छत्तीसगढ़ के सरकारी गलियारों में इन दिनों ‘कामचोरों’ की चांदी होने वाली है. सूत्रों के अनुसार सरकार ‘टाइम-पास’ करने वाले और ‘गपोड़ियों’ के लिए एक नया विभाग खोलने जा रही है. हाल में हुए एक ‘कार्यकुशलता सर्वे’ ने शासन की आंखें खोल दी हैं. पता चला है कि दफ्तरों में कई कर्मचारी काम कम और गपशप ज्यादा लड़ाते हैं. ये ‘महारथी’ दफ्तर में उस दीमक की तरह हैं जो खुद तो फाइल नहीं छूते, पर दूसरों की कार्यक्षमता को भी ‘चट’ कर देते हैं. सर्वे का निचोड़ यह है कि अगर इन गपोड़ियों को हटा दिया जाए, तो प्रशासन की गाड़ी बुलेट ट्रेन की स्पीड से दौड़ने लगेगी. इन कर्मचारियों का असली हुनर ‘गप्पें हांकना’ और बॉस की ‘जी हुजूरी’ करना है. ये सहकर्मियों को रील्स और गेम्स के ऐसे मकड़जाल में फंसाते हैं कि काम का ‘बंटाधार’ होना तय है. पहले एक सख्त आईएएस ने इन लोगों पर कार्रवाई की योजना बनाई, पर सरकार ने सोचा कि इन ‘मुंहफटों’ से बैर मोल लेना ‘आ बैल मुझे मार’ जैसा होगा. तभी एक चतुर आईएएस ने ‘सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे’ वाला मंत्र दिया. उन्होंने सुझाव दिया कि इन गपोड़ियों का उपयोग सरकार के पक्ष में हवा बनाने के लिए किया जाए. नए विभाग में ट्रांसफर से पहले इनसे बॉन्ड भरवाया जाएगा कि ये दिन-रात सरकार की तारीफ में ऐसी ‘लंबी-चौड़ी’ हांकेंगे और रील्स बनाएंगे कि आम जनता उसी में उलझी रहे. इन रिकामों के साथ जनता जब गप्पों में बिजी रहेगी, तो अनावश्यक रूप से आउटपुट का आकलन कर, विरोध प्रदर्शन नहीं करेगी . इसे कहते हैं ‘आम के आम और गुठलियों के दाम’. फिलहाल दफ्तरों में अजीब नजारा है; मेहनती लोग उस विभाग में ट्रांसफर न हो के डर से ‘दिन-रात एक’ कर रहे हैं, वहीं गपोड़ियों ने उस विभाग में ट्रांसफर करवाने अपनी ‘चमचागिरी’ की धार और तेज कर दी है.
इंजी. मधुर चितलांग्या
व्यंगकार व संपादक
दैनिक पूरब टाइम्स


