मंजिष्ठा: आयुर्वेद की सर्वश्रेष्ठ रक्तशोधक जड़ी-बूटी
मंजिष्ठा (Manjistha/Rubia Cordifolia) एक अत्यंत महत्वपूर्ण आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी है, जिसे इसके लाल रंग की जड़ों के कारण पहचाना जाता है। यह मुख्य रूप से रक्त को साफ करने (Blood Purifier) और त्वचा संबंधी समस्याओं को दूर करने के लिए इस्तेमाल की जाती है।
मंजिष्ठा के 4 प्रमुख लाभ
- उत्कृष्ट रक्तशोधक: मंजिष्ठा को आयुर्वेद में सबसे बेहतरीन रक्त शोधक (Blood Purifier) माना जाता है। यह रक्त में मौजूद विषैले पदार्थों (Toxins) को हटाकर खून को साफ करती है, जो कई बीमारियों की जड़ होते हैं।
- त्वचा के लिए वरदान: रक्त साफ होने के कारण यह सीधे त्वचा के स्वास्थ्य पर असर डालती है। यह मुंहासे, दाग-धब्बे, एक्जिमा, खुजली और अन्य त्वचा रोगों को दूर करने में बहुत प्रभावी है।
- पित्त संतुलन: इसकी तासीर गर्म होती है, लेकिन यह शरीर में बिगड़े हुए पित्त दोष को संतुलित करने में सहायता करती है, जिससे एसिडिटी और शरीर की गर्मी कम होती है।
- पाचन और लिवर डिटॉक्स: यह लिवर के कार्यों में सुधार करती है और पाचन को मजबूत करती है, जिससे मेटाबॉलिज्म (चयापचय) बेहतर होता है।
मंजिष्ठा का उपयोग कैसे करें?
- चूर्ण (पाउडर): मंजिष्ठा की जड़ के चूर्ण को शहद या गुनगुने पानी के साथ 1-3 ग्राम (आधा चम्मच) की मात्रा में दिन में दो बार लिया जा सकता है।
- लेप/फेस पैक: त्वचा के दाग-धब्बों को हटाने के लिए इसके पाउडर में शहद मिलाकर लेप या फेस पैक के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।
- काढ़ा (Mahamanjisthadi Kadha): इसे अक्सर महामंजिष्ठादि काढ़ा के रूप में भी प्रयोग किया जाता है, जो त्वचा और जोड़ों के विकारों में विशेष रूप से लाभकारी है।
अपील: किसी भी आयुर्वेदिक औषधि का सेवन करने से पहले, सही मात्रा और अवधि जानने के लिए हमेशा एक योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक से सलाह लें।


