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Tuesday, March 3, 2026
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अस्पतालों से रोजाना निकलने वाला घातक कचरा बिलासपुर वासियों के लिए बेहद चिंताजनक विषयों क्यों है ?

पूरब टाइम्स , बिलासपुर . पिछले दिनों बिलासपुर के एक अस्पताल , जी.बी. हॉस्पिटल एंड मैटर्नीटी होम , में फर्ज़ी जन्म प्रमाण पत्र के मामले ने तूल पकड़ा था . इसके बाद अन्य आम लोगों के माध्यम से , अनेक अस्पतालों के नर्सिंग एक्ट के परिपालन में कमी की खबरें आने लगी हैं. बताया जा रहा है कि अपने रसूख से उक्त अस्पताल भी इस तरह के अनेक नियमों का परिपालन नहीं कर रहा है . खैर अब मामला केवल एक अस्पताल से शुरू होकर , जिले के तीन उच्चाधिकारियों के पाले में आ गया है कि वे अस्पतालों की अनियमितताओं व लोक स्वास्थ्य से संबंधित मामलों में सतर्कता दिखाकर कार्यवाही शुरू करते हैं या नहीं ? ये अधिकारी हैं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी बिलासपुर , क्षेत्रीय अधिकारी, छ.ग. पर्यावरण संरक्षण मंडल बिलासपुर , आयुक्त, नगर पालिक निगम बिलासपुर . पूरब टाइम्स इस खबर के माध्यम से उन अधिकारियों को संज्ञान करा है कि वे किसी भी दुर्घटना होने से पहले जन स्वास्थ्य के नियमों की अवहेलना करने वाले अस्पतालों पर कार्यवाही करें . प्रस्तुत है पूरब टाइम्स की यह रिपोर्ट ..

कार्यालय सीएमएचओ बिलासपुर, जिला बिलासपुर (छ.ग.) के पर्यवेक्षी प्राधिकारी एवं कार्यालय क्लिनिकल स्थापना पंजीयन एवं लाइसेंसिंग प्राधिकारी तथा छत्तीसगढ़ राज्य उपचारगृह तथा रोगोपचार संबंधी स्थापनाएं अनुज्ञापन नियम 2013 की धारा 18(1) के तहत नियुक्त अधिकारियों की कर्तव्य निष्ठा एवं जन हित संरक्षण का विषय प्रश्नांकित स्थिति में है । जिसके नियमानुसार अनुपालन के लिये कार्यालय सीएमएचओ जिला बिलासपुर छ.ग. के प्रभारी अधिकारी व नोडल अधिकारी नर्सिंग होम एक्ट पदस्थ किये गये हैं । जो छत्तीसगढ़ राज्य उपचार्यगृह तथा रोगोपचार संबंधी स्थापनाए अनुज्ञापन अधिनियम 2010 के तहत लोकस्वास्थ्य की प्रावधानित सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करवाने के लिए जिम्मेदार प्राधिकारी है । जिन्हें शासन ने जनता को संक्रमण रहित वातावरण दिलवाने की पदेन जिम्मेदारी सौंपी है लेकिन ये अधिकारी जनहित संरक्षण के लिए क्या कर रहें हैं यह आने वाला समय बतायेगा जब इनकी जवाबदेही का विषय कार्यवाही प्रक्रिया मेें आयेगा।

