Total Users- 1,159,912

spot_img

Total Users- 1,159,912

Tuesday, February 17, 2026
spot_img

आयुर्वेद का खजाना है धातकी के फूल, फल, जड़ और छाल

धातकी को ‘धवई’ और ‘बहुपुष्पिका’ भी कहते हैं। यह पौधा भारत के लगभग हर राज्य में पाया जाता है। हालांकि, यह बहुत अधिक पानी वाले क्षेत्रों, जैसे पश्चिम बंगाल और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में कम ही मिलता है। धातकी के फूलों, फल, जड़ और छाल का उपयोग आयुर्वेदिक चिकित्सा में विभिन्न रोगों के उपचार के लिए किया जाता है। धातकी का वैज्ञानिक नाम ‘वुडफोर्डिया फ्रुटिकोसा’ है। यह 3-6 मीटर की ऊंचाई वाला एक झाड़ीदार पौधा है। इसकी शाखाओं और पत्तियों पर विशेष प्रकार के काले-काले बिंदुओं का जमघट होता है। इसके फूल चमकीले लाल रंग के होते हैं। फल पतले, अंडकार होते हैं। फल भूरे रंग के छोटे, चिकने बीजों से भरे होते हैं।

अमेरिकन नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन ने इसके बारे में जानकारी दी है। वहां के वैज्ञानिकों ने इसकी पत्तियों पर अध्ययन किया है, जिसमें पाया गया है कि इनमें ऐसे रासायनिक तत्व मौजूद हैं, जो ल्यूकोरिया, अनियमित मासिक धर्म, पेशाब में जलन और मूत्र में खून आने जैसी बीमारियों में फायदेमंद साबित हो सकते हैं। रिसर्च में बताया गया है कि इसकी पत्तियों का उपयोग बुखार, खांसी में खून, गठिया, अल्सर और पशुओं में दूध बढ़ाने के लिए भी किया जाता है।

चरक संहिता के अनुसार, धातकी को मूत्र विरंजनीय (मूत्रवर्धक) माना गया है। इसके अतिरिक्त, इसे आसव और अरिष्ट (आयुर्वेदिक औषधियां) बनाने में एक महत्वपूर्ण घटक के रूप में भी प्रयोग किया जाता है, क्योंकि यह किण्वन प्रक्रिया में मदद करता है। इसी के साथ ही इसका सबसे अधिक उपयोग दस्त और पेचिश जैसी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में भी किया जाता है। इसके फूलों का चूर्ण शहद या छाछ के साथ लेने से तुरंत आराम मिलता है। यह बार-बार शौच जाने की आदत को भी नियंत्रित करता है। सुश्रुत संहिता में इसे घाव और रक्तस्राव को रोकने के लिए उपयोगी बताया गया है। किसी भी घाव या चोट को ठीक करने और सूजन को कम करने के लिए इसके फूलों का चूर्ण लगाने से घाव जल्दी भर जाता है। इसके लेप से चोट और घाव में राहत मिलती है।

More Topics

हरियाणा में 12 लोगों की मौत, क्या दूषित पानी बन रहा है काल?

हरियाणा के पलवल जिले के चायंसा में 15 दिनों...

केंदा व्यपवर्तन और सल्का नवागांव उद्वहन सिंचाई योजना के लिए 7.15 करोड़ रुपये स्वीकृत

रायपुर। छत्तीसगढ़-शासन, जल संसाधन विभाग द्वारा बिलासपुर जिले के...

राज्यपाल के गोद ग्राम टेमरी के ग्रामीणों ने किया लोकभवन का भ्रमण

राज्यपाल रमेन डेका की पहल पर लोकभवन की गतिविधियों...

लोकसंगीत और बॉलीवुड सुरों से सजा मैनपाट महोत्सव का दूसरा दिन

-अलका चंद्राकर और वैशाली रायकवार की प्रस्तुतियों ने देर...

इसे भी पढ़े