कब तक छ.ग. गृह निर्माण मंडल के अध्यक्ष महोदय गड़बड़ियों को अनदेखा करते रहेंगे ?
क्या सचिव महोदय छ.ग. गृह निर्माण मंडल की विश्वसनीय छवि नहीं बनाना चाहते हैं?
क्या वाकई छ.ग. गृह निर्माण मंडल के प्रशासनिक अधिकारी अनियमित आचरण पर संज्ञान लेंगे ?
पूरब टाइम्स, रायपुर . शासकीय कार्यालय के अधिकारियों के लिये कानून ने कुछ मर्यादाएं तय कीं हैं . उनका परिपालन करना लोक सेवकों के लिये आवश्यक होता है . यदि कोई लोक सेवक जानबूझ कर , शासन का नाम खराब करने, अनुचित फायदा उठाने या किसी अन्य तरीक़े से उन सीमओं को लांघता है तो उन पर शासन कड़ी कार्यवाही कर सकता है . ये कार्यवाही / दंड , छोटे सी वार्निंग से लेकर अनिवार्य सेवानिवृत्ति व आर्थिक अपराध के लिये एफ.आई.आर. तक हो सकते हैं , जोकि उन लोक सेवकों के द्वारा किये गये नियम विरुद्ध कार्य की गहनता पर निर्भर करता है . जानकारी के अनुसार छ.ग. गृह निर्माण मंडल के कुछ बड़े अधिकारियों ने शासन और प्रबंधन से पूर्व अनुमति लिये बिना एक गैर शासकीय सोसायटी का पंजीयन करवाया है जो कि सिविल सेवा आचरण नियम का उल्लंघन है . बताया जाता है कि इस तथाकथित सोसाइटी ने आम जनता से पैसा इकट्ठा किया और उस पैसे का प्रतिफल नहीं दिया अर्थात पैसा डुबा दिया . इस मामले की शिकायत वर्षों से हाउसिंग बोर्ड के उच्चाधिकारियों के पास लंबित है . अब मामले ने फिर से तूल पकड़ लिया है तो देखने वाली बात यह होगी कि छ.ग. गृह निर्माण मंडल के प्रशासनिक अधिकारी इस पर क्या कार्यवाही करते हैं ? पूरब टाइम्स की एक खबर .
नियम कायदे की अवमानना करने वाले लोकसेवकों के आचरण के विरुद्ध की जाने वाली कार्यवाही क्या है ?
सिविल सेवा आचरण नियमों (जैसे CCS आचरण नियम, 1964) का उल्लंघन करने पर लोकसेवकों (Civil Servants) के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाती है। इन नियमों के तहत दंड अधिरोपित करने वाले प्रावधानों को मुख्य रूप से ‘केंद्रीय सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण और अपील) नियम, 1965’ या संबंधित राज्य के नियमों के तहत वर्गीकृत किया गया है। जिसके आधार पर अनियमित लोकसेवक के आरोपों पर कार्यवाही होती हैं।
परिनिंदा और पदोन्नति को रोकने वाले लघुदंड क्या है ? जान लिजिये ?
शासकीय नौकरी करने वाले आरोपी लोकसेवक को समझाइश देने की कार्यवाही की जाती है तो उसे लघु दंड (Minor Penalties) से दंडित किया जाता है । उल्लेखनीय है कि यह दंड कम गंभीर प्रकृति के अपराधों या नियमों के उल्लंघन के लिए दिए जाते हैं । इसके तहत परिनिंदा (Censure) का दंड है । यह आधिकारिक रूप से कर्मचारी के आचरण की आलोचना या भर्त्सना है, जिसे सेवा पुस्तिका (Service Book) में दर्ज किया जाता है। इसी अनुक्रम में पदोन्नति रोकना (Withholding of Promotion) का दंड भी दिया जाता है जिसमें एक निश्चित अवधि के लिए कर्मचारी की अगली पदोन्नति पर रोक लगा दी जाती है तथा शासन की होने वाली आर्थिक हानि की वसूली (Recovery from Pay) कि वसूली की जाती है यदि लोकसेवक की लापरवाही या आदेशों के उल्लंघन के कारण सरकार को कोई वित्तीय नुकसान हुआ है, तो उसकी भरपाई कर्मचारी के वेतन से की जा सकती है। आरोपी लोक सेवक की वेतन वृद्धि रोकना (Withholding of Increments) की कार्यवाही करने पर कर्मचारी के वेतन में होने वाली वार्षिक वृद्धि को एक निश्चित समय के लिए रोक दिया जाता है ।
