महाकालेश्वर मंदिर के तीसरे तल पर स्थित प्राचीन नागचंद्रेश्वर मंदिर आज नागपंचमी के पावन अवसर पर श्रद्धालुओं के लिए खोला गया है। यह मंदिर पूरे साल में केवल एक बार, नागपंचमी के दिन, 24 घंटे के लिए दर्शनार्थियों के लिए खोला जाता है। आज रात 12 बजे तक ही भक्त भगवान के दर्शन कर सकेंगे, इसके बाद मंदिर के पट अगली नागपंचमी तक बंद हो जाएंगे।
इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता इसकी दुर्लभ प्रतिमा है, जिसमें भगवान शिव, माता पार्वती और बाल गणेश एक साथ नागों की छत्रछाया में विराजमान हैं। यह प्रतिमा 11वीं शताब्दी की मानी जाती है और इसे नेपाल से लाया गया था। बताया जाता है कि इस प्रकार की प्रतिमा न कहीं और है, न ही कभी देखी गई है।
इस अद्भुत मंदिर का निर्माण परमार वंश के राजा भोज ने करवाया था। बाद में साल 1732 में सिंधिया शासक महाराज राणोजी सिंधिया ने महाकालेश्वर मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया, जिसमें नागचंद्रेश्वर मंदिर भी शामिल था।
हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी मंदिर में दर्शन के लिए देशभर से लाखों श्रद्धालु उज्जैन पहुंचे हैं। सुरक्षा और व्यवस्था को देखते हुए प्रशासन ने विशेष इंतजाम किए हैं। श्रद्धालु सुबह से ही लंबी कतारों में खड़े होकर इस दुर्लभ दर्शन का लाभ ले रहे हैं।
धार्मिक आस्था और प्राचीन परंपरा का अद्वितीय संगम नागचंद्रेश्वर मंदिर, वर्ष में एक बार अपने पट खोलता है और भगवान शिव के नागस्वरूप के दुर्लभ दर्शन कराता है।


