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अव्यवहारिक जीएसटी से छोटे/मध्यम व्यापारी तबाह, अफसरशाही बेलगाम

सारी राहत, रियायत और सब्सिडी केवल चंद पूंजीपति मित्रों को, मोदी राज में छोटे और मध्यम व्यापारी पीड़ित और प्रताड़ित

रायपुर। जीएसटी संबंधित अनियमितताओं, जटिल और अव्यवहारिक प्रावधानों पर सवाल उठाते हुए प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि भारतीय जनता पार्टी की मोदी सरकार ने व्यवहारिक जीएसटी लादकर छोटे और मध्यम व्यापारियों को तबाह करने का षड्यंत्र रचा है। अपनी नाकामियों पर पर्देदारी करने के लिये कुर्तक कर रहे है, भाजपाई बताये कि जीएसटी कमिश्नर आईएएस नहीं होगा तो क्या किसी संघी को बैठायेंगे? सरलीकरण और सुविधाजनक बनाने का झांसा देकर व्यापारियों को ठगा गया। 1 जुलाई 2017 से लागू होने के बाद से अब तक लगभग 3000 से ज्यादा संशोधन किए जा चुके हैं उसके बावजूद आज भी व्यवहारिक और प्रक्रियागत दिक्कतें व्यापारियों को हो रही है। गैर इरादतन, मामूली त्रुटि और मानवीय भूल पर भारी भरकम पेनाल्टी लगाए जा रहे हैं। 

 

प्रदेश कांग्रेस के सुरेन्द्र वर्मा ने कहा कि इनपुट टैक्स क्रेडिट के प्रावधान और व्यावहारिक है आरसीएम का प्रावधान भी तर्कहीन है। व्यवसाय रिवर्स चार्ज के लिए खुद ही खुद को बिल जनरेट करें, फिर उसका इनपुट क्लेम करें, उसे पटाए और खुद ही क्रेडिट ले जबकि उसके विक्रय पर तो उस माल पर टैक्स की देयता उसी पर आनी है, तो फिर आरसीएम क्यों? विवरणी में विलंब पर भारी भरकम पेनाल्टी प्रतिदिन के हिसाब से लगाना भी अव्यावहारिक है, क्योंकि सर्वर डाउन होने, नेट या बिजली की खामियों के चलते भी विवरणी में विलंब स्वाभाविक है। रोज-रोज की नोटिस और 18 प्रतिशत ब्याज से छोटे व्यापारियों की कमर टूट गई है, व्यापार तबाह हो रहे हैं, लेकिन सरकार वसूली में मस्त है।

 सुरेंद्र वर्मा ने भारतीय जनता पार्टी की सरकारों पर पूंजीवादी नीतियां थोपने का आरोप लगाते हुए कहा है कि जयपुर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को केंद्र की मोदी सरकार ने 50 वर्षों के लिए अडानी को लीज पर दिया है। कारोबार को एक चलती हुई संस्था के रूप में या उसके एक स्वतंत्र हिस्से के रूप में स्थानांतरित करना एक सेवा माना जाता है। सेवा आपूर्ति पर जीएसटी के अंतर्गत 18 प्रतिशत टैक्स के दायरे में आता है, लेकिन केंद्र की मोदी सरकार ने अडानी को जयपुर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर जीएसटी में छूट दिया है। भारतीय जनता पार्टी की तमाम नीतियां चंद पूंजीपति मित्रों के मुनाफे पर ही केंद्रित है, हर तरह की राहत, रियायत और सब्सिडी केवल चंद पूंजीपति मित्रों पर लुटाए जा रहे हैं और छोटे कारोबारी को तबाही करने का षड्यंत्र भारतीय जनता पार्टी के सरकारों के द्वारा रचा गया है।

कहा है कि सोने चांदी, हीरे जवाहरात पर 3 प्रतिशत जीएसटी और कृषि उपकरणों के स्पेयर पार्ट्स पर 28 प्रतिशत कहां का न्याय है? मोदी सरकार टैक्स वसूलों के मामले में अंग्रेजों से भी ज्यादा बेरहम है कापी, किताब, पेंसिल, दूध, दही, पनीर, अनाज, दलहन, तिलहन और कफ़न तक के कपड़ों को नहीं छोड़ा। अस्पताल के कमरे से लेकर दैनिक उपभोग की वस्तुएं तक जीएसटी के दायरे में ला दी गई है। कृषि उत्पादन और खाद, बीज, कीटनाशक तक में मोदी सरकार बेहरमी से जीएसटी वसूल रही है छत्तीसगढ़ में जिले के भीतर ई वे बिल में जो छूट थी उसे खत्म करके छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साय सरकार व्यापार और व्यापारी विरोधी फैसले लादने का काम कर रही है।

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