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Wednesday, March 25, 2026
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कांग्रेस महापौर और आयुक्त की साठ गांठ…अब उजागर होने लगे है “तर्कसंगत प्रमाण” !

निगम भ्रष्टाचार के मामलों को अनदेखा करने वाला भिलाई महापौर प्रतिक्रिया विहीन है ?

पूरब टाइम्स, भिलाई . इस साल नगर निगम भिलाई के चुनाव हैं . इस कारण से पिछले सालों में निगम की कार्यशैली की समीक्षा व कागज़ों में दफन भ्रष्टाचार अब बाहर आने वाले हैं . छ.ग. प्रदेश के इस भिलाई नगर निगम में पिछले 15 सालों से कांग्रेस का महापौर था परंतु अब परिस्थितियां बदलती हुई नज़र आने लगी हैं. भाजपा के स्थानीय नेता, विधायक रिकेश सेन की अगुवाई में आक्रामक होने लगे हैं परंतु निगम आयुक्त की अपारदर्शी कार्य प्रणाली ने उन्हें पंगु बना दिया है . अनेक समाजसेवी व कुछ राजनेता, नगर निगम भिलाई से सूचना के अधिकार में ऐसे कागज़ात निकालने का प्रयत्न कर रहे हैं जिनसे आगे निगम की कार्यशैली में बेहद सकारात्मक बदलाव आये व पूर्व के भ्रष्टाचार का पर्दाफाश हो पर ऐसा लगता है कि भिलाई निगम आयुक्त उन्हें दिलवाने के लिये पूरी तरह तैयार नहीं हैं . बताया जा रहा है इसका कारण केवल कांग्रेस ही नहीं बल्कि भाजपा के रसूखदारों का दबाव भी है . अगर ऐसा है तो भाजपा के लिये महापौर पद की पकी पकाई थाली में छेद है जोकि आगे के 5 साल फिर से उन्हें भिलाई निगम की सत्ता से दूर रख सकता है . पूरब टाइम्स की एक रिपोर्ट ..

भिलाई निगम का सूचना अधिकारी और अपीलीय अधिकारी निगम की प्रशासकीय कार्यवाहियों और व्यवस्थाओं को पारदर्शिता के दायरे में लाने में विफल है । जिसका असल कारण निगम और महापौर है क्योंकि दोनों ने अपना पदेन कर्तव्य पूरा करने की प्राधिकृत जिम्मेदारी पूरी नहीं की है ,जिसके कारण निगम भ्रष्टाचार फलता फूलता नजर आ रहा है . परिणाम स्वरूप निगम आयुक्त की अनियमितताओं के कारण राज्य शासन से धोखेबाजी हो रहीं है और महापौर की राजनीतिक अक्षमता के कारण कांग्रेस की साख गर्त में जा रहीं है ।

भिलाई निगम बनाने के बाद से अधिकांश समय भिलाई का महापौर कांग्रेस का रहा है जिसके कारण भिलाई निगम की अनियमितताओं के मामले कांग्रेस ही तर्क संगत तौर पर जिम्मेदार है. गौरतलब रहे कि भिलाई निगम की प्रशासकीय स्थिति में कभी भी सुधार नहीं हुआ , वर्तमान महापौर भी इस कार्य व्यवहार को जारी रखे है इसलिए अगर कांग्रेस ने अपने राजनीतिक रवैए में समय रहते कोई बदलाव नहीं किया तो विगत भूपेश बघेल की राज्य सरकार को मिले चुनावी नतीजे भिलाई महापौर को मिलेंगे , यह कहे जाने पर शायद ही दो मत होगे ।

उल्लेखनीय है कि, भिलाई निगम संपत्ति और आर्थिक गतिविधियों को सीधे प्रश्नांकित करने वाले जिन आवेदनों पर प्रतिक्रिया देने में निगम अधिकारी विफल हो गए हैं वे हैं

1. नगर पालिक संपत्ति का भिलाई निगम को अंतरण करने के लिए की गई निगम कार्यवाही का व्यौरा

2. ऐसी सार्वजनिक संस्थाओं की संपत्ति जिसका प्रबंध नगर पालिका भिलाई द्वारा किया जाता हो ऐसी संपति को न्यास में रखे जाने के विधि निर्देशानुसार निगम की संपत्ति व्यौरा

3. नगर पालिक संपत्ति या निगम में वेष्टित होने वाली संपत्ति या उसके प्रबंध के अधीन संपत्ति के निराकरण को शासित करने बाले आदेश का व्यौरा

4. नजूल भूमि का प्रबंध करने की कार्यवाही किये जाने के लिए की गई निगम कार्यवाही का ब्यौरा

5. निगम में वेष्टित संपति उपयोग कार्यवाही किये जाने के लिए नगर पालिक निगम भिलाई के द्वारा की जा रही कार्यवाहियों का ब्यौरा

6. चल-अचल संपत्ति अभिलेख की अभिरक्षा तथा उसका विनिष्टीकरण करने के लिए नगर पालिक निगम भिलाई के द्वारा की जा रही कार्यवाहियों का ब्यौरा

7. निगम प्रशासकीय कार्यवाहियों के अभिलेख की अभिरक्षा तथा उसका विनिष्टीकरण करने के लिए नगर पालिक निगम भिलाई के द्वारा की जा रही कार्यवाहियों की दस्तावेजीकरण प्रक्रिया का ब्यौरा

8. नगर पालिक निगम निधि से उपयोग कार्यवाही करने के लिए नगर पालिक निगम भिलाई के द्वारा की जा रही कार्यवाहियों का ब्यौरा

9. गरीबों की सेवा निधि तैयार करने के विधि निर्देशानुसार नगर पालिक निगम भिलाई के द्वारा की जा रही कार्यवाहियों के दस्तावेजीकरण प्रक्रिया का ब्यौरा

10. जानकारियों का लोक प्रकटीकरण करने की कार्यवाही के विधि निर्देशानुसार नगर पालिक निगम भिलाई के द्वारा की जा रही कार्यवाहियों की दस्तावेजीकरण प्रक्रिया का ब्यौरा

11. नगर पालिक निगम भिलाई के द्वारा, नगर पालिक निगम लेखा नियम 1971 के नियम 172 के तहत निर्देशित प्रारूप 102 में भूमि, भवन, सड़क, नाली एवं अन्य अचल संपत्तियों की संधारित पंजी बनाये जाने का विधि निर्देश है तथा इसके अनुक्रम में नियम 172 के प्रारूप 103 में नगर पालिका द्वारा निर्मित संपत्तियों का दर्ज व्यौरा संधारण का ब्यौरा इन ग्यारह आवेदनों की जानकारी मांगने वाले सामाजिक कार्यकर्ता ने बताया कि भिलाई को बचाने के लिए आवश्यक है कि आवेदनों से मांगी गई जानकारी पारदर्शिता के दायरे में आए अगर नहीं आएगी तो न्यायालय की शरण लेना पड़ेगा ।

आने वाला निगम चुनाव भिलाई महापौर के पदेन निर्णयों से होने वाले अपूरणीय नुकसान का हिसाब किताब स्पष्ट कर देगा लेकिन वर्तमान स्थिति में महापौर अपील समिति को निर्णय करना पड़ेगा कि निगम आयुक्त कितना कर्तव्य निष्ठा से सेवाएं से रहा है ।
अमोल मालुसरे सामाजिक कार्यकर्ता

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