किया जा रहा है ? क्या इसमें अन्य लोक सेवकों की संलिप्तता भी है ? मामले की गहन जांच होने पर दूध का दूध और पानी का पानी हो जायेगा . पूरब टाइम्स की एक रिपोर्ट …
जी.बी. हॉस्पिटल एंड मैटर्नीटी होम ने क्या तथाकथित लेन देन करके माता के झूठे नाम के आधार पर, जुड़वां बच्चों का जन्म प्रमाण बनाने का अपराध नहीं किया है ?
झूठी या अपूर्ण जानकारी के आधार पर जन्म प्रमाण पत्र बनाना एक गंभीर अपराध है। यदि कोई लोकसेवक और चिकित्सक (Public Servant) जानबूझकर ऐसा करता है, तो उसके विरुद्ध भारतीय कानून में कड़े दंड के प्रावधान हैं। भारतीय न्याय संहिता (BNS) प्रभावी हो चुकी है, जो फर्जी और झूठे नाम पर जन्म मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने वाले और प्रावधानों के विरुद्ध गड़बड़ी करने वाले लोकसेवकों को तत्काल सजा देने की सक्षमता रखते हैं। इसी प्रावधान के तहत बिलासपुर के अस्पताल और इसके संचालक डॉक्टर की विधिवत सप्रमाण साक्ष्य के आधार पर शिकायत की गई है । उल्लेखनीय है कि शिकायतकर्ता ने बेहद गंभीर आरोप डॉक्टर के विरुद्ध लगाया है । आरोपित किया गया है कि डॉक्टर ने जुड़वा बच्चों को जन्म देने वाली वास्तविक का माता जन्म प्रमाण पत्र प्रकरण में दर्ज नहीं करके आपराधिक और दंडनीय अपराध करके शासकीय प्रशासकीय कार्यवाही को सुनियोजित तरीके से दूषित किया है.
जन्म प्रमाण जारी करने वाले नगर निगम का अधिकारी क्या जी.बी. हॉस्पिटल एंड मैटर्नीटी होम अस्पताल संचालक के आपराधिक कार्य व्यवहार को बेपर्दा होने से रोक पायेगा ?
लोकसेवकों की जवाबदेही तय करने के लिए प्रासंगिक कानूनी प्रावधान हैं । जिनका अनुपालन कर नगरीय निकायों के अधिकारियों द्वारा जन्म एवं मृत्यु का प्रमाण पत्र जारी किया जाता है इस प्रावधान के विपरीत बिलासपुर निगम के जन्म प्रमाण पत्र रजिस्ट्रार कार्यकाल के कार्य व्यवहार में मिलीभगत से अंजाम दी गई गंभीर गड़बड़ियां आरोपित तौर पर सामने आ रहीं है । जिसके अनुसार नर्सिंगहोम एक्ट और जन्म प्रमाण पत्र जारी करने के आधारभूत विधि निर्देशों की अवमानना का आरोप सप्रमाण लगाया जा रहा है । जिसकी शिकायत पर होने वाली जांच कार्यवाही पर सभी की नजर है उल्लेखनीय है जांच कार्यवाही के निर्णय के आधार पर स्पष्ट होगा कि आरोपित जन्म प्रमाण पत्र मामले में रजिस्ट्रार कितना कर्तव्य निष्ट है ।
सीएचएमओ एवं नगर निगम बिलासपुर के अधिकारी अगर दोषी पाए गए तो उनके विरुद्ध क्या कार्यवाही होगी ?
नवीन आपराधिक कानून – 2023 के भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 201 (पुरानी IPC की धारा 167) के अनुसार यदि कोई लोकसेवक, जिसे कोई दस्तावेज (जैसे जन्म प्रमाण पत्र) तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है, जानबूझकर उसे गलत तरीके से तैयार करता है ताकि किसी को लाभ हो या किसी को क्षति पहुंचे, तो उसे 3 साल तक का कारावास, जुर्माना, या दोनों से दंडित किया जा सकता है। इसी अनुक्रम में BNS की धारा 256 (पुरानी IPC की धारा 218) स्पष्ट तौर पर कहती है कि यदि कोई लोकसेवक किसी व्यक्ति को सजा से बचाने के लिए या किसी संपत्ति को बचाने के गलत इरादे से रिकॉर्ड में हेरफेर करता है, तो उसे 3 साल तक की जेल और जुर्माना हो सकता है। गौर तलब रहे कि BNS की धारा 234 और 235 ये धाराएं विशेष रूप से ‘झूठे प्रमाण पत्र’ जारी करने और उनके उपयोग से संबंधित हैं। यदि कोई लोकसेवक यह जानते हुए कि जानकारी झूठी है, प्रमाण पत्र पर हस्ताक्षर करता है या उसे जारी करता है, तो उसे उसी तरह दंडित किया जाएगा जैसे कि उसने झूठी गवाही (Perjury) दी हो। भारत सरकार द्वारा किये गये कानूनी बदलाव ने लोकसेवकों के सुनियोजित अपराध के विरुद्ध कड़े प्रावधान किये है जिसके तहत बिलासपुर के दोषी लोकसेवकों के विरुद्ध कार्यवाही की जा सकती है ।
जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण अधिनियम 1969 से स्पष्ट प्रावधान किये गये हैं परिणाम स्वरूप दोषी व आरोपी अधिकारियों एवं डॉक्टर के विरुद्ध कार्यवाही होगी ।
जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण अधिनियम के तहत भी दोषी डॉक्टर एवं अन्य आरोपियों के विरुद्ध दंडनीय प्रशासनिक और कानूनी कार्यवाही का प्रावधान है । गौर तलब रहे कि यदि रजिस्ट्रार या संबंधित अधिकारी जानबूझकर गलत प्रविष्टि करता है, तो उस पर विभागीय जांच के साथ-साथ आर्थिक दंड भी लगाया जा सकता है। कानून और नियमों के उल्लंघन पर दोषी लोकसेवकों को पद से निलंबन और बर्खास्तगी जैसी विभागीय कार्रवाइयां भी की जाती हैं। उल्लेखनीय है कि अगर शिकायतकर्ता अपने आरोपों को साबित करने में सफल होगा तो दोषी डॉक्टर की डिग्री वापस ली जा सकती है तथा नर्सिंग होम का लाइसेंस निरस्त किया जा सकता है व ऐसी कार्यवाही संस्थापित की जा सकती हैं ।
बिलासपुर शहर में संचालित जी.बी. हॉस्पिटल एंड मैटर्नीटी होम के विरुद्ध गंभीर आरोपों के साथ व्यथित महिला ने सीएमएचओ और नगर निगम बिलासपुर कार्यालय में शिकायत दर्ज करवाई है । शिकायत विषयवस्तु कहती है कि जुड़वा बच्चों को जन्म देने वाली माता का नाम झूठा दर्ज किया गया है क्योंकि माता का आधार कार्ड क्रमांक सूचना देने वाले प्रपत्र तथा डॉक्टर द्वारा दी जाने वाले निर्धारित सूचना प्रारूप में नहीं दिया गया है इसलिए वस्तुस्थिति की जांच किया जाना जरूरी है . विभागीय जांच से असल दोषी सामने आयेगा ।
अमोल मालूसरे सामाजिक कार्यकर्ता


