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Sunday, February 8, 2026
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चीन ने पहली बार पुतिन की भारत यात्रा पर दिया बड़ा बयान, दुनिया चौंक गई

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा को लेकर चीन ने पहली बार आधिकारिक और सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। बीजिंग ने साफ कहा है कि भारत, चीन और रूस — तीनों ही ग्लोबल साउथ की मज़बूत आवाज़ हैं और इन देशों के बीच मजबूत संबंध न सिर्फ इनके आपसी हित में हैं, बल्कि एशिया और पूरी दुनिया की शांति व स्थिरता के लिए भी बेहद ज़रूरी हैं।

पुतिन के भारत दौरे के बाद दुनिया भर में कूटनीतिक हलचल तेज़ हो गई थी। कई भारत-विरोधी देशों में इस यात्रा को लेकर बेचैनी देखी गई, लेकिन सबसे ज़्यादा नज़र चीन की प्रतिक्रिया पर टिकी थी। अब चीन के बयान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक नया संकेत दे दिया है।

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने कहा कि भारत, चीन और रूस तीनों उभरती अर्थव्यवस्थाएं हैं। इनके बीच भरोसा और स्थिरता का वैश्विक स्तर पर सकारात्मक असर पड़ता है। उन्होंने कहा कि चीन, भारत और रूस दोनों के साथ मिलकर रिश्तों को आगे बढ़ाने के लिए तैयार है और पुतिन की भारत यात्रा को बीजिंग ने करीब से देखा है।

यह बयान ऐसे समय पर आया है जब पूर्वी लद्दाख विवाद को लेकर भारत-चीन संबंध कुछ समय से संवेदनशील बने हुए हैं। हालांकि चीन ने संकेत दिया है कि वह अब लंबे समय के नजरिए से रिश्तों को सुधारना चाहता है।

भारत दौरे से पहले पुतिन ने भी एक इंटरव्यू में कहा था कि भारत और चीन दोनों ही रूस के करीबी दोस्त हैं और रूस इन संबंधों को काफी अहम मानता है। अमेरिका द्वारा भारत पर रूस से सस्ता तेल खरीदने को लेकर लगाए गए आरोपों को भी पुतिन ने सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि रूस भारत को लगातार ऊर्जा आपूर्ति करता रहेगा।

गौरतलब है कि चीन खुद भी रूस से तेल और गैस का बड़ा खरीदार है और उसने भी अमेरिका की उन मांगों को नज़रअंदाज़ किया है, जिनमें रूस से ऊर्जा खरीद बंद करने को कहा गया था।

पुतिन की भारत यात्रा के बाद अमेरिका की चिंता भी खुलकर सामने आ गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यात्रा के महज़ 48 घंटे के भीतर ही अमेरिका ने अपने अंडर सेक्रेटरी ऑफ स्टेट फॉर पॉलिटिकल अफेयर्स एलिसन हुकर को भारत भेजा है। इसे अमेरिका की डैमेज कंट्रोल रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।

कुल मिलाकर, चीन का यह बयान वैश्विक कूटनीति में एक अहम मोड़ माना जा रहा है, जिसने भारत-रूस संबंधों को नई मजबूती देने के साथ-साथ त्रिपक्षीय समीकरणों पर भी नई बहस छेड़ दी है।

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