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Thursday, March 26, 2026
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छत्तीसगढ़ शासन ने प्लेसमेंट ठेकेदारों के एकधार सौंपा है कि…विभागाध्यक्षों को कार्यालयीन कर्मियों की नियुक्ति का अप्रत्यक्ष लाभ दिलवाया है ?

प्लेसमेंट एजेंसीज़ या ठेकेदार से कर्मियों को लेना सरकारी विभागों को बहुत बेहतर विकल्प लगता है क्योंकि जब जैसा और जितना कार्य हुआ उसके आधार पर, कुशल या अकुशल कर्मचारी लिया जा सकता है.
-प्लेसमेंट एजेंसीज़ भी अपने भेजे कर्मचारी को कम भुगतान कर टेंडर के अनुसार अधिक भुगतान प्राप्त करते हैं . अनेक बार अपने बनाये, नियम व शर्तों के आधार पर किसी को भी काम से निकाल देती हैं.

पूरब टाइम्स, रायपुर. पिछले दिनों रायपुर नगर निगम की महापौर मीनल चौबे के निर्देश पर प्लेसमेंट एजेंसी मेसर्स अनशर्यान सर्विसेस प्राइवेट लिमिटेड अमनपुर जबलपुर की सुरक्षा निधि की राशि को राजसात कर ठेका निरस्त कर दिया गया। बताया गया कि इस फर्म के माध्यम से कार्यरत 57 कंप्यूटर ऑपरेटर और 2 स्टेनोग्राफर को समयावधि में वेतन भुगतान ना कर अनावश्यक पत्र व्यवहार कर, नगर पालिक निगम रायपुर का समय बर्बाद किया जा रहा था और समयावधि में प्लेसमेंट कर्मचारियों का वेतन भुगतान नहीं किया जा रहा था। यह तो एक उदाहरण हुआ प्लेसमेंट एजेंसीज़ द्वारा अपने कर्मचारियों का शोषण करने का. परंतु अनेक बार सरकारी निगम, मंडल व विभाग की भी उन एजेंसीज़ को एग्रीमेंट के तहत इस तरह से फंसा लेते है कि ना एजेंसीज़ से निगलते अनता है और ना ही उगलते बनता है. ऐसे में एजेंसीज़ नुकसान खाकर भी भाग खड़ी होती हैं. पूरब टाइम्स की एक रिपोर्ट ..

छत्तीसगढ़ शासन में प्लेसमेंट कर्मचारियों की नियुक्ति प्रक्रिया मुख्यतः ठेका/आउटसोर्सिंग व्यवस्था पर आधारित है, जिसमें निजी एजेंसियों के माध्यम से कर्मचारियों की भर्ती की जाती है। सूत्रों के अनुसार वर्तमान में लगभग 20,000 कर्मचारी नगरीय निकायों और विभिन्न विभागों में इस व्यवस्था के तहत कार्यरत हैं और इन्हें नियमित करने की मांग को लेकर आंदोलन भी चल रहा है।

शासन द्वारा इनपैनल किये गये निजी प्लेसमेंट एजेंसियों के माध्यम से भर्ती की जाती है। ये एजेंसियां शासकीय विभागों और नगरीय निकायों के साथ अनुबंध करती हैं तथा विभागीय मांग अनुसार आवश्यक पदों पर कर्मचारी उपलब्ध कराती हैं। उल्लेखनीय है कि, भर्ती में सामान्यतः स्थानीय बेरोजगार युवाओं को प्राथमिकता दी जाती है।

प्लेसमेंट सर्विस द्वारा नियोजित कर्मचारियों को संविदा/ठेका आधार पर काम पर रखा जाता है। इनके वेतन और अन्य सुविधाएँ एजेंसी के माध्यम से मिलती हैं, सीधे शासन से नहीं मिलती है इसलिए नियमित सरकारी कर्मचारियों जैसी सेवा शर्तें इन प्लेसमेंट कर्मियों के नियोजन अनुबंध शर्तों पर लागू नहीं होतीं।

वर्तमान में प्लेसमेंट कर्मचारी मुख्यतः नगरीय निकायों, पंचायतों, स्वास्थ्य, शिक्षा और प्रशासनिक विभागों में कार्यरत रहते हैं। इनका काम नियमित कर्मचारियों जैसा ही होता है, लेकिन अधिकार और सुरक्षा सीमित होते हैं। सामान्य भाषा में बोला जाय तो प्लेसमेंट कर्मी एक दैनिक रोजी पाने वाला कर्मचारी मात्र होता है ।

प्लेसमेंट कर्मियों की नौकरी में स्थायित्व नहीं है यह अस्थिरता नियोजन है जो अनुबंध अवधि समाप्त होने पर नौकरी खत्म हो सकती है तथा नौकरी जाने पर सुनवाई की गुंजाइश बिहार कम होती है । सबसे बड़ी समस्या है कम वेतन और सुविधाओं का अभाव होता है गौर तलब रहे कि नियमित कर्मचारियों की तुलना में प्लेसमेंट कर्मियों का वेतन बहुत कम होता है। जिसके कारण व्यथित प्लेसमेंट कर्मियों द्वारा नियमितीकरण की मांग की जा रहीं है ये कर्मचारी लंबे समय से स्थायी नियुक्ति और सेवा सुरक्षा की मांग कर रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि हाल ही में लगभग 20,000 प्लेसमेंट कर्मचारियों ने हड़ताल कर ठेका प्रक्रिया समाप्त करने और नियमितीकरण की मांग उठाई गई है ।

छत्तीसगढ़ शासन के नियमानुसार प्लेसमेंट कर्मचारी नियोजन प्रक्रिया में कई विधिक पहलू है जिसके आधार पर लोगो को शासकीय कार्यालयीन नौकरी मिल रही है पर क्या यह नौकरी नियमित शासकीय कर्मचारियों के लाभ दिलवाती है? इसका विधिक पहलुओं से विचार किया जाना बेहद आवश्यक है ।
अमोल मालूसरे सामाजिक कार्यकर्ता

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