वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण के साथ कदमताल करते हुए विकसित छत्तीसगढ़ बनाना राज्य सरकार का लक्ष्य है। इसके लिए सरकार दीर्घकालिक रोडमैप के साथ एमएसएमई, स्टार्टअप, मैन्युफैक्चरिंग, रोजगार और निवेश को बढ़ावा देने पर काम कर रही है।
वित्त मंत्री श्री चौधरी रायपुर के साइंस कॉलेज परिसर में लघु उद्योग भारती द्वारा आयोजित 14वें इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने प्रदेश में एमएसएमई, स्टार्टअप, उद्योग, रोजगार और निवेश की संभावनाओं पर अपने विचार साझा किए।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2047 तक विकसित भारत का निर्माण देश का लक्ष्य है। भारत की अर्थव्यवस्था को तेज गति देने के लिए संरचनात्मक सुधारों और दीर्घकालिक नीतियों की आवश्यकता है। विकास के साथ देश की विरासत और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने पर भी जोर दिया जा रहा है।
‘छत्तीसगढ़ अंज़ोर विजन डॉक्यूमेंट’ से 2047 का रोडमैप
वित्त मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में योजना विभाग द्वारा छत्तीसगढ़ के लिए ‘अंज़ोर विजन डॉक्यूमेंट’ तैयार कराया गया है। इसका उद्देश्य वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण में छत्तीसगढ़ की प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित करना है।
उन्होंने कहा कि 2047 के लक्ष्य को चरणबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए 2030 और 2035 जैसे मध्यकालिक लक्ष्यों के साथ अल्पकालिक और वार्षिक लक्ष्य भी निर्धारित किए जा रहे हैं। इससे दीर्घकालिक विजन को धरातल पर उतारने में मदद मिलेगी।
आर्थिक सुधारों और दीर्घकालिक नीतियों पर जोर
श्री चौधरी ने कहा कि देश के विकास के लिए भविष्य को ध्यान में रखकर दीर्घकालिक नीतियां बनाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि भारत ने पहले भी 21वीं सदी और विजन 2020 जैसे लक्ष्य निर्धारित किए थे, लेकिन उनके अनुरूप दीर्घकालिक रोडमैप और आवश्यक नीतिगत सुधारों का अभाव रहा।
उन्होंने वर्ष 1991 के आर्थिक संकट का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दौर की परिस्थितियों से सीख लेते हुए भविष्य की अर्थव्यवस्था के लिए मजबूत आधार तैयार करना आवश्यक है। उनके अनुसार, नवीकरणीय ऊर्जा, बुनियादी ढांचे और अन्य रणनीतिक क्षेत्रों में किए जा रहे निवेश व्यापक विकास दृष्टिकोण का हिस्सा हैं।
एमएसएमई और मैन्युफैक्चरिंग से बढ़ेंगे रोजगार के अवसर
वित्त मंत्री ने कहा कि भारत में सर्विस सेक्टर का तेजी से विस्तार हुआ है, लेकिन मैन्युफैक्चरिंग और विशेष रूप से लेबर इंटेंसिव मैन्युफैक्चरिंग को और विस्तार देने की आवश्यकता है। रोजगार के अधिक अवसर पैदा करने के लिए लघु उद्योगों, एमएसएमई और विनिर्माण क्षेत्र को मजबूत करना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि छोटे उद्योग स्थानीय स्तर पर रोजगार और उद्यमिता के अवसर पैदा करने के साथ सप्लाई चेन को भी मजबूत करते हैं। इसलिए प्रदेश में एमएसएमई, स्टार्टअप, विनिर्माण, निवेश और रोजगार को बढ़ावा देने के लिए अनुकूल औद्योगिक वातावरण तैयार करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
श्री चौधरी ने कहा कि विकसित भारत के निर्माण की यात्रा में उद्योग जगत, उद्यमियों और लघु उद्योगों की महत्वपूर्ण भूमिका है। सरकार नीतिगत सुधारों, निवेश के अनुकूल वातावरण और उद्यमिता को प्रोत्साहन के माध्यम से छत्तीसगढ़ की औद्योगिक क्षमता को नई गति देने के लिए प्रयासरत है।


