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Saturday, March 7, 2026
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छत्तीसगढ़ में ईडी का बड़ा एक्शन: रायपुर और मैनपुर में छापेमारी, शराब और डीएमएफ घोटाले की जांच जारी

रायपुर। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बुधवार को शराब और डीएमएफ (डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन) घोटाले की जांच के तहत रायपुर और गरियाबंद जिले के मैनपुर में तीन ठिकानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई रायपुर के मौदहापारा स्थित रफीक मेमन और मैनपुर के गुलाम मेमन के घर और दफ्तरों में की गई।

छापेमारी में मिले दस्तावेज और संपत्ति के प्रमाण

ईडी की तलाशी के दौरान बड़ी मात्रा में लेनदेन के दस्तावेज, प्रॉपर्टी की खरीद-बिक्री से जुड़े कागजात, बैंक लेनदेन, निवेश संबंधी दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जब्त किए गए। इन सभी दस्तावेजों की जांच की जा रही है।

ग्रामीणों की शिकायत पर हुई कार्रवाई

गरियाबंद के मैनपुर में स्थानीय ग्रामीणों द्वारा गुलाम मेमन के खिलाफ शिकायत की गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि उनके पास आय का कोई स्पष्ट साधन नहीं है, फिर भी उन्होंने करोड़ों की संपत्ति खरीदी है। शिकायत में गुलाम द्वारा ब्लैकमनी से राइस मिल खोलने और जमीन खरीदने का भी आरोप लगाया गया था। यह शिकायत सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद ईडी ने मामले की जांच शुरू की।

गुलाम मेमन और रफीक मेमन पर आरोप

गुलाम मेमन पर आरोप है कि उन्होंने चचेरे भाई सरफराज के नाम पर मैनपुर से तीन किलोमीटर दूर करोड़ों की जमीन खरीदी। ईडी को जानकारी मिली है कि रफीक और गुलाम मेमन ने डेढ़ साल पहले राइस मिल खरीदी थी। ईडी को शक है कि इन संपत्तियों में किए गए निवेश बेनामी हैं और इनके लिए फंड रायपुर से पहुंचा था।

छापेमारी के दौरान की गई गोपनीय कार्रवाई

ईडी की टीम ने गोपनीयता बनाए रखने के लिए बाइक से मौदहापारा में छापा मारा। जब ईडी की टीम ने रफीक मेमन के घर पहुंचकर तलाशी शुरू की, तो परिवार सो रहा था। टीम ने परिवार को जगाकर पूछताछ की और घर की तलाशी ली।

अनवर ढेबर से जुड़ा मामला

गुलाम मेमन का संबंध शराब घोटाले में जेल भेजे गए अनवर ढेबर से बताया जा रहा है। गुलाम मेमन अनवर ढेबर के चचेरे भाई हैं। ईडी ने दो साल पहले अनवर ढेबर के घर पर भी छापा मारा था।

प्रारंभिक जांच में क्या पता चला?

ईडी को शुरुआती जांच में जानकारी मिली है कि रफीक और गुलाम मेमन ने बोगस बिलों के माध्यम से इन्वेस्टमेंट दिखाया है। उनकी संपत्तियों और निवेश की गहराई से जांच की जा रही है। ईडी को इन संपत्तियों के पीछे ब्लैकमनी के इस्तेमाल का शक है।

निष्कर्ष

ईडी की यह कार्रवाई छत्तीसगढ़ में बड़े घोटालों से जुड़े मामलों की जांच को और गहराई तक ले जा रही है। इन छापों से मिले दस्तावेजों और प्रमाणों के आधार पर आने वाले दिनों में और खुलासे होने की संभावना है।

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