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Wednesday, March 25, 2026
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जिला श्रम आयुक्त कार्यालय की प्रमुख पदेन कर्तव्यों और…. प्रशासकीय भूमिकाएँ अनियमित कार्याचरण के हवाले है क्या ?

पूरब टाइम्स, रायपुर . सामन्यत: यही होता है कि जब किसी श्रमिक को अपने नियोक्ता से कोई तकलीफ होती है , जैसे कार्यस्थल पर एक्सीडेंट होने पर उचित मदद नहीं मिलना , नौकरी से निकाला जाना, अपने अनुसार सही तरीक़े से भुगतान नहीं मिलना इत्यादि तब अपने हित चिंतकों के कहने पर वह, अपने जिले के श्रम विभाग में शिकायत करता है और फिर चक्कर लगाने लगता है कि श्रम विभाग उसके पक्ष में नियोक्ता को मुआवजा देने के लिये बाध्य करे . उस श्रमिक या उसके हित चिंतकों को पूर्व में श्रम कानूनों की जानकारी नहीं होती है जिसका लाभ नियोक्ता को मिल जाता है और श्रम विभाग के द्वरा राहत नहीं मिलने पर वह श्रम विभाग के ऊपर दोषारोपण करने लगता है . इसी तरह से अनेक जिले के जिला श्रम आयुक्त कार्यालय , नियोक्ताओं द्वारा शुरुआत से ही श्रम कानूनों के परिपालन नहीं करने को नजऱ अंदाज़ करता है जिसका खामियाजा श्रमिकों को भुगतना पड़ता है . यदि आम लोग जान जायें कि जिला श्रम आयुक्त कार्यालय के कार्य व जिम्मेदारी क्या हैं , तो वे किसी भी प्रकार की कमी को श्रम विभाग के उच्चाधिकारियों को संज्ञान करवा , बेहतर परिणाम पा सकते हैं . इसी आशय से लिखी पूरब टाइम्स की यह रिपोर्ट …

जिला श्रम आयुक्त कार्यालय उसके कार्य क्षेत्र के प्रत्येक कार्यस्थल पर सुरक्षा और सम्मानजनक वातावरण सुनिश्चित करने के लिए श्रम कानूनों का प्रवर्तन, श्रमिक संबंधित विवाद का निवारण, निरीक्षण और श्रमिक हितकारी योजनाओं का क्रियान्वयन करता है। यह कार्यालय नियोक्ता और श्रमिकों के बीच संतुलन बनाए रखते हुए सुरक्षित, स्वस्थ और सम्मानजनक कार्य परिस्थितियों को लागू करने की जिम्मेदारी निभाता है लेकिन क्या आपके जिले का श्रम आयुक्त कार्यालय श्रमिकों के मामलों में स्वत: संज्ञान लेने की पदेन जिम्मेदारी पूरी करते हैं ? यह सुनिश्चित करना हमारी नागरिक जिम्मेदारी होती है यह भी समझा जाना विधि अपेक्षित है ।
श्रम कानून से परिचय करवाने वाले मुख्य विषयों पर प्रकाश डाला जा रहा है –

  1. श्रम कानूनों का प्रवर्तन के जनहिताय लक्ष्य हासिल करना ।

    जिला श्रम आयुक्त को शासन द्वारा लागू किए गए लगभग 38 श्रम अधिनियमों (28 केंद्रीय और 10 राज्य) का पालन सुनिश्चित करना होता है व न्यूनतम वेतन अधिनियम, बोनस अधिनियम, औद्योगिक विवाद अधिनियम, सामाजिक सुरक्षा कानूनों का अनुपालन कराना पड़ता है तथा कार्यस्थल पर सुरक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरण मानकों का पालन सुनिश्चित करना होता है ।
  2. श्रम विधि अनुपालन सुनिश्चितता हेतु निरीक्षण और निगरानी करना
    जिला श्रम आयुक्त कार्यालय का पदेन कार्य है कि उसे नियमित तौर पर कारखाना / कार्यालय का निरीक्षण कर यह देखना होता हैं कि सुरक्षा उपकरण, स्वास्थ्य सुविधाएँ और कार्य परिस्थितियाँ मानक के अनुरूप श्रमिकों की सुरक्षा और उनके हितों की रक्षा हो रही है व महिला कर्मचारियों के लिए POSH Act, 2013 के तहत आंतरिक शिकायत समिति की स्थापना तथा नियमानुसार कार्यान्वयन होने की सुनिश्चितता कर निगरानी करना होता है ।
  3. विवाद निवारण करने में निर्णायक भूमिका निभाना।
    जिले स्तर का अधिकृत निर्णायक प्राधिकारी के तौर पर जिला श्रम आयुक्त औद्योगिक विवादों को रोकना और सुलझाना का कार्य करता है तथा नियोजित श्रमिकों और नियोक्ताओं के बीच संवाद स्थापित कर सम्मानजनक वातावरण बनाए रखने की पदेन जिम्मेदारी को प्रावधानुसार पूरा करता है ।
  4. श्रमिक हितकारी योजनाएँ का लाभ पात्र हितग्राही को दिलवाना।
    शासन ने श्रमिकों के सर्वांगीण उत्थान के लिए लिए आवश्यक योजनाएं बनाई है इनमें ईएसआई (ESI), पीएफ (PF), बोनस, ग्रेच्युटी जैसी योजनाओं का क्रियान्वयन प्रमुख कार्यों में से एक है । इसी क्रम में असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोडऩा भी एक महत्वपूर्ण कार्य है जिसका श्रम विधि के निर्देशानुसार अनुपालन सुनिश्चित करवाने का कार्य जिला श्रम आयुक्त द्वारा किया जाता है ।
  5. प्रशिक्षण और जागरूकता लाकर श्रम विधि से परिचय करना ।
    शासन ने जिन श्रम विधि को अधिनियमित करवाकर सचिव श्रम विभाग को इन श्रम विधि के अनुपालन की जिम्मेदारी सौंपी है इसके तहत जिला स्तर पर श्रमिकों और नियोक्ताओं के लिए सुरक्षा एवं श्रम विधि कार्यशालाएँ आयोजित करना जिला श्रम आयुक्त की पदेन जिम्मेदारी है तथा कार्यस्थल पर निवारक सुरक्षा संस्कृति (Preventive Safety Culture) को बढ़ावा देना होता है।

सामाजिक कार्यकर्ता और श्रमिक नेताओं को श्रम विधि से परिचित करवाकर श्रमिकों का सर्वांगीण विकास संभव बनाया जा सकता है जिसके लिए जन जागरूकता लाया जाना आवश्यक है अत: हमारा प्रयास है कि श्रम विधि की व्यवहारिक जानकारी सभी तक पहुंचाएं

अमोल मालुसरे सामाजिक कार्यकर्ता

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