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Saturday, March 7, 2026
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छत्तीसगढ़ पर्यावरण मंडल का सदस्य सचिव…छत्तीसगढ़ के लोक स्वास्थ्य को संक्रामक बीमारियों का निवाला बनाना चाहता है क्या ?

पूरब टाइम्स, रायपुर. पिछले कई माह से छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल की कार्य दक्षता बद से बदतर होते जा रही है. आलम यह है कि पर्यावरण संरक्षण में मदद करने वालों को, अनेक बार लिखित आग्रह के बाद भी, सदस्य सचिव द्वारा मिलने का समय नहीं दिया जाता है. विदित हो कि ये वही अधिकारी हैं जोकि कार्यालय में मिलने के समय की तख्ती लगाकर, उस समय अनुपलब्ध रहते हैं और मातहत स्टॉफ भी इस पर जानकारी रहित रहते हैं. जानकारी के अनुसार विधिक नोटिस को भी विधि अधिकारी के पास समयावधि में नहीं पहुंचाया जाता है. विभाग के द्वारा पूर्व में नोटिस तथा दण्डित किये गए अनेक प्रकरणों में आगे कोई कार्यवाही नहीं हो रही है. अनेक क्षेत्रीय अधिकारियों के द्वारा दी गई गलत रिपोर्ट व उनकी असंवेदनशील कार्यशैली को भी नज़र अंदाज़ कर दिया जाता है. पूर्व में भी पूरब टाइम्स ने इसी प्रकार के अनेक मुद्दों को शासन प्रशासन के सामने लाया था और उन पर कार्यवाही हुई थी. विभाग के मंत्री समेत उच्चाधिकारियों के संज्ञान में लाने पूरब टाइम्स की यह रिपोर्ट..

महामारी करोना के भयंकर प्रकोप के बाद पूरी दुनिया के साथ-साथ भारत भी पर्यावरण संरक्षण नियमों का अनुपालन सुनिश्चित करवाने वाले कानून के प्रावधानों की सुनिश्चितता के प्रति सजग एवं सक्रिय होकर जवाबदेही के दृष्टिकोण से कार्य कर रहा है लेकिन छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल का सदस्य सचिव अपनी पदेन जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक नहीं है और नगरीय ठोस अपशिष्ठ का निपटान करने वाले ठेकदार फार्म अनियमितताओं के प्रति अनदेखी करने वाली शंकास्पद कार्यवाही कर छत्तीसगढ़ शासन से साथ-साथ केंद्र सरकार की छवि को धूमिल करने का कार्य व्यवहार करता नज़र आ रहा है लेकिन लोकस्वास्थ्य को सुरक्षित करने के लिए जन सामान्य स्तर से पहल कर विधिक नोटिस से चुनौती देकर सामाजिक कार्यकर्ता अमोल मालुसरे द्वारा लोक स्वास्थ्य संरक्षण की विधिक कार्यवाही प्रारंभ कर दी गई है इसलिए अब सदस्य सचिव अरुण प्रसाद कब प्रतिक्रिया देंगे इसका सभी को इंतजार है ।

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