कांग्रेस पार्टी ने विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) कार्यक्रम को लेकर देशभर में अपना आंदोलन और तेज कर दिया है। मंगलवार, 18 नवंबर को पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की अध्यक्षता में 12 राज्यों के वरिष्ठ नेताओं की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई, जिसमें राहुल गांधी और अन्य शीर्ष नेता मौजूद रहे।
🚨 मुख्य फैसला: दिल्ली में होगी ‘महा-रैली’
बैठक में यह अहम फैसला लिया गया कि दिसंबर के पहले सप्ताह में दिल्ली के रामलीला मैदान में SIR के खिलाफ एक विशाल रैली आयोजित की जाएगी।
- खड़गे का कड़ा रुख: उन्होंने साफ कहा कि कांग्रेस किसी भी कीमत पर असली मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से कटने नहीं देगी।
- चुनाव आयोग पर सवाल: खड़गे ने चुनाव आयोग के रवैये को ‘निराशाजनक’ बताते हुए कहा कि आयोग को स्पष्ट करना चाहिए कि वह भाजपा के दबाव में काम नहीं कर रहा, क्योंकि कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा SIR को ‘वोट चोरी का हथियार’ बना रही है।
- मिलीभगत का आरोप: उन्होंने चेतावनी दी कि अगर आयोग इस मुद्दे पर चुप रहता है, तो इसे उसकी ‘मिलीभगत’ माना जाएगा।
कांग्रेस ने यह भी कहा कि वह फर्जी मतदाताओं को जोड़ने और वास्तविक मतदाताओं को हटाने की हर कोशिश का पर्दाफाश करेगी।
🗺️ राज्यों में विरोध की लहर
SIR के विरोध की चिंगारी अब कई राज्यों में फैल चुकी है:
- पश्चिम बंगाल: यहां से प्रवासी मजदूरों की तस्वीरों के गलत इस्तेमाल की शिकायतें सामने आई हैं।
- केरल और तमिलनाडु: इन राज्यों में भी इस प्रक्रिया के खिलाफ तेज विरोध देखा जा रहा है।
- तमिलनाडु में बहिष्कार: राजस्व कर्मचारी संघों ने स्टाफ की कमी, भारी काम का बोझ, अपर्याप्त ट्रेनिंग और कम मेहनताना का हवाला देते हुए SIR से संबंधित कामकाज का बहिष्कार शुरू कर दिया है।
- केरल सरकार और IUML की याचिका: केरल सरकार और IUML दोनों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर स्थानीय निकाय चुनाव पूरे होने तक SIR को स्थगित करने की मांग की है। उनका तर्क है कि 9 और 11 दिसंबर को होने वाले चुनावों के बीच 4 दिसंबर को SIR का ड्राफ्ट जारी करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है।
🤖 चुनाव आयोग की तैयारी
देशभर में बढ़ते राजनीतिक तापमान के बीच, चुनाव आयोग ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है और भविष्य की तैयारी का संकेत दिया है:
- फॉर्म वितरण: आयोग का कहना है कि 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में अब तक लगभग 50.11 करोड़ फॉर्म बांटे जा चुके हैं, जिनमें से 98% से अधिक मतदाताओं तक ये फॉर्म पहुंच चुके हैं।
- AI तकनीक: पश्चिम बंगाल की शिकायतों के मद्देनजर, आयोग अब AI-बेस्ड फेशियल रिकग्निशन सिस्टम लागू करने की तैयारी में है।
- उद्देश्य: इस तकनीक से मृत और फर्जी मतदाताओं की पहचान आसान हो जाएगी।
- BLO की जिम्मेदारी: हालांकि, बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLO) को घर-घर जाकर फोटो और हस्ताक्षर की पुष्टि करनी होगी और किसी भी गड़बड़ी की पूरी जिम्मेदारी उन्हीं की होगी।
निष्कर्ष: SIR को लेकर देश भर में राजनीतिक तापमान चरम पर है। कांग्रेस इसे एक राष्ट्रीय मुद्दे के रूप में उठाकर बड़े स्तर पर सरकार और चुनाव आयोग पर दबाव बनाने की रणनीति पर काम कर रही है।