जब लोकसेवक द्वारा गंभीर अपराध किया जाना साबित होता है तब दीर्घ दंड से दंडित किया जाता हैं।
गंभीर अपराध करने वाले लोकसेवक के विरुद्ध दीर्घ दंड से (Major Penalties) दंडित किया जाते है । जिसमें
गंभीर कदाचार, भ्रष्टाचार या कर्तव्यों की घोर उपेक्षा के मामलों में निम्नलिखित दंड दिए जाने का प्रावधान हैं। ऐसे दंड में वेतनमान में कटौती (Reduction to a lower stage/rank) कि जाति है । दंडित लोकसेवक कर्मचारी को निचले वेतनमान या निचले पद पर पदावनत (Demote) किया जाता है। उसे अनिवार्य सेवानिवृत्ति (Compulsory Retirement) से भी दंडित किया जाता है जिसमें कर्मचारी को उसकी सेवा अवधि पूरी होने से पहले ही सेवानिवृत्त कर दिया जाता है। इसमें पेंशन लाभ मिलते हैं, लेकिन सेवा समाप्त हो जाती है। दंडित लोकसेवक को सेवा से हटाया जाना (Removal from Service) जाता हैं। यह दंड कर्मचारी की नौकरी समाप्त कर देता है, लेकिन वह भविष्य में किसी अन्य सरकारी नौकरी के लिए पात्र बना रहता है।
सेवा से बर्खास्तगी (Dismissal from Service) भी कर दी जाती है । यह सबसे कठोर दंड है। इसमें न केवल नौकरी जाती है, बल्कि व्यक्ति लोकसेवक भविष्य में किसी भी सरकारी रोजगार के लिए अयोग्य (Disqualified) हो जाता है।
दंडित लोकसेवक को अपने बचाव का अधिकार भारतीय संविधान द्वारा दिया गया है ।
दंडात्मक प्रक्रिया और संवैधानिक संरक्षण के आधार पर दंडित लोकसेवक अपना बचाव कर सकता है । भारतीय संविधान के अनुच्छेद 311 के तहत लोकसेवकों को कुछ सुरक्षा उपाय प्रदान किए गए हैं, ताकि कोई भी दंडात्मक मनमानी न हो सके । लोकसेवक को सुनवाई का अधिकार दिया गया है उल्लेखनीय है कि किसी भी लोकसेवक को तब तक बर्खास्त या पदच्युत नहीं किया जा सकता, जब तक कि उसे उसके विरुद्ध लगे आरोपों की सूचना न दी जाए और उसे अपनी सफाई पेश करने का उचित अवसर न मिले।
छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल के वरिष्ठ एवं बड़े पदों पर पदस्थ अधिकारियों के विरुद्ध लगाये गये गंभीर अपराध पर शीर्ष प्रबंधन खामोश क्यों है ?
सामाजिक कार्यकर्ता अमोल मालूसरे ने छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल प्रबंधन के संज्ञान में आरोपित विषयों की लिखित शिकायत करके संज्ञान करवाया है कि मंडल के कुछ बड़े अधिकारियों ने शासन और प्रबंधन से पूर्व अनुमति लिये बिना एक गैर शासकीय सोसायटी का पंजीयन करवाया है जो कि सिविल सेवा आचरण नियम का उल्लंघन है गौर तलब रहे कि अधिकारियों ने जो सोसायटी पंजीकृत करवाई है उसकी संध्यास्पद भूमिका अवैध रूप से आम जनता से ठगी कर पैसा कलेक्शन करने वाली कंपनी से है जिसके विरुद्ध पीड़ित और व्यथित लोग द्वारा अपराध दर्ज करवाया गया है इसलिए इस मामले पर होने वाली कार्यवाही पर सबकी नजर है क्योंकि आने वाले समय में लुकाछिपी का खेल करने सभी आरोपी अधिकारियों की जवाबदेही तय होने वाली है ।
सरकारी कर्मचारियों एवं अधिकारियों द्वारा जब नियम कायदे के विरुद्ध आचरण किया जाता है तो उनके विरुद्ध की जाने वाली कार्यवाही उपरांत दिये जाने वाले दंड को दो श्रेणियों में बांटा गया है जिसमें पहला है लघु दंड और दूसरा है दीर्घ दंड जिसके तहत छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल के दोषी अधिकारियों के विरुद्ध मेरे द्वारा कि गई शिकायत पर छ.ग. गृह निर्माण मंडल के आरोपी अधिकारियों के विरुद्ध कौन सी कार्यवाही होगी यह आने वाला समय बतायेगा।
सामाजिक कार्यकर्ता अमोल मालूसरे


