पत्रकार माधो अपने साथ एक 35 वर्ष के संभ्रांत व्यक्ति को लेकर आये . वे पास के एक गांव में डॉक्टर थे. उनका एक अस्पताल भी है. वे बोले कि कल मुझे पता चला कि एक महिला ने मेरे विरुद्ध दुराचरण की झूठी शिकायत कर दी है. जब मैंने कोई अपराध नहीं किया था तो मैं क्यों डरूं , यह सोचकर , मैंने थाने में फोन लगाया. उधर एक हवलदार था, मैंने उसे अपने निर्दोष होने की बात कही. तो वह बोला, अबे , कहां छुपा है ? एक बार हम तुम्हारी खातिरदारी करेंगे तो पूरा सच बाहर आ जाएगा. घबराकर, मैंने फोन बंद कर, उस थाने के टीआई को फोन लगाया जो मेरा पहले पेशेंट भी था. वह बोला, डॉक्टर साहब निर्दोष होने की बात तो आप भूल जाइए, मेरा कहना है कि शाम तक आप यहां से निकल लीजिये नहीं तो हमें आपको मजबूरी में जबरन गिरफ्तार करना होगा. मैंने फिर अपने परिचित लोकल नेता को फोन किया , तो वे बोले , तुम आज पुलिस को सरेंडर कर दो , कल ज़मानत करवा लेना . फिर आराम से घूमना. एक रात के लिए अंदर हुए तो क्या फ़र्क़ पड़ता है ? मैंने कहा, आप कुछ कीजिये ना . वे खिसियानी हंसी हंसते हुए बोले, आज तो हम सलाह दे रहे हैं पर कल हो सकता है मजबूरी में भीड़ के साथ हमें भी तुम्हारी गिरफ्तारी की मांग लेकर थाने का घेराव करना पड़े . डॉक्टर साहब आगे बोले, मैं फिर अपने करीबी रिश्तेदार , एक पुलिस उच्चाधिकारी से बात किया . वे बोले , “तुम अंडरग्राउंड हो जाओ और किसी प्रकार से अपनी अग्रिम ज़मानत ले आओ. तभी बच पाओगे . फिर पुलिस विवेचना के वक़्त ‘सच्चाई’ हम देख लेंगे” . मैंने उनसे पूछा कि आपको तो सभी सक्षम लोगों ने सलाह दी है फिर आप मेरे पास क्यों ? डॉक्टर बोले, आप पर हमारा भरोसा है . आप प्रेस वाले हो इसलिए चाहते हैं कि सामने वाले से आप लेन-देन की बात कर मामला सलटा दीजिये . मैंने कहा कि आप तो निर्दोष हो फिर भी ? अब पत्रकार माधो दार्शनिक की तरह बोले, सदियों से पुरुषों ने महिलाओं का शोषण किया था , तो अब महिला की झूठी बात भी पत्थर की लकीर मानी जाएगी. जैसे किसी बैंक का पुराना कर्ज, पोता चुकाता है, वैसे ही अब, इतिहास के ‘जेंडर अकाउंट’ का बैलेंस बराबर किया जा रहा है।
इंजी. मधुर चितलांग्या ‘ माधो ‘
व्यंगकार व संपादक
दैनिक पूरब टाइम्स


