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धर्म/संस्कृति/आस्था/पर्यटन

भोले के भक्तों की आस्था का केंद्र हैं रायपुर स्थित महादेव घाट...

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के जय स्तंभ चौक से 10 कि मी दूर , दक्षिण में स्थित खारून
नदी के किनारे, महादेव घाट पर बना हठकेश्वर महादेव मंदिर , लोगों की भक्ति, आस्था व
मान्यता का प्रतीक है . देश विदेश से भक्त गण व सैलानी इस मनोरम घाट व अन्य संरचनाओं
को देखने आते हैं .
बताया जाता है कि सन 1400 के करीब राजा ब्रम्हदेव राय के शासनकाल में हाजीराज नायक ने
यह मंदिर बनवाया था . बताया जाता है कि शिकार पर निकले राजा ब्रम्हदेव राय ने नदी के
किनारे शिवलिंग देखकर उस पर नदी से लाकर जल चढ़ा पूजा की थी और अपने लिये पुत्र की
मनोकामना की थी. पुत्र होने के बाद उन्होंने मंदिर निर्माण में सहयोग दिया था.
एक मान्यता यह भी है कि जब भगवान राम वनवास कर रहे थे उस समय भगवान लक्षमण
द्वारा इस शिवलिंग की स्थापना की गई थी . कहा जाता है कि हनुमान जे ने इस शिवलिंग को
अपने कंधे पर उठाकर लाया था.
हठकेश्वर महादेव मंदिर के गर्भ गृह में शिवलिंग के पास ही राम जानकी लक्षमण व बरहा
देवता की प्रतिमा है . मंदिर के बाहर की संरचना आधुनिक काल की दिखती है परंतु पूरा
निर्माण गौर से देखने पर इसके उत्तर मध्यकालीन होने का अनुमान लगाया जा सकता है .
रायपुर के दक्षिण भाग में स्थित खारून नदी पश्चिम की ओर बहती है. इस नदी को द्वापर
काल में द्वारकी के नाम से जाना जाता था. नदी के आग्नेय कोण में श्मशान है, जहां चिताएं
जलती हैं. प्रवेश द्वारा उत्तर की तरफ है और वायव्य कोण में वन और वृक्ष हैं जहां से शुद्ध
वायु प्रवाहित होती हैं .इस तरह से ये पूर्णतः वस्तु के अनुसार होकर शुभ और सिद्धि प्रदान
करने वाली जगह है . इसलिये इस शिव मंदिर की बहुत अधिक मान्यता है . ऋशिकेश की तर्ज़
पर बना लक्ष्मण झूला और हरिद्वार की तर्ज़ पर बना घाट इस जगह को सैलानियों के लिये
विशेष आकर्षण का केंद्र बना देती है . लक्षमण झूले के नीचे स्थित, नौकायान के लिये तैयार
,50 से अधिक सजी हुई नौकाएं और उनमें बजते संगीत की मधुर धुन पर्यटकों का मन मोह
लेती हैं. लक्षमण झूले से हज़ारों लोग नदी के उस पार के मनमोहक गार्डन का मज़ा लेते व 20
फीट ऊंचे खारुनेश्वर महादेव के दर्शन करते हैं . महादेव घाट में स्थित जूना अखाड़े में लगभग
500 सालों से जलती हुई अखंड धूनी है . धूनी की अखंड ज्योति के ताप से पकी रुद्राक्ष की


माला भक्तों को प्रसाद के रूप में दी जाती हैं. रायपुर के विवेकानंद आश्रम के संस्थापक स्वामीआत्मानंड जी की समाधी भी यहां स्थित है .महादेव घाट शिव मंदिर के आसपास लगभग 50
छोटे बड़े मंदिर हैं,. सावन के माह में हज़ारों कावड़िये , यहां शिव लिंग पर जल अर्पण करने
आते हैं. हठकेश्वर महादेव नागर ब्राह्मणों के संरक्षक देवता माने जाते हैं. श्रीमद भागवत गीता
में भी दो जगह इनका उल्लेख है. कहा जाता है कि यहां स्थित नंदी के कानों में मनोकामना
बताने से भगवान भोले नाथ सुनते और पूरी करते हैं. इन सभी कारणों से पर्यटन व धार्मिक
आस्था के मेल, महादेव घाट में भक्तों व सैलानियों की भारी भीड़ रहती है .

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