अस्पताल, नर्सिंग होम और क्लीनिकल स्थापनाओं से जनित होने वाले बायो मेडिकल कचरे का विधि निर्देशित विनिष्टीकरण जैव चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 के नियमानुसार होने की सुनिश्चितता पारदर्शिता के आभाव में प्रश्नांकित स्थिति में है | जबकि इस विषयक भारत सरकार ने प्रभावी कानून बनाया है ताकि अस्पतालों, नर्सिंग होम, क्लीनिक और प्रयोगशालाओं से उत्पन्न अपशिष्ट का सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल निपटान हो सके। जिसके तहत हॉस्पिटल एवं मेंटरनिटी होम आदि के संचालक चिकित्सा व्यवसाइयों की प्रमुख जिम्मेदारियाँ हैं ।
1/ पंजीकरण और प्राधिकरण :– नर्सिंग होम / अस्पताल / चिकित्सा व्यवसाय को छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल से प्राधिकृत कराया जान अनिवार्य है।
2/ अपशिष्ट का पृथक्करण (Segregation) :– चिकित्सीय अपशिष्ट को स्रोत पर ही रंग-कोडित डिब्बों / बैग में अलग-अलग करना (जैसे पीला, लाल, नीला, काला)।
3/ संग्रहण और भंडारण :– चिकित्सीय अपशिष्ट को निर्धारित समय सीमा (24–48 घंटे) से अधिक न रखना तथा इसका विधिवत विनिष्टीकरण करना |
4/ परिवहन और निपटान :– केवल अधिकृत Common Bio-Medical Waste Treatment Facility (CBWTF) या इन-हाउस उपचार प्रणाली के माध्यम से निपटान करना।
5/ रिकॉर्ड और रिपोर्टिंग :– अपशिष्ट की मात्रा, प्रकार और निपटान का रिकॉर्ड रखना तथा वार्षिक रिपोर्ट पर्यावरण विभाग को भेजना।
6/ सुरक्षा और प्रशिक्षण :– स्टाफ को अपशिष्ट प्रबंधन के नियमों और सुरक्षा उपायों पर नियमित प्रशिक्षण देना। व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराना।
7/ संक्रमण :- सुई, सिरिंज और अन्य शार्प्स का सुरक्षित निपटान करना।
8/ जागरूकता और अनुपालन नियमों का पालन सुनिश्चित करना और निरीक्षण के समय आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करना।
इन नियमों के तहत चिकित्सक व्यवसायियों की प्राधिकृत जिम्मेदारी यह सुनिश्चित करना है कि चिकित्सा व्यवसाय / नर्सिंग होम में उत्पन्न सभी जैव चिकित्सा अपशिष्ट का निपटान नियमों के अनुसार हो। किसी भी उल्लंघन की स्थिति में चिकित्सक/प्रबंधक को उत्तरदायी व दोषी माना जाता है । इसी आधारभूत शर्तों अनुसार इन्हें चिकित्सा व्यवसाय लाइसेंस दिया जाता है ।

लोकस्वास्थ्य की सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के दृष्टिकोण से चिकित्सा व्यवसायियों का अनिवार्यतः अनुपलानीय प्राधिकृत कर्तव्य है वे चिकित्सीय कचरे का विधिवत विनिष्टीकरण करें | इस कानून का निर्वहण जी.बी. हॉस्पिटल एण्ड मेंटरनिटी होम के संचालक चिकित्सा व्यवसाइयों के द्वारा नहीं किया जाना प्रतीत होता है क्योंकि बिलासपुर के जिम्मेदार प्राधिकारियों के कार्यालयों द्वारा उपरोक्त उल्लेखित विषयों पर की जाने वाली कार्यवाहियां पारदर्शिता के आभाव में वर्तमान में प्रश्नांकित स्थिति में है और तत्सम्बंध में जी.बी. हॉस्पिटल एण्ड मेंटरनिटी होम के संचालकों ने वस्तुस्थिति को पारदर्शिता के दायरे में लाने की प्राधिकृत एवं अनुज्ञप्त कर्तव्यों के तहत सर्व साधारण की जानकारी में लाने की जिम्मेदारियों को पूरा नहीं किया है जो कि, पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत विधि विरुद्ध कार्य व्यवहार है। जिसका संज्ञान लेकर विधि अपेक्षित कार्यवाही करने के संबंध में पहल किये जाने पर ही वस्तुस्थिति स्पष्ट होगी ।

जी.बी. हॉस्पिटल एण्ड मेंटरनिटी होम से जनित होने वाले बायो मेडिकल कचरे का विधि निर्देशित विनिष्टीकरण जैव चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 के नियमानुसार करने की जिम्मेदारियों की सुनिश्चितता बाबत सभी संबंधित अधिकारियों को आवेदन देकर जानकारी मांगा जाना नितांत आवश्यक है । जन सामान्य के स्तर से जानकारी मांगे जाने की पहल किया जाना अपेक्षित है ।
समाजिक कार्यकर्ता अमोल मालूसरे

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