आजकल हर कोई बिना पसीना बहाए एवरेस्ट फतह करना चाहता है, पर हकीकत यह है कि बिना जोखिम के कामयाबी सिर्फ सपनों में मिलती है। हनुमान जी आज घर-घर में पूजे जाते हैं, तो सिर्फ इसलिए नहीं कि उनके पास गदा थी, बल्कि इसलिए क्योंकि उनके पास अतुलनीय साहस था। जब राम जी को पता चला कि सीता माता लंका में हैं, तो हनुमान जी ने यह नहीं पूछा कि “समुद्र कितना गहरा है?” या “वहां इंश्योरेंस मिलेगा क्या?” वो बस निडर होकर सात समंदर पार कर गए और लंका जलाकर ‘असंभव’ को ‘संभव’ कर दिया। कहने का तात्पर्य यह है कि –
- लीडरशिप: लोग उसी के पीछे चलते हैं जिसमें साहस होता है।
- नवाचार: साहसी व्यक्ति ही लीक से हटकर कुछ नया कर पाता है।
- परिणाम: साहस अंततः छप्पर फाड़कर परिणाम देता है। “डर के आगे जीत है” – यह सिर्फ विज्ञापन नहीं, हनुमान जी के जीवन का संदेश है क्योंकि किस्मत भी उन्हीं का दरवाजा खटखटाती है, जिनके हाथों में ‘साहस’ की चाबी होती है। शुभकामनाएं ..
इंजी. मधुर चितलांग्या
व्यंगकार व संपादक
दैनिक पूरब टाइम्स


