एक और बाबा का भांडाफोड़ होने की बातचीत के बीच में, मुझसे आसाराम बापू का एक अनन्य भक्त साथी बोला, यह तो होना ही था . मैंने पूछा , यह मतलब क्या ? वो बोला, देश की हालत खराब होनी ही थी , मोदी सरकार का भट्टा बैठना ही था . मैने कहा , लेकिन बापू तो मनमोहन सिंग के कार्यकाल मे अंदर हुए थे. वह बोला, इसीलिये तो मनमोहन सरकार का सूपडा साफ हो गया. अब मोदीजी के कार्यकाल मे भी जेल से नहीं छोड़े गये, (केवल बीमारी पर अस्थाई ज़मानत मिलती है ) इसलिये वे भी पनप नहीं पा रहे हैं . मैंने पूछा, जब बापू खुश होते होंगे तब हरियाली और खुशियाली छा जाती होगी और जब वे खिन्न होते होंगे तो मौसम बेइमान हो जाता होगा. अगर बाबा के उदास होने से भूकंप आता, तो मौसम विभाग के पास ‘सिस्मोग्राफ’ नहीं, ‘बाबा-ग्राफ’ होना चाहिए था. वे बोले, क्यों मज़ाक़ करते हो ? मैंने कहा, मज़ाक़ आपने ही शुरु किया है. इतने मे दूसरा साथी बोला, मीडिया बाबाओं को पाखंडी कहता है, पर शाम होते ही उन्हीं के विज्ञापन दिखाकर अपनी ‘टीआरपी’ की आरती उतारता है. उधर विदेशी लोग अपनी सफलता मे भारतीय बाबाओं का नाम ले रहे हैं . वह बिल गेट्ज़ हो , मार्क जकरबर्ग हो या स्टीव जॉब्स हों. वे आगे बोले, आप लोगों ने निर्मल बाबा का कितना मज़ाक उड़ाया परन्तु मुझे उनके फार्मूलों से बेहद अधिक लाभ हुआ. मैंने कहा, ऐसा नहीं होता है. दरअसल कई बार हमारी किसी के प्रति अगाध श्रद्धा , हमारे मन में आत्म विश्वास जगा देती है , जिसके कारण हमारी सफलता का प्रतिशत बढ़ जाता है. वह बोले , ऐसा नहीं है. हम श्रद्धा भी अतिरिक्त चमत्कार की आस में ही करते हैं इसीलिये हम चमत्कारी या परिणाम देने वाले बाबा की भक्ति करते हैं. मेरे नकारत्मक रवैये को नज़र अंदाज़ करते हुए बोले , आपने अपने इस ऑफिस में साईं बाबा रखे हैं . क्या आप इनसे कभी कोई चमत्कार की आस नहीं रखते हो ? मुझे लाजवाब होकर उन बाबा भक्तों के सामने अपने तर्क बंद करने पड़े . सच में, भक्तों का मानना होता है कि बाबा केवल इंसान नहीं, बल्कि एक ‘स्पिरिचुअल वाई-फाई’ हैं. अगर सिग्नल (कृपा) नहीं मिल रहा, तो गलती राउटर (बाबा) की नहीं, आपके कनेक्शन (श्रद्धा) की है.
मधुर चितलांग्या,
व्यंगकार व संपादक
पूरब टाइम्स


