किसी भी संस्थान या कार्यस्थल में लैंगिक उत्पीड़न को रोकने की व्यवस्था के क्या प्रावधान होते हैं ?
आंतरिक शिकायत समिति क्यों ज़रूरी होती है ? उसे कैसे अस्तित्व में लाया जाता है ?
महिलाओं को उत्पीड़न से बचाने के लिये , आंतरिक शिकायत समिति बनाने की ज़िम्मेदारी किसकी होती है ?
पूरब टाइम्स, रायपुर . किसी कार्यालय में महिलाओं को यौन उत्पीड़न से बचाने व उनकी शिकायतों को संज्ञान लेकर, उनकी जांच करने के लिये, उस कार्यालय में आंतरिक शिकायत समिति का होना बहुत आवश्यक होता है. पूर्व में इसे आंतरिक सुरक्षा समिति के नाम से अथवा विशाखा समिति के नाम से जाना जाता था लेकिन अब इसे आंतरिक शिकायत समिति के नाम से जाना जाता है. इस प्रकार से यह समिति न केवल महिलाओं की सुरक्षा करने वाली प्रशासनिक व्यवस्था है बल्कि गलत व झूठी शिकायत करने वाली महिलाओं पर लगाम लगाने वाली व्यवस्था भी है . सूत्रों के अनुसार पहले इस कानून को ज़मीनी स्तर पर ठीक ढंग से लागू नहीं किया जा सका था परंतु छत्तीसगढ़ में अब श्रम विभाग द्वारा सख्ती से इस कानून को कार्यस्थलों पर लागू कराने के लिये नोटिसें व स्मरण पत्र दिये जा रहे हैं . पूरब टाइम्स की एक रिपोर्ट …
आंतरिक शिकायत समिति का प्रशासकीय अस्तित्व कैसे बनता है ?
कार्यालय में आंतरिक शिकायत समिति का प्रशासकीय अस्तित्व महिलाओं के कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न अधिनियम, 2013 की धारा 4(1) के तहत बनता है। यदि किसी कार्यालय में 10 या उससे अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं, तो वहां इस समिति का गठन अनिवार्य है और इसे प्रशासकीय आदेश/नोटिफिकेशन द्वारा औपचारिक रूप से अस्तित्व दिया जाता है।
1. ICC का कानूनी आधार क्या है ?
# लैंगिक उत्पीड़न अधिनियम, 2013 (POSH Act) की धारा 4(1) के अनुसार, हर कार्यस्थल पर जहां 10 या अधिक कर्मचारी हों, आंतरिक शिकायत समिति (Internal Complaints Committee – ICC) का गठन अनिवार्य है।
# समिति का गठन न होने पर ₹50,000 तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
2. प्रशासकीय आदेश से गठन होता है ।
# समिति का अस्तित्व प्रशासकीय आदेश/नोटिफिकेशन जारी करने से बनता है।
उदाहरण: नगर पालिक निगम….. ने 29 सितम्बर 2025 को आदेश क्रमांक ……/2025 द्वारा समिति का गठन किया।
# आदेश में समिति के सदस्यों के नाम, पद और कार्यकाल स्पष्ट रूप से दर्ज किए जाते हैं।
3. समिति की संरचना के पद नाम और नियुक्त का आधार क्या होता है ?
# पीठासीन अधिकारी (Presiding Officer): वरिष्ठ महिला कर्मचारी या अधिकारी।
# सदस्य: कम से कम 2 सदस्य, जिनमें से आधे महिलाएं हों।
# बाहरी सदस्य: किसी NGO या महिला अधिकार कार्यकर्ता को शामिल किया जा सकता है ताकि निष्पक्षता बनी रहे।
4. प्रशासकीय अस्तित्व की औपचारिकता पूरी करने के बाद की कार्यवाही क्या होती है ?
# समिति गठन की सूचना कार्यालय सूचना पटल, विभागीय वेबसाइट और महिला कर्मचारियों को लिखित रूप से उपलब्ध कराई जाती है।
# समिति की कार्यवाही और निर्णयों का रिकॉर्ड प्रशासकीय फाइलों में सुरक्षित रखा जाता है।
# समय-समय पर समिति की वैधता बनाए रखने हेतु नवीनीकरण / पुनर्गठन आदेश जारी किए जाते हैं।
प्रशासकीय अस्तित्व के मुख्य तत्व संक्षिप्त में समझ लीजिए

यदि समिति केवल औपचारिक रूप से बनाई जाए और सक्रिय न हो, तो उसका अस्तित्व कागज़ी रह जाता है। उल्लेखनीय है कि, समिति की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए बाहरी सदस्य का चयन नियमानुसार आवश्यक है। कर्मचारियों को समिति की भूमिका और शिकायत प्रक्रिया के बारे में नियमित प्रशिक्षण देना भी प्रावधानुसार बाध्यकारी है। इसलिए समिति गठन और उसकी नियमित बैठकों का आयोजन किया जाना नियमानुसार होता है क्या इसकी जांच जिला प्रशासन द्वारा किया जाना आवश्यक है ।
निशा देशमुख सामाजिक कार्यकर्ता


